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सरस्वती नदी में सफाई के नाम पर खानापूर्ति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jun 2021 01:09 AM IST
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Khanapurti in the name of cleaning in Saraswati river, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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बाबैन। मनरेगा के तहत इन दिनों सरस्वती नदी की साफ सफाई का कार्य जोरों पर ह। बाबैन व बरगट शाहपुर के बीच इस नदी के बीच करीब एक किलोमीटर में खड़े घास फूस व अन्य कबाड़ की सफाई न करके उसे आग के हवाले कर सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
मनरेगा के तहत काम कर रहे मजदूर सरस्वती नदी में खड़े घास-फूस को पहले आग लगाते है, उसके बाद घास की राख को कस्सी से हटा देते है ताकि किसी को आग लगाए जाने का आभास न हो। यही नहीं सफाई अभियान के नाम पर नदी के किनारे खड़े नीम के हरे भरे वृक्ष को भी काट दिया गया है। इस मामले में नदी के साथ लगती जमीन के मालिकों ने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
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हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने सरस्वती नदी में तीन दिन पूर्व ही मनरेगा के तहत सफाई व खुदाई अभियान की शुरुआत की थी। सरस्वती नदी के निकट लगते खेतों के किसानों सतनाम सिंह, जय गणेश, मोहित सैनी व बलकार सिंह का कहना है कि सफाई के नाम पर केवल नदी में खड़े घास को आग लगा खानापूर्ति की जा रही है, जिससे अनेक वन्य जीव-जंतु मर रहे हैं। किसानों का कहना है कि दो दिन पूर्व उन्होंने मजदूरों को आग लगाने से मना कर दिया था। बावजूद इसके फिर से नदी में खड़े घास में आग लगा दी।
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किसानों का कहना है कि यदि किसान अपनी फसलों के अवशेष जलाए तो उनके खिलाफ जुर्माना लगाने के अलावा मामले तक दर्ज कर दिए जाते हैं और यदि अधिकारियों के नीचे चल रहे कार्य के तहत आग लगाई जाए तो वह गैर कानूनी नहीं रहता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से सरस्वती नदी के पुनरुत्थान व सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये की राशि खर्च की जाती है, जबकि इस नदी में पानी नाममात्र ही आता है। किसानों का कहना है कि यदि सरस्वती नदी में पानी का बहाव शुरू किया जाता है तभी क्षेत्र के लोगों को सरस्वती नदी की खुदाई का लाभ मिलेगा और अगर यही हाल रहना है तो फिर प्रतिवर्ष सरस्वती नदी पर लाखों रुपये खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है।

मनरेगा मेट को नोटिस किया जारी: बीडीपीओ
बाबैन के बीडीपीओ आशुतोष ने बताया कि मामला आज ही संज्ञान में आया है। इस संबंध में मनरेगा के तहत मजदूरों से कार्य करवाने वाले मेट को नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
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