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भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं किया गो का संरक्षण व संवर्धन : भारती
Sat, 21 Feb 2026 03:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 21 Feb 2026 03:26 AM IST
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण कथा में हिस्सा लेते श्रद्धालु। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से हुड्डा ग्राउंड सेक्टर 10 सेक्टर में आयोजित श्री कृष्ण कथा के चौथे दिन साध्वी कालिंदी भारती ने प्रभु के अवतरण की गाथा का वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि जब-जब प्रभु इस धरा पर अवतरित होते हैं धर्म की स्थापना करने के लिए तो उसके अवतरण एक प्रयोजन गो की रक्षा करना भी होता है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने गो का संरक्षण व संवर्धन किया इसलिए उन्हें गोपाल भी कहा जाता है।
भारती ने कहा कि गो की रक्षा व हित संवर्धन के लिए स्वयं परमात्मा इस धरती पर आते हैं पर उनकी संतान इस सेवा से क्यों वंचित हैं? वैदिक काल से मानव जीवन का आधार यज्ञ, दान व तप को माना गया है। यदि गहराई से विचार किया जाए तो इन सब का आधार सिर्फ गौ ही है। यदि भारतीय संस्कृति की व्याख्या संक्षेप में करनी हो तो यह गौ रूप है। गो जैसा परोपकारी जीव हमें मेहनत व शांत जीवन जीने की प्रेरणा देता है। गो प्रेम कारण ही हमारे देश में गोकुल, गोवर्धन, गोपाल इत्यादि नाम प्रचलित हैं।
साध्वी ने कहा कि हमारे देश की संपन्नता गाय के साथ जुड़ी हुई है। गाय मानव का सच्चा साथी है। आज पशु मेलों के नाम पर करोड़ों की संख्या में हमारा पशु धन बूचड़खानों में पहुंचता है। सदियों से अहिंसा का पुजारी भारत देश आज हिंसक व मांस निर्यातक देश के रूप में उभरता जा रहा है। देश के विभाजन से पहले देश में केवल 300 बूचड़खाने थे परंतु आज देश में 31000 बूचड़खाने हैं। इस मौके पर शाहबाद रामकरण काला विधायक, उमा सुधा पूर्व चेयरपर्सन नगर परिषद्, संजय बठला चेयरमैन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, राजेश कुमार जिला संयोजक विद्या भारती, डॉ.सुमिता ठाकुर प्रिंसिपल ग्रीनफील्ड स्कूल, डॉ. लवलीन शर्मा प्रिंसिपल पर्ल इंटरनेशनल स्कूल,निशि गुप्ता कांग्रेस नेत्री, ज्योति खनगवाल आदि विशेष तौर पर पहुंचे।
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भारती ने कहा कि गो की रक्षा व हित संवर्धन के लिए स्वयं परमात्मा इस धरती पर आते हैं पर उनकी संतान इस सेवा से क्यों वंचित हैं? वैदिक काल से मानव जीवन का आधार यज्ञ, दान व तप को माना गया है। यदि गहराई से विचार किया जाए तो इन सब का आधार सिर्फ गौ ही है। यदि भारतीय संस्कृति की व्याख्या संक्षेप में करनी हो तो यह गौ रूप है। गो जैसा परोपकारी जीव हमें मेहनत व शांत जीवन जीने की प्रेरणा देता है। गो प्रेम कारण ही हमारे देश में गोकुल, गोवर्धन, गोपाल इत्यादि नाम प्रचलित हैं।
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साध्वी ने कहा कि हमारे देश की संपन्नता गाय के साथ जुड़ी हुई है। गाय मानव का सच्चा साथी है। आज पशु मेलों के नाम पर करोड़ों की संख्या में हमारा पशु धन बूचड़खानों में पहुंचता है। सदियों से अहिंसा का पुजारी भारत देश आज हिंसक व मांस निर्यातक देश के रूप में उभरता जा रहा है। देश के विभाजन से पहले देश में केवल 300 बूचड़खाने थे परंतु आज देश में 31000 बूचड़खाने हैं। इस मौके पर शाहबाद रामकरण काला विधायक, उमा सुधा पूर्व चेयरपर्सन नगर परिषद्, संजय बठला चेयरमैन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, राजेश कुमार जिला संयोजक विद्या भारती, डॉ.सुमिता ठाकुर प्रिंसिपल ग्रीनफील्ड स्कूल, डॉ. लवलीन शर्मा प्रिंसिपल पर्ल इंटरनेशनल स्कूल,निशि गुप्ता कांग्रेस नेत्री, ज्योति खनगवाल आदि विशेष तौर पर पहुंचे।
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