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हादसे में शहीद हुए गुरजेंट का आज राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
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असम में हादसे के दौरान शहीद हुए शाहाबाद के गांव गुरजेंट सिंह के माता-पिता, भाई-बहनों और पत्नी को गुरजेंट के जाने का गम तो हैं, लेकिन उसकी शहीदी पर सभी गर्व महसूस कर रहे हैं।
दरअसल, गत शुक्रवार को असम में गुरजेंट सिंह सेना की गाड़ी में सवार होकर गंतव्य की ओर जा रहा था। इसी बीच अचानक उनकी गाड़ी खाई में जा गिरी। इस हादसे में गुरजेंट सिंह शहीद हो गए थे। गुरजेंट का पार्थिव शरीर आज सुबह आठ बजे उनके पैतृक गांव राय माजरा पहुंचेगा पिता रूलदा राम और माता कर्मजीत कौर ने कहा कि उन्होंने अपने लाल को देश की रक्षा के लिए भेजा था और उनके बहादुर सपूत ने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया है।
माता-पिता ने कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है। इसलिए वह चाहते हैं कि शहीद की पत्नी रिंकी को हरियाणा सरकार या फिर सेना में नौकरी दी जाए, ताकि शहीद के परिवार का पालन-पोषण सही ढंग से हो सके। पिता रूलदा राम ने कहा कि गुरजेंट अपने 9 माह के बेटे हरकीरत सिंह व तीन वर्षीय दिव्यांग बेटी परनीत को छोड़ गया है। शहीद के भाई सतनाम सिंह ने बताया कि राखी के दिन करीब डेढ़ महीने की छुट्टी काटकर गुरजेंट वापस ड्यूटी पर गया था। सोमवार को सुबह शहीद का पार्थिव शरीर गांव रायमाजरा में पहुंचेगा और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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माता कर्मजीत कौर ने बताया कि शहीद हुए बेटे गुरजेंट ने हादसे से दो दिन पहले उसके और सभी परिजनों के साथ वीडियो कॉल करके बात की थी। इस दौरान गुरजेंट ने कहा था कि मां यहां नेटवर्क की समस्या रहती है और जब भी उसे समय मिलेगा तो वह वीडियो कॉल से बात करता रहेगा। माता कर्मजीत कौर ने बताया कि गुरजेंट जब डेढ़ माह की छुट्टी पर आया था तो घर के सभी काम संवार कर गया था, लेकिन परिवार को नहीं पता कि इस छुट्टी से जाने के बाद गुरजेंट कभी वापस नहीं आएगा। बहन जसविंदर व चरणजीत ने कहा कि उनका भाई बहादुर था और राखी के दिन वह राखी बंधवाकर ड्यूटी पर वापस गया था। गुरजेंट की कमी हमेशा खलती रहेगी।
सैनिक का शव सोमवार सुबह गांव में पहुंचना है, लेकिन श्मशान घाट के हालात दयनीय हैं। गांव वासी अपने स्तर पर श्मशान घाट में रास्ता बनाने से मिट्टी डालने का काम कर रहे हैं। सूचना के बाद भी रविवार सुबह तक प्रशासन का कोई अधिकारी संज्ञान लेने नहीं पहुंचा था। जिस पर भाकियू के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने एसडीएम कपिल शर्मा से बातचीत की और कहा कि सैनिक के पार्थिव शरीर के संस्कार को लेकर उचित व्यवस्था की जाए।
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दरअसल, गत शुक्रवार को असम में गुरजेंट सिंह सेना की गाड़ी में सवार होकर गंतव्य की ओर जा रहा था। इसी बीच अचानक उनकी गाड़ी खाई में जा गिरी। इस हादसे में गुरजेंट सिंह शहीद हो गए थे। गुरजेंट का पार्थिव शरीर आज सुबह आठ बजे उनके पैतृक गांव राय माजरा पहुंचेगा पिता रूलदा राम और माता कर्मजीत कौर ने कहा कि उन्होंने अपने लाल को देश की रक्षा के लिए भेजा था और उनके बहादुर सपूत ने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया है।
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माता-पिता ने कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है। इसलिए वह चाहते हैं कि शहीद की पत्नी रिंकी को हरियाणा सरकार या फिर सेना में नौकरी दी जाए, ताकि शहीद के परिवार का पालन-पोषण सही ढंग से हो सके। पिता रूलदा राम ने कहा कि गुरजेंट अपने 9 माह के बेटे हरकीरत सिंह व तीन वर्षीय दिव्यांग बेटी परनीत को छोड़ गया है। शहीद के भाई सतनाम सिंह ने बताया कि राखी के दिन करीब डेढ़ महीने की छुट्टी काटकर गुरजेंट वापस ड्यूटी पर गया था। सोमवार को सुबह शहीद का पार्थिव शरीर गांव रायमाजरा में पहुंचेगा और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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माता कर्मजीत कौर ने बताया कि शहीद हुए बेटे गुरजेंट ने हादसे से दो दिन पहले उसके और सभी परिजनों के साथ वीडियो कॉल करके बात की थी। इस दौरान गुरजेंट ने कहा था कि मां यहां नेटवर्क की समस्या रहती है और जब भी उसे समय मिलेगा तो वह वीडियो कॉल से बात करता रहेगा। माता कर्मजीत कौर ने बताया कि गुरजेंट जब डेढ़ माह की छुट्टी पर आया था तो घर के सभी काम संवार कर गया था, लेकिन परिवार को नहीं पता कि इस छुट्टी से जाने के बाद गुरजेंट कभी वापस नहीं आएगा। बहन जसविंदर व चरणजीत ने कहा कि उनका भाई बहादुर था और राखी के दिन वह राखी बंधवाकर ड्यूटी पर वापस गया था। गुरजेंट की कमी हमेशा खलती रहेगी।
सैनिक का शव सोमवार सुबह गांव में पहुंचना है, लेकिन श्मशान घाट के हालात दयनीय हैं। गांव वासी अपने स्तर पर श्मशान घाट में रास्ता बनाने से मिट्टी डालने का काम कर रहे हैं। सूचना के बाद भी रविवार सुबह तक प्रशासन का कोई अधिकारी संज्ञान लेने नहीं पहुंचा था। जिस पर भाकियू के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने एसडीएम कपिल शर्मा से बातचीत की और कहा कि सैनिक के पार्थिव शरीर के संस्कार को लेकर उचित व्यवस्था की जाए।