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Kurukshetra News: बिजली चोरी मामले में निचली अदालत का फैसला पलटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:55 AM IST
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Lower court's decision overturned in electricity theft case
कुरुक्षेत्र। जिला अदालत ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) की अपील को स्वीकार करते हुए शाहाबाद के निवासी भूपिंदर सिंह के वाद को खारिज कर दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) अरविंद कुमार ने निचली अदालत के फैसले को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि विद्युत चोरी जैसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सीमित है।
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इस फैसले से निगम को राहत मिली है जबकि उपभोक्ता को 59,566 रुपये की पेनल्टी वापस करने की मांग असफल रही। मामला वर्ष 2021 का है, जब बिजली निगम के अधिकारियों ने 21 अक्तूबर को भूपिंदर सिंह के विजय कॉलोनी स्थित घर का निरीक्षण किया। आरोप लगाया कि वह मीटर को बाईपास कर सीधी बिजली आपूर्ति का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ता पर 22 अक्टूबर को 59,566 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
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निगम ने इसे उपभोक्ता का दूसरा अपराध बताते हुए गैर-समझौता योग्य ठहराया। भूपिंदर सिंह ने दावा किया कि उनका कनेक्शन नियमित था। निगम ने झूठी जांच की और कोई नोटिस या सुनवाई का मौका नहीं दिया। इसके साथ ही उपभोक्ता भूपिंदर ने दावा किया कि उनसे दबाव में जुर्माना राशि जमा करवाई गई।
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निचली अदालत ने 14 अक्टूबर 2024 को भूपिंदर के पक्ष में फैसला देते हुए जुर्माने को अवैध करार दिया। वह जुर्माने की राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने और आगे वसूली न करने का आदेश दिया। निगम ने सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अपील दायर की। अपीलकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत सिविल कोर्ट का हस्तक्षेप वर्जित है।
वहीं वादकारी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जांच में वीडियोग्राफी और नियमों का पालन हुआ है। उन्होंने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निचली अदालत ने गलत अधिकार क्षेत्र ग्रहण किया।
उपभोक्ता के वकील ने कहा कि निगम ने जांच मनमाने ढंग से की है व निचली अदालत ने उनकी ओर से पेश किए गए सबूतों को सही ठहराया है। इसलिए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने व निगम की ओर से दायर अपील को खारिज करने की मांग की।
एडीजे अरविंद कुमार ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के डबल बेंच निर्णयों का संदर्भ दिया, जिसमें धारा 145 के तहत सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र पूर्णत: वर्जित है लेकिन रिट अदालत में वैधता की सीमित समीक्षा संभव है।

अदालत ने पाया कि मामला धारा 135 के दायरे में आता है, इसलिए निचली अदालत का फैसला गलत था। अपील स्वीकार कर निचली अदालत का निर्णय रद्द किया, भूपिंदर का वाद खारिज हुआ। डिक्री शीट तैयार करने तथा रिकॉर्ड लौटाने का निर्देश दिया।
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