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हर परिस्थिति में मन को शांत रखने की कला सीख पाएं तनाव से मुक्ति : बीके ओंकार चंद
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मकुमारी सेवाकेंद्र में विचार रखते वक्ता प्रो. बीके ओंकार चंद। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के डीडी. कॉलोनी स्थित सेवा केंद्र की ओर से सेक्टर-7 के शिव मंदिर में आयोजित खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें माउंट आबू से पधारे विख्यात मोटिवेशनल वक्ता प्रो. बीके ओंकार चंद भाई ने तनाव मुक्त रहने के तरीके बताए। उन्होंने अलविदा तनाव विषय पर अपने विचार रख रहे थे।
उन्होंने कहा कि हम घटनाओं को नहीं बदल सकते, लेकिन घटनाओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को तो बदल ही सकते हैं। अपने को बेहतर बनाने के लिए इतना समय दें कि दूसरों की आलोचना करने के लिए आपके पास समय ही न हो। हर दिन को उत्सव बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उत्साह के साथ हर दिन का प्रारंभ करें और प्रेम, प्रसन्नता के साथ समापन। कैसी भी परिस्थिति आ जाए, लेकिन हम अपने मन की स्थिरता नहीं बिगाड़ें। हर परिस्थिति में मन को शांत रखने की कला सीख लें। जैसे आकाश में बादलों का आना जाना लगा रहता है, वैसे ही परिस्थितियां भी आती जाती रहती हैं। परिस्थितियों से घबराने की बजाय उन्हें परीक्षाएं समझकर पार करें। अपने मन को मजबूत बनाने के लिए प्रतिदिन सवेरे अच्छे विचारों का भोजन मन को दें। मन के शांत न होने से उसका दुष्प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ता है
रोहतक कंज्यूमर फॉर्म के चेयरमैन भूपेंद्र नाथ शर्मा बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पधारे। ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र की संचालिका बीके शकुंतला बहन ने कहा कि आज हमारा मन सारा दिन दूसरों को सुधारने के कार्य में ही लगा रहता है। अब क्या दूसरों को बदलना हमारे कंट्रोल में है। जब हम दूसरों को बदलने की सोचते हैं, तो हमारी आत्मा की शक्ति घटती जाती हैं। राजयोग हमें सही सोचने, बोलने व करने की विधि सिखाता है और ब्रह्माकुमारीज़ के प्रत्येक सेवा केंद्र पर राजयोग मेडिटेशन निशुल्क सिखाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि हम घटनाओं को नहीं बदल सकते, लेकिन घटनाओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को तो बदल ही सकते हैं। अपने को बेहतर बनाने के लिए इतना समय दें कि दूसरों की आलोचना करने के लिए आपके पास समय ही न हो। हर दिन को उत्सव बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उत्साह के साथ हर दिन का प्रारंभ करें और प्रेम, प्रसन्नता के साथ समापन। कैसी भी परिस्थिति आ जाए, लेकिन हम अपने मन की स्थिरता नहीं बिगाड़ें। हर परिस्थिति में मन को शांत रखने की कला सीख लें। जैसे आकाश में बादलों का आना जाना लगा रहता है, वैसे ही परिस्थितियां भी आती जाती रहती हैं। परिस्थितियों से घबराने की बजाय उन्हें परीक्षाएं समझकर पार करें। अपने मन को मजबूत बनाने के लिए प्रतिदिन सवेरे अच्छे विचारों का भोजन मन को दें। मन के शांत न होने से उसका दुष्प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ता है
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रोहतक कंज्यूमर फॉर्म के चेयरमैन भूपेंद्र नाथ शर्मा बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पधारे। ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र की संचालिका बीके शकुंतला बहन ने कहा कि आज हमारा मन सारा दिन दूसरों को सुधारने के कार्य में ही लगा रहता है। अब क्या दूसरों को बदलना हमारे कंट्रोल में है। जब हम दूसरों को बदलने की सोचते हैं, तो हमारी आत्मा की शक्ति घटती जाती हैं। राजयोग हमें सही सोचने, बोलने व करने की विधि सिखाता है और ब्रह्माकुमारीज़ के प्रत्येक सेवा केंद्र पर राजयोग मेडिटेशन निशुल्क सिखाया जाता है।
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