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Kurukshetra News: कुवि के शिक्षक भूकंपीय प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए करेंगे शोध
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक भूकंपीय प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए शोध करेंगे। भूकंपीय खतरे के आकलन के लिए प्रतिष्ठित भारत-इटली संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की योजना के तहत कुवि भूभौतिकी विभाग के वैज्ञानिकों की टीम को अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिली है। इस उपलब्धि के लिए टीम को प्रोत्साहित करते हुए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिलना कुवि की वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता, उत्कृष्टता एवं प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्वविद्यालय की ओर से शोध दल में शामिल भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) और डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) को विशेष रूप से बधाई दी। भारत-इटली संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम की शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान योजना के तहत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्त पोषित है। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने भी शिक्षकों को बधाई दी।
वहीं शोध दल में भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) व डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) के साथ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), नई दिल्ली के डॉ. एपी सिंह और सीएसआईआर-एनईआईएसटी, असम के डॉ. शांतनु बरुआ शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य भारतीय और इतालवी वैज्ञानिकों के बीच आपसी यात्राओं और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और उन्नत तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है। इस मौके पर कुवि के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार, डीन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट प्रो. संजीव अग्रवाल, भूभौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह चौधरी मौजूद रहे।
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शोध का उद्देश्य, भूकंपीय जोखिम को कम करना : डॉ. आरबीएस
प्रमुख अन्वेषक डॉ. आरबीएस यादव ने बताया कि इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य भारत के भूकंपीय क्षेत्र चतुर्थ के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) के लिए विश्वसनीय, समय-निर्भर भूकंपीय खतरा मॉडल विकसित करना है, ताकि शोध के माध्यम से भूकंप के जोखिम को कम कर भूकंपीय प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा सके।
शोध परियोजना में कुवि उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय
लोक संपर्क विभाग के निदेशक महासिंह पूनिया ने बताया कि भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना में कुवि उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है। परियोजना का चयन वैज्ञानिक योग्यता, राष्ट्रीय प्राथमिकता और परियोजना समन्वयकों की विशेषज्ञता के आधार पर किया गया था। इसके लिए प्राप्त 83 पात्र प्रस्तावों में से केवल 10 को वित्त पोषण के लिए चुना गया, जिसमें कुवि शामिल भी है।
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अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिलना कुवि की वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता, उत्कृष्टता एवं प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्वविद्यालय की ओर से शोध दल में शामिल भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) और डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) को विशेष रूप से बधाई दी। भारत-इटली संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम की शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान योजना के तहत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्त पोषित है। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने भी शिक्षकों को बधाई दी।
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वहीं शोध दल में भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) व डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) के साथ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), नई दिल्ली के डॉ. एपी सिंह और सीएसआईआर-एनईआईएसटी, असम के डॉ. शांतनु बरुआ शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य भारतीय और इतालवी वैज्ञानिकों के बीच आपसी यात्राओं और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और उन्नत तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है। इस मौके पर कुवि के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार, डीन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट प्रो. संजीव अग्रवाल, भूभौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवान सिंह चौधरी मौजूद रहे।
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शोध का उद्देश्य, भूकंपीय जोखिम को कम करना : डॉ. आरबीएस
प्रमुख अन्वेषक डॉ. आरबीएस यादव ने बताया कि इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य भारत के भूकंपीय क्षेत्र चतुर्थ के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) के लिए विश्वसनीय, समय-निर्भर भूकंपीय खतरा मॉडल विकसित करना है, ताकि शोध के माध्यम से भूकंप के जोखिम को कम कर भूकंपीय प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा सके।
शोध परियोजना में कुवि उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय
लोक संपर्क विभाग के निदेशक महासिंह पूनिया ने बताया कि भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना में कुवि उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है। परियोजना का चयन वैज्ञानिक योग्यता, राष्ट्रीय प्राथमिकता और परियोजना समन्वयकों की विशेषज्ञता के आधार पर किया गया था। इसके लिए प्राप्त 83 पात्र प्रस्तावों में से केवल 10 को वित्त पोषण के लिए चुना गया, जिसमें कुवि शामिल भी है।