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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में अब नहीं होगी डी. लिट
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 15 Sep 2015 12:39 AM IST
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अब डी. लिट की उपाधि के लिए डिग्री पर रोक लगा दी गई है। इस प्रस्ताव पर केयू की सुप्रीम बॉडी कार्यकारिणी परिषद (ईसी) ने मुहर लगा दी है।
वहीं कार्यकारिणी परिषद की बैठक में सोमवार को नए कुलपति की नियुक्ति के लिए बनने वाली सर्च कमेटी का गठन कर दो सदस्यों का नामांकन किया गया है। बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी कुलपति हरदीप कुमार ने की और बैठक में सभी 18 सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में 47 मुख्य और 5 टेबल एजेंडों को मिलकर 52 मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में 25 मार्च, 30 मार्च व 6 जुलाई को हुई कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्तावों को पारित कर दिया है। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पेनल ऑफ एक्सपर्ट, सिलेक्शन कमेटी का गठन कर दिया गया है।
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एकेडमिक काउंसिल की बैठक में डी. लिट की डिग्री को नियमित रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, लेकिन ईसी सदस्यों ने काफी देर तक चली चर्चा के बाद इस पर रोक लगा दी है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में इस पर रोक लगाने का प्रमुख कारण ये रहा कि यूनिवर्सिटी में डी. लिट की डिग्री कराने वाले महज तीन प्रोफेसर हैं, इनमें से दो भी जनवरी माह में रिटायर हो रहे हैं। इसके साथ ही पीएचडी की डिग्री के बाद डी. लिट की डिग्री करने वालों को इसके लिए सवा लाख रुपए से अधिक फीस भरनी होती थी।
ऐसे में यह डिग्री काफी महंगी साबित हो रही थी। इस पर चर्चा करते हुए इस पर रोक लगा देने के फैसले पर सभी ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
सर्च कमेटी का गठन
कार्यकारिणी परिषद की बैठक में सोमवार को नए कुलपति की नियुक्ति के लिए बनने वाली सर्च कमेटी का गठन कर दो सदस्यों का नामांकन किया गया है।
इनमें एक हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति कुलदीप चंद और सिक्किम हाईकोर्ट के सेवानिवृत जस्टिस प्रमोद कोहली का नामांकन किया गया है। सर्च कमेटी के तीसरे सदस्य राज्यपाल एवं कुलाधिपति के नोमिनी सदस्य होंगे।
पूर्व ओएसडी पर फैसला करेंगे नए वीसी
सूत्रों के अनुसार एजेंडे में प्रमुख रूप से कुलपति के पूर्व ओएसडी एससी बत्रा जो कि सेवानिवृत हो चुके हैं, का मामला काफी गरम रहा।
लेकिन काफी देर चर्चा करने के बाद कार्यकारी कुलपति ने इस मामले को लंबित रख दिया। तर्क दिया गया कि क्योंकि यह मामला काफी पुराना है और वे कार्यकारी कुलपति हैं। इसलिए इस मामले को नए कुलपति ही देखेंगे और इस पर फैसला लेंगे।
बता दें कि पूर्व ओएसडी पर आरोप थे कि उन्होंने सीएस से एसिस्टेंट रजिस्ट्रार और उसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार की प्रमोशन नियमों को ताक पर रखकर हासिल की थी। कई वर्ष से यह मामला विजिलेंस के पास लंबित था और रिपोर्ट भी ओएसडी के खिलाफ आ चुकी है।
बत्रा भले ही सेवानिवृत हो गए हैं, लेकिन उनके पेंशन बेनीफिट्स आज भी केयू में पेंडिंग हैं।
इन प्रस्तावों पर लगी मंजूरी की मुहर
कमेटी हॉल में हुई इस बैठक में प्रो. सुषमा शर्मा को चीफ वार्डन के रूप में नियुक्ति, एकेडमिक काउंसिल की सिफारिशों, चेयरमैन, निदेशक, प्रिंसिपल की आर्थिक शक्तियों को बढ़ाने, स्पोर्ट्स मूल्यांकन केन्द्र के कर्मचारियों के अतिरिक्त भत्ते सहित कई मुद्दों पर मुहर लगी है।
बैठक में नॉन टीचिंग, स्थापना शाखा की प्रमोशन संबंधी सिफारिशों के साथ-साथ विभिन्न कॉलेजों की इंस्पेक्शन कमेटी की रिपोर्ट को मंजूर करते हुए कई कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई है। बैठक में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों को शोध के लिए मिलने वाली कंटीजेंसी ग्रांट को भी सत्र 2015-16 के लिए बढ़ा दिया है।
यूआईटी निदेशक के लिए अनुभव 15 वर्ष
ईसी की बैठक में यह प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है कि यूआईटी के नियमित निदेशक के लिए जहां पहले 10 वर्ष का अनुभव मान्य था, उसे 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है। बता दें कि यूआईटी में फिलहाल नियमित निदेशक नहीं है, फिलहाल प्रो. सुनील ढींगड़ा को निदेशक का कार्यभार सौंपा हुआ है।
