{"_id":"a8e40376c5add0a4d9905c079c486128","slug":"kurukshetra-temple-swami-prabhupad-400-million-will-process-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुरुक्षेत्र में 400 करोड़ से बनेगा इस्कान टेंपल, विभागीय प्रक्रिया शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुरुक्षेत्र में 400 करोड़ से बनेगा इस्कान टेंपल, विभागीय प्रक्रिया शुरू
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 30 May 2014 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
400 करोड़ से बनने वाले इस्कान टेंपल के लिए हरियाणा सिंचाई विभाग की छह एकड़ भूमि टेकओवर होने जा रही है। कुरुक्षेत्र में पर्यटन और तीर्थाटन के विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस कार्य में विशेष रूप से रुचि ले रहे हैं।
बहरहाल हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिंचाई शोध संस्थान को निर्देश दिए हैं कि पिहोवा-कुरुक्षेत्र रोड पर गीता जन्मस्थली के समीप स्थित हिरमी की छह एकड़ भूमि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) नाम ट्रांसफर कर दी जाए। बृहस्पतिवार को इन आदेशों की प्रति केडीबी कार्यालय पहुंच चुकी हैं।
सरकार के आदेशों की इस प्रति में स्पष्ट लिखा है कि हरियाणा मंत्रिमंडल के एक फैसले के अनुसार हरियाणा सिंचाई शोध संस्थान (हिरमी) उक्त छह एकड़ भूमि को फौरी तौर पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के नाम ट्रांसफर कराए।
विज्ञापन
क्योंकि हरियाणा मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार उक्त भूमि पर भव्य इस्कान टेंपल बनाने का फैसला चुनाव से पहले लिया जा चुका है। हरियाणा शोध संस्थान को छह एकड़ भूमि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के नाम करानी होगी। जिसके तुरंत बाद यह छह एकड़ भूमि इस्कान ट्रस्ट को प्रदान की जाएगी।
आदेशों को अमल में लाने और मंदिर का निर्माण जल्द शुरू हो इसके लिए इस्कान के प्रमुख संत भी आज केडीबी की नवनियुक्त चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर डा.किरण सिंह से मिले। डा.किरण ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने और टेकआवर करने की प्रक्रिया को शुरु करने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि कोई भी सरकारी विभाग किसी धार्मिक या सामाजिक संस्था को सीधा भूमि प्रदान नहीं कर सकता,जबकि केडीबी के पास ये अधिकार हैं, लिहाजा सिंचाई विभाग की यह भूमि पहले केडीबी के नाम होगी और इसके बाद केडीबी उक्त भूमि को केडीबी के नाम कराएगी।
दो साल पहले दक्षिण भारत के तिरुपति मंदिर को भी केडीबी ने ब्रह्मसरोवर के समक्ष भूमि अलाट की थी। दरअसल, मुख्यमंत्री का लक्ष्य कुरुक्षेत्र में इस्कान टेंपल, तिरुपति मंदिर और अक्षरधाम बनाने का है। तिरुपति का निर्माण पिछले वर्ष शुरू हो चुका है, जबकि इस्कान भी भूमि मिलते ही मंदिर निर्माण शुरू करेगी। अब इंतजार अक्षरधाम का है।
कानूनी अड़चनों में इस्कान टेंपल
इस्कान टेंपल के लिए 1999 तत्कालीन राज्य सरकार ने गीता जन्मस्थली से सटी हुई छह एकड़ भूमि इस्कान संस्था को अलॉट की थी लेकिन तब से इस मंदिर के निर्माण का मसला कानूनी पेचीदगी में फंसा हुआ था। इनेलो और कांग्रेस की सरकार में संस्था के प्रतिनिधि मंदिर निर्माण के लिए उक्त विवादित भूमि की जगह अन्य भूखंड की मांग कर रहे थे।
आखिर सीएम हुड्डा ने सुनी
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से कई बार मिल चुके इस्कान संस्था के प्रतिनिधियों को उस समय सहारा मिला जब मुख्यमंत्री ने उनके प्रस्ताव को हरी झंडी देने का आश्वासन दिया।
हालांकि इस आश्वासन के बाद भी लंबे समय तक इस प्रक्रिया की गति काफी धीमी रही और आखिरकार लोकसभा चुनाव से पहले हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक विवादित भूखंड की जगह इस्कान संस्था को हिरमी की पिहोवा रोड स्थित छह एकड़ भूमि देने का फैसला लिया गया।
