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कुरुक्षेत्र: चौतांग और राखसी नदी से जोड़े जाएंगे मथाना के तीन जोहड़

Tue, 21 Feb 2023 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 21 Feb 2023 01:15 AM IST
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Mathana's three johads will be connected to Chautang and Rakshasi river
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुुुुरुक्षेत्र। वर्तमान समय में बढ़ती आबादी के कारण पानी की उपलब्धता में तेजी से कमी होती जा रही है। अगर समय रहते जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में प्रत्येक व्यक्ति के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण को लेकर कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
यह विचार हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह ने व्यक्त किए। वे गांव मथाना में ग्रामीणों से बातचीत कर रहे थे।
इससे पहले गांव में स्थित तीन तालाबों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों तालाबों का जीर्णोद्घार कर इनको चौतांग व राखसी नदी के साथ जोड़ा जाएगा। प्रदेश में कम होते भूजल स्तर और राज्य में पानी की मांग को देखते हुए जल संरक्षण के नए-नए तरीकों की अपनाया जा रहा है। अरावली व शिवालिक की पहाडिय़ों में छोटे-छोटे झरनों के माध्यम से व्यर्थ बह रहे पानी को बांध बनाकर संरक्षित किया जा रहा है। तालाब, बावड़ी और झीलों के संरक्षण के लिए बारिश के पानी का संचय किया जाना चाहिए। देश में मानसूनी वर्षा जलापूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। वर्तमान में वर्षा जल का समुचित संग्रह एवं संचयन न होने के कारण, इसका एक बड़ा हिस्सा बहकर निकल जाता है।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने व्यर्थ बह रहे पानी को बांध बनाकर संरक्षित कर वर्षा जल संचयन का बीड़ा उठाया है। इसके साथ ही जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई के उपकरणों पर सरकार द्वारा खासा अनुदान दिया जा रहा है। खेत में तालाब निर्माण के लिए किसान को कुल खर्च पर 70 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी और उसे केवल 30 प्रतिशत राशि ही देनी होगी। इसी तरह दो एचपी से 10 एचपी तक की क्षमता वाले सोलर पंप की स्थापना के लिए किसान को 25 प्रतिशत राशि देनी होगी और उसे 75 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।
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