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Kurukshetra News: 36 बिरादरी को जोड़ने की दिशा में बढ़ीं खापें, गांव, किसान और सामाजिक सरोकार बने नए एजेंडे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:36 AM IST
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Khaps move towards uniting the '36 communities'; villages, farmers, and social causes emerge as the new agenda.
कुरुक्षेत्र। सर्वखाप महापंचायत एवं चिंतन शिविर के अंतिम चरण में खाप पंचायतों के एजेंडे में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक जाट समाज से जुड़े मुद्दों तक सीमित मानी जाने वाली खापों ने अब 36 बिरादरी के भाईचारे को मजबूत करने और व्यापक सामाजिक सरोकारों पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकेत दिया है। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के दौरान विभिन्न खापों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते सामाजिक परिवेश में खापों की भूमिका केवल जातिगत मुद्दों तक सीमित नहीं रह सकती। सामाजिक समरसता, ग्रामीण संस्कृति, किसान हित,गो संवर्धन और गांवों के अस्तित्व को बचाने जैसे विषयों पर व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है।
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चर्चा के दौरान वक्ताओं ने चिंता जताई कि तेजी से बदलते सामाजिक और आर्थिक ढांचे के कारण गांवों की पारंपरिक पहचान प्रभावित हो रही है, ऐसे में खापों को गांव, किसान और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आना होगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि कृषि संकट, युवाओं का गांवों से पलायन, सामाजिक विघटन और सांस्कृतिक बदलाव जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रयास जरूरी है।
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बैठक में यह भी प्रस्ताव सामने आया कि भविष्य में किसान संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर साझा मंच तैयार किया जाएगा, इसके माध्यम से ऐसे मुद्दों पर ठोस रणनीति बनाई जाएगी, जिनका सीधा संबंध समाज और ग्रामीण जीवन से है।
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खाप प्रतिनिधियों का मानना है कि केवल प्रस्ताव पारित करने से बदलाव नहीं आएगा, इसलिए खापों की साख मजबूत करने और उनके निर्णयों को धरातल पर लागू कराने के लिए संगठित जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है। इसी सोच के साथ अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और संकल्पों पर मुहर लगने की संभावना है। महापंचायत के समापन अवसर पर विभिन्न खापों के प्रतिनिधि ब्रह्मसरोवर में स्नान कर सामाजिक एकता, भाईचारे और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लेंगे। महापंचायत के आयोजक डॉ. कृष्ण श्योकंद ने कहा कि यह केवल एक जातिगत अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का प्रतीक होगा।
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