विभिन्न देशों में है भव्य इस्कान टेंपल
भारत में चुनिंदा जगहों के अलावा दुनिया के विभिन्न देशों में इस्कान के भव्य मंदिर हैं। दुनिया में फैले इस्कान अनुयायियों और अन्य श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का आगमन कुरुक्षेत्र भी हो। इसके लिए गीता की जन्मस्थली के निकट इस्कान टेंपल बनाने की योजना अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कान ने करीब दो दशक पहले बनाई थी।
कहीं लेटलतीफी न आड़े आ जाए
इस्कान संत साक्षी गोपाल दास एवं सदस्य प्रचेता दास सहित अन्य कई प्रतिनिधि बृहस्पतिवार को केडीबी की सीईओ से मिले। इस भेंट के बाद प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब 16 साल से इस्कान टेंपल के निर्माण रुका हुआ है।
इस बीच कई नेताओं आश्वासन दिए लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते मंदिर निर्माण नहीं हो सका। इन्होंने बताया कि इस्कान कुरुक्षेत्र में करीब 400 करोड़ की लागत से मंदिर निर्माण करेगा जिसका आर्थिक लाभ कुरुक्षेत्र को भी मिलेगा।
बताया गया है कि कानूनी अड़चनों एवं अन्य कारणों से अभी तक संस्था को लाखों रुपयों की क्षति हो चुकी है लेकिन अब निकट ही दूसरी जगह मिलने से संस्था संतुष्ट है। लेकिन निचले स्तर पर अधिकारियों की लेट लतीफी आडे़ न आए इसके लिए संस्था के प्रतिनिधि भागदौड़ में जुटे हैं।
और मालिकाना हक से खारिज हो गई केडीबी
शुरू से इस्कान संस्था का टारगेट था कि गीता जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण किया जाए। इस कार्य के लिए सरकार के आदेश पर केडीबी ने 1999 में जो छह एकड़ भूमि दी थी उसका एक अन्य संस्था के साथ कानूनी विवाद छिड़ गया।
केडीबी और इस्कान संस्था को कटघरे में खींचने वाली संस्था का आरोप था कि जिस जमीन की मालिक केडीबी नहीं थी ऐसे में केडीबी ने वह भूमि किसी अन्य संस्था (इस्कान) को कैसे दे दी।
लंबी लड़ाई के बाद कटघरे में खींचने वाली संस्था के तर्क सही पाए गए और केडीबी को उक्त भूमि का मालिक मानने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
चूंकि इस्कान संस्था को केडीबी छह एकड़ भूमि दे चुकी थी। लिहाजा इसके बदले में उसे ज्योतिसर में दूसरे भूखंड की तलाश थी लेकिन यहां केडीबी की अपनी कोई निजी जमीन न होने के कारण मुख्यमंत्री ने हिरमी की भूमि केडीबी को देने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
बहरहाल हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिंचाई शोध संस्थान को निर्देश दिए हैं कि पिहोवा-कुरुक्षेत्र रोड पर गीता जन्मस्थली के समीप स्थित हिरमी की छह एकड़ भूमि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) नाम ट्रांसफर कर दी जाए। बृहस्पतिवार को इन आदेशों की प्रति केडीबी कार्यालय पहुंच चुकी हैं।
विज्ञापन
सरकार के आदेशों की इस प्रति में स्पष्ट लिखा है कि हरियाणा मंत्रिमंडल के एक फैसले के अनुसार हरियाणा सिंचाई शोध संस्थान (हिरमी) उक्त छह एकड़ भूमि को फौरी तौर पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के नाम ट्रांसफर कराए।
विज्ञापन
क्योंकि हरियाणा मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार उक्त भूमि पर भव्य इस्कान टेंपल बनाने का फैसला चुनाव से पहले लिया जा चुका है। हरियाणा शोध संस्थान को छह एकड़ भूमि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के नाम करानी होगी। जिसके तुरंत बाद यह छह एकड़ भूमि इस्कान ट्रस्ट को प्रदान की जाएगी।
आदेशों को अमल में लाने और मंदिर का निर्माण जल्द शुरू हो इसके लिए इस्कान के प्रमुख संत भी आज केडीबी की नवनियुक्त चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर डा.किरण सिंह से मिले। डा.किरण ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने और टेकआवर करने की प्रक्रिया को शुरु करने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि कोई भी सरकारी विभाग किसी धार्मिक या सामाजिक संस्था को सीधा भूमि प्रदान नहीं कर सकता,जबकि केडीबी के पास ये अधिकार हैं, लिहाजा सिंचाई विभाग की यह भूमि पहले केडीबी के नाम होगी और इसके बाद केडीबी उक्त भूमि को केडीबी के नाम कराएगी।
