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शहीद का दर्द- ना 50 लाख, ना भाई को नौकरी, ना ही पत्नी की प्रमोशन

Sun, 26 Feb 2017 12:44 AM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र Updated Sun, 26 Feb 2017 12:44 AM IST
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Martyr's pain-not 50 million, not brother a job, nor the wife of the promotion, Kurukshetra
शहीद का दर्द- ना 50 लाख, ना भाई को नौकरी, ना ही पत्नी की प्रमोशन - फोटो : Amar Ujala

मातृभूमि की रक्षा के खातिर जिस घर का दीया बुझ गया था, अब उसकी शहादत के पांच माह बाद उसके परिजन सरकारी घोषणाएं पूरी कराने के लिए चंडीगढ़ और दिल्ली दरबार के चक्कर लगाने को विवश हैं। विडंबना देखिये कि शहीद की अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि समारोह में जिन नेताओं के घड़ियाली आंसू बहने लगे थे, वे इस शहीद का स्मारक पांच महीने में भी क्यों नहीं बनवा सके? इसका जवाब इन नेताओं को देते नहीं बन रहा।

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बता दें कि अमर उजाला ने शहीद मंदीप के परिवार यह दर्द गणतंत्र दिवस को प्रकाशित समाचार में भी प्रमुखता से उजागर किया था। अब शहीद की पत्नी और परिवार के सदस्य तीन दिन पहले चंडीगढ़ में जहां सीएम मनोहर लाल से मिलने पहुंचे, वहीं 24
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फरवरी को उन्हें निराश होकर दिल्ली दरबार में दस्तक देने को मजबूर होना पड़ा। हालांकि शहीद मंदीप के परिवार के सदस्य दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए आए थे, लेकिन चुनावी सभाओं में व्यस्तताओं के चलते उनसे मिलना नहीं हुआ,मगर अगले दिनों में मुलाकात के लिए पीएमओ को अर्जी देकर घर लौट आए हैं।
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शनिवार शाम को घर पहुंची शहीद की पत्नी ने जो दर्द बयां किया वो वाकई इस परिवार के साथ घिनौना मजाक है। यहां उल्लेखनीय है कि मंदीप की शहादत के बाद जहां कई तरह की घोषणाएं की गई थीं, उनमें एक मांग गांव शहीद स्मारक की भी थी। हद की बात यह है कि गांव में शहीद स्मारक के नाम पर पांच माह में एक चबूतरा ही बन सका है। इस चबूतरे पर अब तक शहीद की प्रतिमा नहीं लग सकी। शहीद की माता निर्मला देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 50 लाख की घोषणा आज तक पूरी नहीं की। वहीं शहीद के बड़े भाई को सरकारी नौकरी के बारे में आज तक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई। गांव में शहीद के नाम पर बनने वाला एंट्री गेट आज तक नहीं बना। इतना ही नहीं गांव में शहीद स्मारक तक नहीं बन सका। हरियाणा पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर शाहाबाद में तैनात शहीद की पत्नी प्रेरणा को आज तक इंस्पेक्टर नहीं बनाया जा सका।       

    
शहीद की मां ने कहा बहू को इंस्पेक्टर बनाने पर सीएम ने किया अनसुना      
शहीद की माता निर्मला देवी ने बताया किया तीन दिन पहले शहीद परिवार मुख्यमंत्री से चंडीगढ़ में मिला था और सरकार की उपरोक्त घोषणाओं को पूरा करने के लिए बात की थी। शहीद की माता के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सभी घोषणाओं को गौर से सुना था, लेकिन शहीद की पत्नी को इंस्पेक्टर बनाने की बात को अनसुना कर दिया। बताया गया है कि शहीद की पत्नी प्रेरणा का कुछ ही दिन बाद मधुबन में एएसआई के लिए टेस्ट है। शहीद की माता का कहना है कि वह एएसआई तो रूटीन में बन ही जाएगी,लेकिन सरकार को चाहिए कि शहीद की पत्नी को हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर बनाया जाए।       

 जल्द पूरी होगी सभी घोषणाएं            
इस मामले में विधायक पवन सैनी ने शहीद के परिवार के लिए सरकार ने जो घोषणाएं की थी,उन्हें अति
शीघ्र पूरा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वह शहीद के परिवार को 50 लाख की राशि जल्द से जल्द दिलाने की का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य जो घोषणाएं थी वे भी पूरी कराई जाएंगी।             


खिलाड़ियों से ज्यादा शहीदों का भी करना चाहिए सम्मान            
सांसद राजकुमार सैनी ने कहा की जो बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद होते हैं, सबसे पहले उनके परिवार को मान समान देना चाहिए। देश में खिलाड़ियों से ज्यादा सुविधाएं शहीदों के परिवार के सदस्यों को मिलनी चाहिए। इसके अलावा आज भी काफी शहीद परिवार हैं, जिन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

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