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Kurukshetra News: एक सहकारी समिति का लाइसेंस रद्द, चार खाद विक्रेताओं को थमाए कारण बताओ नोटिस
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कुरुक्षेत्र। जिले में भले ही अन्य क्षेत्रों की तरह डीएपी की किल्लत नहीं है लेकिन अन्य क्षेत्रों की तर्ज पर हालात गंभीर न हों, इसको लेकर प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है। शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र लाडवा में एक सहकारी समिति का लाइसेंस रद्द कर दिया गया तो चार निजी खाद विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। उधर खाद समय पर न मिल पाने के चलते किसानों में गेहूं की बिजाई में देरी की चिंता सता रही है।
जिले में 19 हजार 500 एमटी खाद की जरूरत है, जिसके चलते अभी तक 16 हजार एमटी खाद मिल चुका है। इसमें से अधिकतर खाद किसान ले चुके हैं तो वहीं माना जा रहा है कि 70 फीसदी रकबे में गेहूं बिजाई भी की जा चुकी है। बता दें कि हर बार की तरह इस बार भी जिले में तीन लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बिजाई की जानी है, जिसके लिए किसान धान कटाई के साथ ही तैयारी में जुट गए थे। अभी गेहूं बिजाई चरम पर है। उधर किसानों की मानें तो उन्हें डीएपी खाद के लिए कतार में लगने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में तो खाद के लिए दो-दो दिन तक कतार में खड़ा होना पड़ता है इसके बाद ही उन्हें खाद मिल पाता है। खाद न मिलने के चलते न केवल तैयार किए जा चुके खेत खराब हो रहे हैं बल्कि बिजाई लेट हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
15 तक पहुंच जाएगा पूरा खाद : डॉ. कर्मचंद
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि जिले में अभी तक 16 हजार एमटी डीएपी किसानों तक पहुंच चुका है जबकि बाकी करीब तीन हजार एमटी 15 नवंबर तक मिल जाएगा। डीएपी को लेकर जिले में सामान्य स्थिति है लेकिन किसानों की कहीं से भी शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई भी की जा रही है। निगरानी के लिए फील्ड में टीमें भी उतारी हुई हैं। जिन निजी खाद विक्रेताओं द्वारा मनमानी की शिकायतें पहुंची थी उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 19 हजार 500 एमटी खाद की जरूरत है, जिसके चलते अभी तक 16 हजार एमटी खाद मिल चुका है। इसमें से अधिकतर खाद किसान ले चुके हैं तो वहीं माना जा रहा है कि 70 फीसदी रकबे में गेहूं बिजाई भी की जा चुकी है। बता दें कि हर बार की तरह इस बार भी जिले में तीन लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बिजाई की जानी है, जिसके लिए किसान धान कटाई के साथ ही तैयारी में जुट गए थे। अभी गेहूं बिजाई चरम पर है। उधर किसानों की मानें तो उन्हें डीएपी खाद के लिए कतार में लगने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में तो खाद के लिए दो-दो दिन तक कतार में खड़ा होना पड़ता है इसके बाद ही उन्हें खाद मिल पाता है। खाद न मिलने के चलते न केवल तैयार किए जा चुके खेत खराब हो रहे हैं बल्कि बिजाई लेट हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
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15 तक पहुंच जाएगा पूरा खाद : डॉ. कर्मचंद
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि जिले में अभी तक 16 हजार एमटी डीएपी किसानों तक पहुंच चुका है जबकि बाकी करीब तीन हजार एमटी 15 नवंबर तक मिल जाएगा। डीएपी को लेकर जिले में सामान्य स्थिति है लेकिन किसानों की कहीं से भी शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई भी की जा रही है। निगरानी के लिए फील्ड में टीमें भी उतारी हुई हैं। जिन निजी खाद विक्रेताओं द्वारा मनमानी की शिकायतें पहुंची थी उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
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