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कुरुक्षेत्र: भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार किया नष्ट

Tue, 21 Feb 2023 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 21 Feb 2023 01:29 AM IST
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Lord Krishna destroyed the ego of Indra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। श्री गौ गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति की ओर से सेक्टर-नौ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की ओर से देवराज इंद्र का अहंकार नष्ट करने का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को अहंकार नहीं करने की सीख दी।

कथावाचक अनिल शास्त्री ने बताया कि एक बार देवराज इंद्र को अपनी शक्ति का अभिमान हो गया। तब लीलाधारी श्री कृष्ण ने एक लीला रची। एक दिन श्रीकृष्ण ने देखा कि सभी ब्रजवासी तरह-तरह के पकवान बना रहे हैं। पूजा का मंडप सजाया जा रहा है। और सभी लोग सुबह से ही पूजन की सामग्री एकत्रित करने में व्यस्त हैं। तब श्रीकृष्ण ने यशोदा जी से पूछा कि मईया ये आज सभी लोग किसके पूजन की तैयारी कर रहे हैं। इस पर मैया यशोदा ने कहा कि पुत्र सभी ब्रजवासी इंद्र देव के पूजन की तैयारी कर रहे हैं।
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तब कन्हैया ने कहा कि सभी लोग इंद्रदेव की पूजा क्यों कर रहे हैं तो माता यशोदा उन्हें बताती हैं कि इंद्रदेव वर्षा करते हैं, जिससे अन्न की पैदावार अच्छी होती है। हमारी गायों को चारा प्राप्त होता है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि वर्षा करना तो इंद्रदेव का कर्तव्य है। यदि पूजा करनी है तो हमें गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गायें तो वहीं चरती हैं और हमें फल-फूल, सब्जियां आदि भी गोवर्धन पर्वत से प्राप्त होती हैं।
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इसके बाद सभी ब्रजवासी इंद्रदेव की बजाए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस बात को देवराज इंद्र ने अपना अपमान समझा और क्रोध में आकर प्रलयदायक मूसलाधार बारिश शुरू कर दी, जिससे हर ओर त्राहि-त्राहि होने लगी। सभी अपने परिवार और पशुओं को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। तब ब्रजवासी कहने लगे कि यह सब कृष्णा की बात मानने का कारण हुआ है, अब हमें इंद्रदेव का कोप सहना पड़ेगा। भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और सभी ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया।

सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। तब इंद्रदेव को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। इसके बाद से गोवर्धन पर्वत के पूजन की परंपरा आरंभ हुई। इस अवसर पर डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. आनंद सिंह, डॉ. ऋषि शर्मा, डॉ. सुखबीर सिंह, जेपी शास्त्री, विकास गर्ग, हरीश गर्ग, राजेश शर्मा, अमनदीप कौर, राखी गोयल, भावना शर्मा, नीरज देवी, सरिता देवी आदि मौजूद रहे।
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