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Kurukshetra News: कांजीपुरम की साड़ियां महिलाओं का मोह रहीं मन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Nov 2025 02:00 AM IST
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Kanjipuram sarees are attracting women
कुरुक्षेत्र। कांजीवरम साड़िया दिखाती दुकानदार। संवाद - फोटो : अमर उजाला
कुरुक्षेत्र। कांजीपुरम तमिलनाडु का एक छोटा सा शहर है, जो अपनी अत्यधिक मूल्यवान कांजीवरम सिल्क (रेशम) साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। गीता महोत्सव में अब वही कांजीवरम साड़ी पति-पत्नी के बीच मीठी नोक-झोंक का कारण बन रही है। सेमी सिल्क कांजीवरम हैंडमेड साड़ी महिलाओं का मन मोह रही हैं।
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ब्रह्मसरोवर के सरस मेले की स्टाॅल नंबर 617 पर कर्नाटक के तुमकुर जिले के नोनविनकेरे गांव की रहने वाली सार्गवी एनआर के हाथों की बनी साड़ियां देख महिला पर्यटकों के कदम ठहर जाते हैं। सार्गवी एनआर बताती हैं कि कांजीवरम साड़ियां तमिलनाडु के बुनकरों के शहर कांजीपुरम की पहचान हैं लेकिन अब वहां भी पश्चिमी सभ्यता के कपड़ों की मांग बढ़ने के कारण लोग इस काम को छोड़ने लगे हैं। परंतु वह अभी भी इस काम को करती आ रही हैं और कई लोगों को इस काम से रोजगार भी दे रही हैं। वे पूरे भारतवर्ष में लगने वाले सरस मेलों में जाकर अपनी साड़ियां बेचती हैं और उन्हें हर मेले में ग्राहकों का खूब प्यार मिलता है। ग्राहक सिर्फ साड़ी देखकर उसके बारे में जानने के लिए रुकते हैं और फिर कई-कई साड़ियां बिना मोल-भाव के खरीद कर ले जाते हैं। सार्गवी गीता महोत्सव में हर रोज 70 से लेकर एक लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। रेशमी कांजीवरम साड़ी धार्मिक आस्था के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यह सिल्क रेशम के कीड़ों के कोकून से तैयार होती हैं। इस प्रक्रिया में 40 दिन का समय लग जाता है।
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एक साड़ी बनाने में तीन से चार दिन का लगता है समय

सार्गवी बताती हैं कि वे रेशम गांव के ही किसानों से खरीद लेती हैं। अब ग्राहकों की मांग के अनुसार साड़ियां तैयार करती हैं। कई ग्राहक आते हैं, जो शुद्ध रेशम की साड़ी मांगते हैं, जो 40 हजार से लेकर एक लाख तक तैयार होती है। कई उसमें सोना चांदी की जरी का काम मांगते हैं, जो और भी महंगी तैयार होती है। उनके पास सबसे ज्यादा सेमी सिल्क साड़ियों की मांग रहती है जो बाजार में उनकी लेयर व डिजाइन के हिसाब से एक हजार से लेकर 10 हजार तक के मूल्य में उपलब्ध हैं। वे बताती हैं कि उन्हें कई बार साड़ी का डिजाइन सोचने में और उसका ताना-बाना तैयार करने में तीन से चार दिन का समय लग जाता है।

कुरुक्षेत्र। कांजीवरम साड़िया दिखाती दुकानदार। संवाद

कुरुक्षेत्र। कांजीवरम साड़िया दिखाती दुकानदार। संवाद- फोटो : अमर उजाला

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