{"_id":"6912416c70daca23ff0a1df2","slug":"jasmeet-alias-vicky-convicted-in-railway-property-theft-case-released-with-warning-for-first-offence-kurukshetra-news-c-45-1-kur1007-145135-2025-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: रेलवे संपत्ति चोरी मामले में जसमीत उर्फ विक्की दोषी, पहली गलती पर चेतावनी देकर किया रिहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: रेलवे संपत्ति चोरी मामले में जसमीत उर्फ विक्की दोषी, पहली गलती पर चेतावनी देकर किया रिहा
Tue, 11 Nov 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 11 Nov 2025 01:17 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी की अदालत ने रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम की धारा 3 के तहत दर्ज मामले में अभियुक्त शाहाबाद के मक्कड़ काॅलोनी के रहने वाले जसमीत उर्फ विक्की को दोषी ठहराया है।
मामला आरपीएफ पुलिस पोस्ट कुरुक्षेत्र में 10 अगस्त 2022 को दर्ज दैनिक डायरी रिपोर्ट (डीडीआर) से संबंधित है। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में अभियुक्त राघव व जसमीत उर्फ विक्की के पास चोरी का संदिग्ध पटरी का टुकड़ा (आयरन एंगल) बरामद हुआ था। जांच पूरी कर शिकायत दर्ज की गई।
साक्ष्य पेश करने से पूर्व अभियुक्त ने स्वेच्छा से अपराध कबूल किया। कानूनी परिणाम समझाने के बावजूद उसने बिना दबाव के दोष स्वीकार किया। अभियोजन व बचाव के तर्क सुनने के बाद अदालत ने उसे दोषी करार दिया।
विज्ञापन
सजा के बिंदु पर अभियुक्त ने गरीबी व गंभीर बीमारी का हवाला देकर उदारता की मांग की। अदालत ने इसे पहला अपराध मानते हुए चेतावनी देकर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही धारा 5 के तहत एक हजार रुपये मुकदमा खर्च जमा कराया गया।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी की अदालत ने रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम की धारा 3 के तहत दर्ज मामले में अभियुक्त शाहाबाद के मक्कड़ काॅलोनी के रहने वाले जसमीत उर्फ विक्की को दोषी ठहराया है।
मामला आरपीएफ पुलिस पोस्ट कुरुक्षेत्र में 10 अगस्त 2022 को दर्ज दैनिक डायरी रिपोर्ट (डीडीआर) से संबंधित है। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में अभियुक्त राघव व जसमीत उर्फ विक्की के पास चोरी का संदिग्ध पटरी का टुकड़ा (आयरन एंगल) बरामद हुआ था। जांच पूरी कर शिकायत दर्ज की गई।
विज्ञापन
साक्ष्य पेश करने से पूर्व अभियुक्त ने स्वेच्छा से अपराध कबूल किया। कानूनी परिणाम समझाने के बावजूद उसने बिना दबाव के दोष स्वीकार किया। अभियोजन व बचाव के तर्क सुनने के बाद अदालत ने उसे दोषी करार दिया।
विज्ञापन
सजा के बिंदु पर अभियुक्त ने गरीबी व गंभीर बीमारी का हवाला देकर उदारता की मांग की। अदालत ने इसे पहला अपराध मानते हुए चेतावनी देकर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही धारा 5 के तहत एक हजार रुपये मुकदमा खर्च जमा कराया गया।