{"_id":"618034fb9c6a2547a562566a","slug":"lakshchandi-mahayagya-concludes-with-tripureshwari-maha-aarti-kurukshetra-news-knl88428243","type":"story","status":"publish","title_hn":"लक्षचंडी महायज्ञ का त्रिपुरेश्वरी की महाआरती के साथ समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लक्षचंडी महायज्ञ का त्रिपुरेश्वरी की महाआरती के साथ समापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थीम पार्क में चल रहे 10 दिवसीय 501 कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ का सोमवार को मां त्रिपुरेश्वरी की महाआरती के साथ समापन हो गया। समापन कार्यक्रम में सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल व विधायक सुभाष सुधा पहुंचे तथा आरती में हिस्सा लिया। इससे पहले सुबह प्रधान यज्ञ कुंड में आहुतियां डालकर सर्वमंगल की कामना की गई। वहीं यज्ञ के प्रभाव पर शोध कर रहे पर्यावरण वैज्ञानिकों ने यज्ञ के समापन पर पोस्ट सैंपल लिए। वैज्ञानिकों ने यज्ञ के शुभारंभ पर प्री सैंपल लिए थे। अब उन दोनों सैंपल की जांच करके यज्ञ से हुए प्रभाव पर शौध किया जाएगा। पूर्व संध्याकालीन कार्यक्रम में सांसद नायब सैनी, विधायक सुभाष सुधा, केंद्रीय सचिवालय नई दिल्ली से विपुल खरे, क्रीड़ा भारती कुरुक्षेत्र अध्यक्ष डीपी चौधरी, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा सहित प्रदेश के कई शासकीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यज्ञ सम्राट हरिओम ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर अब तक रुद्र यज्ञ, सूर्य यज्ञ, गणेश यज्ञ, लक्ष्मी यज्ञ, श्री यज्ञ, लक्षचंडी भागवत यज्ञ, विष्णु यज्ञ, ग्रह-शांति यज्ञ, पुत्रेष्टि, शत्रुंजय, राजसूय, ज्योतिष्टोम, अश्वमेध, वर्षा यज्ञ, सोमयज्ञ, गायत्री यज्ञ समेत अनेक प्रकार के यज्ञ होते चले आ रहे हैं। हमारा शास्त्र, इतिहास, यज्ञ के अनेक चमत्कारों से भरा पड़ा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी सोलह-संस्कार यज्ञ से ही प्रारंभ होते हैं तथा यज्ञ से ही समाप्त हो जाते हैं। यज्ञ करने से व्यष्टि नहीं बल्कि समष्टि का कल्याण होता है। अब इस बात को वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि यज्ञ करने से वायुमंडल एवं पर्यावरण में शुद्धता आती है। संक्रामक रोग नष्ट होते हैं तथा समय पर वर्षा होती है। यज्ञ करने से सहबंधुत्व की सद्भावना के साथ विकास में शांति स्थापित होती है। यज्ञ को वेदों में कामधुन कहा गया है अर्थात मनुष्य के समस्त अभावों एवं बाधाओं को दूर करने वाला। उन्होंने कहा कि यजुर्वेद में कहा गया है कि जो यज्ञ को त्यागता है उसे परमात्मा त्याग देता है। यज्ञ के द्वारा ही साधारण मनुष्य देव-योनि प्राप्त करते हैं और स्वर्ग के अधिकारी बनते हैं। यज्ञ को सर्व कामना पूर्ण करने वाली कामधेनु और स्वर्ग की सीढ़ी कहा गया है। इतना ही नहीं यज्ञ के जरिए आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर प्राप्ति भी संभव है।
वैज्ञानिकों की टीम की अगुवाई कर रहे डॉ. राजेश केराज ने बताया कि यज्ञ के समापन पर पोस्ट सैंपल लिए गए, जिसमें हवा, मिट्टी, कलश के जल, पौधे सहित अन्य सैंपल लिए गए है। इन प्री व पोस्ट सैंपल पर शोध किया जाएगा। कुछ तथ्य उनके सामने आए है, जैसे यज्ञ के पास जौ, तिल, चावल सहित जो अन्य पौधे लगाए गए थे उनकी ग्रोथ पांच किलोमीटर दूर लगे पौधों से ज्यादा हुई हैं। हालांकि ग्रोथ कितनी हुई यह शोध करके बताया जाएगा।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों की टीम की अगुवाई कर रहे डॉ. राजेश केराज ने बताया कि यज्ञ के समापन पर पोस्ट सैंपल लिए गए, जिसमें हवा, मिट्टी, कलश के जल, पौधे सहित अन्य सैंपल लिए गए है। इन प्री व पोस्ट सैंपल पर शोध किया जाएगा। कुछ तथ्य उनके सामने आए है, जैसे यज्ञ के पास जौ, तिल, चावल सहित जो अन्य पौधे लगाए गए थे उनकी ग्रोथ पांच किलोमीटर दूर लगे पौधों से ज्यादा हुई हैं। हालांकि ग्रोथ कितनी हुई यह शोध करके बताया जाएगा।
विज्ञापन