दो साल पहले दक्षिण भारत के तिरुपति मंदिर को भी केडीबी ने ब्रह्मसरोवर के समक्ष भूमि अलाट की थी। दरअसल, मुख्यमंत्री का लक्ष्य कुरुक्षेत्र में इस्कान टेंपल, तिरुपति मंदिर और अक्षरधाम बनाने का है। तिरुपति का निर्माण पिछले वर्ष शुरू हो चुका है, जबकि इस्कान भी भूमि मिलते ही मंदिर निर्माण शुरू करेगी। अब इंतजार अक्षरधाम का है।
कानूनी अड़चनों में इस्कान टेंपल
इस्कान टेंपल के लिए 1999 तत्कालीन राज्य सरकार ने गीता जन्मस्थली से सटी हुई छह एकड़ भूमि इस्कान संस्था को अलॉट की थी लेकिन तब से इस मंदिर के निर्माण का मसला कानूनी पेचीदगी में फंसा हुआ था। इनेलो और कांग्रेस की सरकार में संस्था के प्रतिनिधि मंदिर निर्माण के लिए उक्त विवादित भूमि की जगह अन्य भूखंड की मांग कर रहे थे।
आखिर सीएम हुड्डा ने सुनी
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से कई बार मिल चुके इस्कान संस्था के प्रतिनिधियों को उस समय सहारा मिला जब मुख्यमंत्री ने उनके प्रस्ताव को हरी झंडी देने का आश्वासन दिया।
हालांकि इस आश्वासन के बाद भी लंबे समय तक इस प्रक्रिया की गति काफी धीमी रही और आखिरकार लोकसभा चुनाव से पहले हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक विवादित भूखंड की जगह इस्कान संस्था को हिरमी की पिहोवा रोड स्थित छह एकड़ भूमि देने का फैसला लिया गया।
विभिन्न देशों में है भव्य इस्कान टेंपल
भारत में चुनिंदा जगहों के अलावा दुनिया के विभिन्न देशों में इस्कान के भव्य मंदिर हैं। दुनिया में फैले इस्कान अनुयायियों और अन्य श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का आगमन कुरुक्षेत्र भी हो। इसके लिए गीता की जन्मस्थली के निकट इस्कान टेंपल बनाने की योजना अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कान ने करीब दो दशक पहले बनाई थी।
कहीं लेटलतीफी न आड़े आ जाए
इस्कान संत साक्षी गोपाल दास एवं सदस्य प्रचेता दास सहित अन्य कई प्रतिनिधि बृहस्पतिवार को केडीबी की सीईओ से मिले। इस भेंट के बाद प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब 16 साल से इस्कान टेंपल के निर्माण रुका हुआ है।
इस बीच कई नेताओं आश्वासन दिए लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते मंदिर निर्माण नहीं हो सका। इन्होंने बताया कि इस्कान कुरुक्षेत्र में करीब 400 करोड़ की लागत से मंदिर निर्माण करेगा जिसका आर्थिक लाभ कुरुक्षेत्र को भी मिलेगा।
बताया गया है कि कानूनी अड़चनों एवं अन्य कारणों से अभी तक संस्था को लाखों रुपयों की क्षति हो चुकी है लेकिन अब निकट ही दूसरी जगह मिलने से संस्था संतुष्ट है। लेकिन निचले स्तर पर अधिकारियों की लेट लतीफी आडे़ न आए इसके लिए संस्था के प्रतिनिधि भागदौड़ में जुटे हैं।
और मालिकाना हक से खारिज हो गई केडीबी
शुरू से इस्कान संस्था का टारगेट था कि गीता जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण किया जाए। इस कार्य के लिए सरकार के आदेश पर केडीबी ने 1999 में जो छह एकड़ भूमि दी थी उसका एक अन्य संस्था के साथ कानूनी विवाद छिड़ गया।
केडीबी और इस्कान संस्था को कटघरे में खींचने वाली संस्था का आरोप था कि जिस जमीन की मालिक केडीबी नहीं थी ऐसे में केडीबी ने वह भूमि किसी अन्य संस्था (इस्कान) को कैसे दे दी।
लंबी लड़ाई के बाद कटघरे में खींचने वाली संस्था के तर्क सही पाए गए और केडीबी को उक्त भूमि का मालिक मानने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
चूंकि इस्कान संस्था को केडीबी छह एकड़ भूमि दे चुकी थी। लिहाजा इसके बदले में उसे ज्योतिसर में दूसरे भूखंड की तलाश थी लेकिन यहां केडीबी की अपनी कोई निजी जमीन न होने के कारण मुख्यमंत्री ने हिरमी की भूमि केडीबी को देने का निर्णय लिया।