Haryana: गुरुद्वारों के प्रबंधकों को एसजीपीसी से लेनदेन करने पर रोक, कमेटियों को जारी किए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद एचएसजीपीसी ने तमाम गुरुद्वारा कमेटियों को निर्देश जारी किए। गुरुद्वारों का प्रबंधन सौंपने के लिए एसजीपीसी को पत्र भेजा जाएगा। प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है। कमेटी की प्रधानगी को लेकर झींडा-दादूवाल आमने-सामने हैं, मगर एकजुटता का संदेश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) ने तुरंत प्रभाव से प्रदेश की गुरुद्वारा कमेटियों को निर्देश देते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से लेनदेन करने पर रोक लगा दी हैं। हरियाणा के गुरुद्वारों का पैसा पंजाब नहीं जाएगा, इसे लेकर एचएसजीपीसी के नेता पूरी तरह एकजुट दिखाई दिए। इसके अलावा हरियाणा की कमेटी एसजीपीसी को पत्र लिखकर यह मांग करेगी कि जल्द से जल्द गुरुद्वारों का प्रबंधन एचएसजीपीसी को सौंपा जाए। इसके लिए सिख नेताओं ने प्रदेश सरकार से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है।
हरियाणा के दोनों सिख नेताओं बलजीत सिंह दादूवाल व जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि प्रदेश के सभी गुरुद्वारों के प्रबंधकों को एसजीपीसी के साथ किसी प्रकार के भी लेनदेन न करने को कह दिया गया है। अगर एसजीपीसी ने प्रबंधन नहीं सौंपा तो सरकार से नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की जाएगी। सरकार को भी जल्द फैसला लेना होगा। हरियाणा के कुल गुरुद्वारों में से फिलहाल पांच गुरुद्वारों का प्रबंधन ही अभी एचएसजीपीस के हाथों में है।
उधर, सुप्रीम फैसले के बाद हरियाणा के गुरुद्वारों के प्रबंधन की कमान कौन संभालेगा, इसका फैसला भी सिख नेताओं ने हरियाणा सरकार पर ही छोड़ दिया है। इस मसले पर एचएसजीपीसी एडहॉक के पूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींडा और मौजूदा प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल भले ही आमने-सामने हैं। गुरुवार को दोनों सिख नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ कुरुक्षेत्र स्थित गुरुद्वारा छठी पातशाही पहुंचे।
यहां उन्होंने भले ही एकजुटता दिखाने का प्रयास किया, लेकिन इसी मसले पर दोनों के बीच मतभेद भी दिखाई दिए। इस दौरान दोनों नेताओं ने यह बात एक सुर से कही कि अब एसजीपीसी को बिना किसी विरोध के गुरुद्वारों का प्रबंधन एचएसजीपीसी को सौंपना ही होगा।
गुरुवार को गुरुद्वारा साहिब में दोनों सिख नेताओं ने जत्थेबंदियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर मंथन किया। दोनों सिख नेता पहली बार एक साथ दिखाई दिए और उन्होंने किसी प्रकार का आपसी मतभेद न होने का दावा करते हुए एक साथ लंगर भी चखा। बातचीत में अपना-अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए दोनों सिख नेताओं ने संगत में एकजुटता का संदेश दिया।
इसके बाद जहां दादूवाल कैथल के लिए निकल गए तो वहीं जगदीश सिंह झींडा पूर्व युवा प्रदेशाध्यक्ष कंवलजीत सिंह अजराना व कई अन्य सदस्यों के साथ जिला उपायुक्त से मिलने पहुंचे। वहां उन्होंने डीसी के माध्यम से मांग की कि प्रदेश सरकार एचएसजीपीसी की आम सभा की बैठक कर जल्द गुरुद्वारों के प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारी दिए जाने पर फैसला करे। यहीं नहीं गुरुद्वारों से एसजीपीसी के साथ लेन-देन पूरी तरह से रोका जाए ताकि कोई गड़बड़ी न की जा सके और हरियाणा के सिखों को जल्द इनकी कमान दिलाई जाए। अब सरकार के आदेश पर सभी की नजरें टिक गई है।
आम सभा की बैठक में हो प्रधानगी का फैसला : झींडा
एचएसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष सरदार जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि फैसला किसी प्रधान के हक में नहीं एचएसजीपीसी के हक में आया है। अभी उनके साथ-साथ दादूवाल व अन्य सदस्य सभी एक जैसे ही है। सरकार गुरुद्वारा एक्ट 2014 के अनुसार एचएसजीपीसी की आम सभा की बैठक में सदस्यों से ही प्रधानगी का फैसला कराएं।
उन्होंने कहा कि कमेटी का मामला अदालत में भी चला गया था और अदालत ने स्टे लगा दिया था, यहां तक कि दादूवाल आज तक आम सभा की बैठक तक नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई दादूवाल से नहीं एसजीपीसी के साथ थी, जो हरियाणा की सिखों ने जीत ली है। अब अगला कदम सरकार को उठाना है। वे जल्द सीएम व राज्यपाल से भी मिलेंगे।
मुझे चुना गया था प्रधान : दादूवाल
एचएसजीपीसी के मौजूदा अध्यक्ष बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि नियमानुसार हुए चुनाव में उन्हें प्रधान के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह इसे बखूबी निभाते आए हैं। खुद पूर्व प्रधान झींडा ने भी उन्हें बधाई दी थी। कुछ सदस्य हाईकोर्ट पहुंच गए थे, लेकिन अदालत ने गुरुद्वारों के प्रबंधन पर स्टे लगाया था न कि कमेटी पर।
कमेटी बनी रही और नियमानुसार काम करती रही, लेकिन वे कुछ कारणों से आम सभा की बैठक नहीं कर पाए। उन्होंने भी स्पष्ट किया कि उनका झींडा के साथ कोई मतभेद नहीं है, लेकिन अब फैसला हरियाणा सरकार को करना है। फिलहाल एसजीपीसी को प्रदेश के गुरुद्वारों का प्रबंधन एचएसजीपीसी को ही सौंपना होगा। उसके बाद जैसे सरकार कानून के दायरे में कार्रवाई बढ़ाएगी, वही मान्य होगी।