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भागवत कथा सुनने से पापों से होते मुक्त : अनिल शास्त्री
Wed, 29 Apr 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 29 Apr 2026 02:10 AM IST
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कुरुक्षेत्र। दयांनद कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंच पर आशीर्वाद लेते श्रद्धालु। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में दयानंद कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति प्रवचनों से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान विष्णु ने सतयुग में अपना पांचवा अवतार वामन का लिया था। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने वाला मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है।
भागवत कथा के अनुसार, राजा बलि ने इंद्र का देवलोक हड़प लिया था। इंद्र को देवलोक पर अधिकार दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। भगवान वामन एक बौने ब्राह्मण के वेश में विरोचन के पुत्र व प्रह्लाद के पौत्र राजा बलि के पास गए। उन्हाेंने बलि से अपने रहने के लिए तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।
इसके बाद ही भगवान वामन ने अपना विशाल स्वरूप धारण कर पहले पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) और दूसरे में देवलोक नाप व तीसरे कदम के लिए कोई भूमि नहीं बची तो बलि ने तीसरे पग के लिए सिर सामने करके स्वयं को ही समर्पित कर दिया। भगवान वामन बलि की वचनबद्धता से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे पाताल लोक देने का निश्चय किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मुख्य आयोजक सुरेश मित्तल, सीमा मित्तल, अभिषेक मित्तल, शैली मित्तल, कनव मित्तल, तृषिका और काव्या मित्तल ने व्यासपीठ व अपने पितरों का पूजन किया।
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कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में दयानंद कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति प्रवचनों से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान विष्णु ने सतयुग में अपना पांचवा अवतार वामन का लिया था। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने वाला मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है।
भागवत कथा के अनुसार, राजा बलि ने इंद्र का देवलोक हड़प लिया था। इंद्र को देवलोक पर अधिकार दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। भगवान वामन एक बौने ब्राह्मण के वेश में विरोचन के पुत्र व प्रह्लाद के पौत्र राजा बलि के पास गए। उन्हाेंने बलि से अपने रहने के लिए तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।
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इसके बाद ही भगवान वामन ने अपना विशाल स्वरूप धारण कर पहले पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) और दूसरे में देवलोक नाप व तीसरे कदम के लिए कोई भूमि नहीं बची तो बलि ने तीसरे पग के लिए सिर सामने करके स्वयं को ही समर्पित कर दिया। भगवान वामन बलि की वचनबद्धता से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे पाताल लोक देने का निश्चय किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मुख्य आयोजक सुरेश मित्तल, सीमा मित्तल, अभिषेक मित्तल, शैली मित्तल, कनव मित्तल, तृषिका और काव्या मित्तल ने व्यासपीठ व अपने पितरों का पूजन किया।
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