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लाखों खर्च, नहीं थम रही पराली में आग
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खेत में जलाए गए धान के अवशेष। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ही नहीं जिला प्रशासन की ओर से इस बार धान के सीजन में पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए भरसक प्रयास किए गए। कहीं जागरूकता शिविर तो कहीं खेतों में भी निगरानी और लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद पराली में लगाई जाने वाली आग की घटनाएं जारी रही। किसानों में न जागरूकता का विशेष असर दिखाई दे रहा और न ही जुर्माने का ही डर है।
कुरुक्षेत्र से लेकर गांव किरमिच, हथीरा, फतुहुपुर, अमीन, चंद्रभानपुर, आलमपुर, सुनहेड़ी सहित आसपास के करीब 15 किलोमीटर तक खेतों में 20 से ज्यादा जगहों पर पराली जलती मिली। कई जगहों पर किसान मौके पर खड़े होकर सरेआम पराली व फसल अवशेषों को आग के हवाले कर रहे थे तो कई जगहों पर रात के समय लगाई आग का पता चला।
किसानों में प्रशासन की सख्ती का कहीं असर दिखाई नहीं दिया। हालांकि इस दौरान दो गांवों में प्रशासनिक टीम भी निगरानी के लिए मिली तो किसान उन्हें भरोसा देते रहे कि यहां अब कोई मामला सामने नहीं आएगा। उधर टीम भी कड़ी चेतावनी देकर लौट गई। जिले में अभी तक पराली जलाने के 288 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर घटनाएं हरसेेक के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची है। कृषि विभाग की ओर से इन मामलों के चलते करीब सात लाख रुपये किसानों पर जुर्माना भी किया जा चुका है।
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इसके बावजूद पराली जलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। दीवाली पर्व पर पटाखे व खेतों में पराली जलाने के चलते ही पूरी जीटी बेल्ट में सबसे अधिक प्रदूषण कुरुक्षेत्र में ही दर्ज किया गया। प्रशासन को हरसेक के माध्यम से 244 और अन्य 133 माध्यमों से 377 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की सूचनाएं प्राप्त हुई। इन सूचनाओं के आधार पर कृषि विभाग की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो 290 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की पुष्टि हुई और 87 जगहों का पता नहीं लग पाया।
किसान बोले, यह हमारी मजबूरी
किसानों का कहना था कि अब अगली फसल की तैयारी करनी है। पराली व अन्य अवशेष रोड़ा बन जाते हैं। सरकार की योजना के तहत आज तक 10 फीसदी किसानों को भी लाभ नही मिल पाया है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जो मशीनें चाहिए, उस पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो हर किसान के लिए संभव नहीं है।
अब तक 6695.14 एकड़ की फसलों का प्रबंधन
उपायुक्त शांतनु शर्मा का कहना है कि किसानों को लगातार फसल अवशेष प्रबंधन करके सरकार की योजना का लाभ लेने तथा फसल अवशेषों में आग न लगाने के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेषों का प्रबंधन करने पर 878 किसानों के खाते में 66 लाख 95 हजार 140 रुपये की राशि जमा करवाई जाएगी। इन किसानों ने 6695.14 एकड़ जमीन के फसल अवशेषों के बेलर बनाए। इन किसानों को बेलर बनाने पर सरकार के नियमानुसार एक हजार रुपए प्रति एकड़ मुहैया करवाए जाएंगे।
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कुरुक्षेत्र। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ही नहीं जिला प्रशासन की ओर से इस बार धान के सीजन में पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए भरसक प्रयास किए गए। कहीं जागरूकता शिविर तो कहीं खेतों में भी निगरानी और लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद पराली में लगाई जाने वाली आग की घटनाएं जारी रही। किसानों में न जागरूकता का विशेष असर दिखाई दे रहा और न ही जुर्माने का ही डर है।
कुरुक्षेत्र से लेकर गांव किरमिच, हथीरा, फतुहुपुर, अमीन, चंद्रभानपुर, आलमपुर, सुनहेड़ी सहित आसपास के करीब 15 किलोमीटर तक खेतों में 20 से ज्यादा जगहों पर पराली जलती मिली। कई जगहों पर किसान मौके पर खड़े होकर सरेआम पराली व फसल अवशेषों को आग के हवाले कर रहे थे तो कई जगहों पर रात के समय लगाई आग का पता चला।
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किसानों में प्रशासन की सख्ती का कहीं असर दिखाई नहीं दिया। हालांकि इस दौरान दो गांवों में प्रशासनिक टीम भी निगरानी के लिए मिली तो किसान उन्हें भरोसा देते रहे कि यहां अब कोई मामला सामने नहीं आएगा। उधर टीम भी कड़ी चेतावनी देकर लौट गई। जिले में अभी तक पराली जलाने के 288 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर घटनाएं हरसेेक के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची है। कृषि विभाग की ओर से इन मामलों के चलते करीब सात लाख रुपये किसानों पर जुर्माना भी किया जा चुका है।
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इसके बावजूद पराली जलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। दीवाली पर्व पर पटाखे व खेतों में पराली जलाने के चलते ही पूरी जीटी बेल्ट में सबसे अधिक प्रदूषण कुरुक्षेत्र में ही दर्ज किया गया। प्रशासन को हरसेक के माध्यम से 244 और अन्य 133 माध्यमों से 377 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की सूचनाएं प्राप्त हुई। इन सूचनाओं के आधार पर कृषि विभाग की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो 290 जगहों पर फसल अवशेषों में आग लगाने की पुष्टि हुई और 87 जगहों का पता नहीं लग पाया।
किसान बोले, यह हमारी मजबूरी
किसानों का कहना था कि अब अगली फसल की तैयारी करनी है। पराली व अन्य अवशेष रोड़ा बन जाते हैं। सरकार की योजना के तहत आज तक 10 फीसदी किसानों को भी लाभ नही मिल पाया है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जो मशीनें चाहिए, उस पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो हर किसान के लिए संभव नहीं है।
अब तक 6695.14 एकड़ की फसलों का प्रबंधन
उपायुक्त शांतनु शर्मा का कहना है कि किसानों को लगातार फसल अवशेष प्रबंधन करके सरकार की योजना का लाभ लेने तथा फसल अवशेषों में आग न लगाने के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेषों का प्रबंधन करने पर 878 किसानों के खाते में 66 लाख 95 हजार 140 रुपये की राशि जमा करवाई जाएगी। इन किसानों ने 6695.14 एकड़ जमीन के फसल अवशेषों के बेलर बनाए। इन किसानों को बेलर बनाने पर सरकार के नियमानुसार एक हजार रुपए प्रति एकड़ मुहैया करवाए जाएंगे।