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Kurukshetra News: मौनी अमावस्या के महायोग में होगा महाकुंभ अमृत स्नान, श्रद्वालुओं में उत्साह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2025 01:51 AM IST
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Maha Kumbh Amrit Snan will happen on the Mahayog of Mauni Amavasya, enthusiasm among devotees
कुरुक्षेत्र। हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का अहम महत्व है। इस दिन सूर्यदेव और पितरों की पूजा के साथ-साथ दान-पुण्य भी बढ़चढ़ कर किया जाता है। इस दिन पितरों के नाम तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है तो इसके साथ ही इस दिन दान करने से कुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार के दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस बार मौनी अमावस्या कल 29 जनवरी को है। इस दिन प्रयागराज महाकुंभ में करोड़ों लोग स्नान करेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में धर्मनगरी से भी पहुंचे हैं। इनमें कईं मुख्य संत भी शामिल है। मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर श्रद्वालुओं में खास उत्साह बना हुआ है।
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ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस दिन मौन रखकर उपवास और स्नान का विशेष महत्व है। मौनी का अर्थ है मौन और इस दिन मौन रहकर आत्मशांति और संयम का पालन करने से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ़ रामराज कौशिक ने बताया कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन किसी पवित्र नदी तालाब सरोवर और गंगा स्नान का विशेष महत्व है और श्रद्धालु प्रयागराज के संगम में इस दिन स्नान करेंगे। यह दिन सूर्यदेव और पितरों की पूजा के लिए भी उत्तम माना जाता है।
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ब्रह्म मुहूर्त 29 जनवरी को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से
ज्योतिषाचार्य के अनुसार हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह की अमावस्या तिथि 28 जनवरी को शाम 7 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। स्नान दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त 29 जनवरी को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक होगा।
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यह माना जाता है मौनी अमावस्या का महत्व

पंडित रामराज बताते हैं कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी में स्नान करना पवित्र होता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत समान हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार, माघ माह की अमावस्या पर ऋषि मनु का जन्म हुआ था इसलिए यह तिथि मौनी अमावस्या के नाम से जानी गई। जो मनुष्य इस दिन मौन व्रत रखता है उसे अपने जीवन में वाक सिद्धि प्राप्त होती है। जो लोग अपने पूर्वजों की कृपा पाना चाहते हैं, वह मौनी अमावस्या के दिन पीले वस्त्र पहनकर पितरों का ध्यान करें। ऐसा करना शुभ होता है और इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं।
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