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आचार्य तकनीकी ज्ञान से शिक्षण को बनाएं रोचक
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शिविर में हिस्सा लेने वाले शिक्षकों के साथ मुख्यातिथि ललित बिहारी गोस्वामी व अन्य। ंवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हिंदू शिक्षा समिति एवं विद्या भारती हरियाणा के तत्वावधान आयोजित 15 दिवसीय आचार्य विकास वर्ग संपन्न हुआ। गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आज तकनीक का युग है। सभी आचार्यों को तकनीकी ज्ञान का प्रयोग करके अपने शिक्षण को रोचक बनाना चाहिए।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह सचिव ललित बिहारी गोस्वामी ने कहा कि भले ही हम प्रशिक्षित आचार्य हैं, मगर हमें भी इस प्रकार के वर्गों में रहकर अपनी पाठन शैली, सामान्य ज्ञान, शिक्षण विधि, पाठ्येतर गतिविधियों पर चिंतन और अभ्यास करना चाहिए।
समिति के अध्यक्ष डॉ. ऋषिराज वशिष्ठ ने कहा कि वर्ग में कक्षा शिक्षण के अतिरिक्त नेतृत्व, अनुशासन, योग सहयोग, वाद्य, गायन, व्यक्तित्व इत्यादि गुणों का भी विकास होता है। संयोजक सुभाष शर्मा ने वर्ग का वृत्त प्रस्तुत किया। डॉ. प्रमोद ने कविता प्रस्तुत की। धनेश चंद्र डिमरी ने आचार्य की हस्तलिखित पत्रिका अमृत कलश का विमोचन अतिथियों के माध्यम से कराया। इस मौके पर डॉ. अवधेश पांडेय, डॉ. घनश्याम शर्मा, रमेश गुलाटी, अशोक रोशा, रमेश शास्त्री, अश्वनी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। हिंदू शिक्षा समिति एवं विद्या भारती हरियाणा के तत्वावधान आयोजित 15 दिवसीय आचार्य विकास वर्ग संपन्न हुआ। गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आज तकनीक का युग है। सभी आचार्यों को तकनीकी ज्ञान का प्रयोग करके अपने शिक्षण को रोचक बनाना चाहिए।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के सह सचिव ललित बिहारी गोस्वामी ने कहा कि भले ही हम प्रशिक्षित आचार्य हैं, मगर हमें भी इस प्रकार के वर्गों में रहकर अपनी पाठन शैली, सामान्य ज्ञान, शिक्षण विधि, पाठ्येतर गतिविधियों पर चिंतन और अभ्यास करना चाहिए।
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समिति के अध्यक्ष डॉ. ऋषिराज वशिष्ठ ने कहा कि वर्ग में कक्षा शिक्षण के अतिरिक्त नेतृत्व, अनुशासन, योग सहयोग, वाद्य, गायन, व्यक्तित्व इत्यादि गुणों का भी विकास होता है। संयोजक सुभाष शर्मा ने वर्ग का वृत्त प्रस्तुत किया। डॉ. प्रमोद ने कविता प्रस्तुत की। धनेश चंद्र डिमरी ने आचार्य की हस्तलिखित पत्रिका अमृत कलश का विमोचन अतिथियों के माध्यम से कराया। इस मौके पर डॉ. अवधेश पांडेय, डॉ. घनश्याम शर्मा, रमेश गुलाटी, अशोक रोशा, रमेश शास्त्री, अश्वनी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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