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वहीं कार्यकारिणी परिषद की बैठक में सोमवार को नए कुलपति की नियुक्ति के लिए बनने वाली सर्च कमेटी का गठन कर दो सदस्यों का नामांकन किया गया है। बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी कुलपति हरदीप कुमार ने की और बैठक में सभी 18 सदस्य उपस्थित रहे।
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बैठक में 47 मुख्य और 5 टेबल एजेंडों को मिलकर 52 मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में 25 मार्च, 30 मार्च व 6 जुलाई को हुई कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्तावों को पारित कर दिया है। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पेनल ऑफ एक्सपर्ट, सिलेक्शन कमेटी का गठन कर दिया गया है।
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एकेडमिक काउंसिल की बैठक में डी. लिट की डिग्री को नियमित रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, लेकिन ईसी सदस्यों ने काफी देर तक चली चर्चा के बाद इस पर रोक लगा दी है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में इस पर रोक लगाने का प्रमुख कारण ये रहा कि यूनिवर्सिटी में डी. लिट की डिग्री कराने वाले महज तीन प्रोफेसर हैं, इनमें से दो भी जनवरी माह में रिटायर हो रहे हैं। इसके साथ ही पीएचडी की डिग्री के बाद डी. लिट की डिग्री करने वालों को इसके लिए सवा लाख रुपए से अधिक फीस भरनी होती थी।
ऐसे में यह डिग्री काफी महंगी साबित हो रही थी। इस पर चर्चा करते हुए इस पर रोक लगा देने के फैसले पर सभी ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
सर्च कमेटी का गठन
कार्यकारिणी परिषद की बैठक में सोमवार को नए कुलपति की नियुक्ति के लिए बनने वाली सर्च कमेटी का गठन कर दो सदस्यों का नामांकन किया गया है।
इनमें एक हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति कुलदीप चंद और सिक्किम हाईकोर्ट के सेवानिवृत जस्टिस प्रमोद कोहली का नामांकन किया गया है। सर्च कमेटी के तीसरे सदस्य राज्यपाल एवं कुलाधिपति के नोमिनी सदस्य होंगे।
पूर्व ओएसडी पर फैसला करेंगे नए वीसी
सूत्रों के अनुसार एजेंडे में प्रमुख रूप से कुलपति के पूर्व ओएसडी एससी बत्रा जो कि सेवानिवृत हो चुके हैं, का मामला काफी गरम रहा।
लेकिन काफी देर चर्चा करने के बाद कार्यकारी कुलपति ने इस मामले को लंबित रख दिया। तर्क दिया गया कि क्योंकि यह मामला काफी पुराना है और वे कार्यकारी कुलपति हैं। इसलिए इस मामले को नए कुलपति ही देखेंगे और इस पर फैसला लेंगे।
बता दें कि पूर्व ओएसडी पर आरोप थे कि उन्होंने सीएस से एसिस्टेंट रजिस्ट्रार और उसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार की प्रमोशन नियमों को ताक पर रखकर हासिल की थी। कई वर्ष से यह मामला विजिलेंस के पास लंबित था और रिपोर्ट भी ओएसडी के खिलाफ आ चुकी है।
बत्रा भले ही सेवानिवृत हो गए हैं, लेकिन उनके पेंशन बेनीफिट्स आज भी केयू में पेंडिंग हैं।
इन प्रस्तावों पर लगी मंजूरी की मुहर
कमेटी हॉल में हुई इस बैठक में प्रो. सुषमा शर्मा को चीफ वार्डन के रूप में नियुक्ति, एकेडमिक काउंसिल की सिफारिशों, चेयरमैन, निदेशक, प्रिंसिपल की आर्थिक शक्तियों को बढ़ाने, स्पोर्ट्स मूल्यांकन केन्द्र के कर्मचारियों के अतिरिक्त भत्ते सहित कई मुद्दों पर मुहर लगी है।
बैठक में नॉन टीचिंग, स्थापना शाखा की प्रमोशन संबंधी सिफारिशों के साथ-साथ विभिन्न कॉलेजों की इंस्पेक्शन कमेटी की रिपोर्ट को मंजूर करते हुए कई कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई है। बैठक में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों को शोध के लिए मिलने वाली कंटीजेंसी ग्रांट को भी सत्र 2015-16 के लिए बढ़ा दिया है।
यूआईटी निदेशक के लिए अनुभव 15 वर्ष
ईसी की बैठक में यह प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है कि यूआईटी के नियमित निदेशक के लिए जहां पहले 10 वर्ष का अनुभव मान्य था, उसे 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है। बता दें कि यूआईटी में फिलहाल नियमित निदेशक नहीं है, फिलहाल प्रो. सुनील ढींगड़ा को निदेशक का कार्यभार सौंपा हुआ है।