{"_id":"68aa3c4566030a7e230c6c34","slug":"it-is-necessary-to-suppress-worldly-desires-shastri-kurukshetra-news-c-45-1-sknl1005-140918-2025-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांसारिक इच्छाओं का दमन करना जरूरी : शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांसारिक इच्छाओं का दमन करना जरूरी : शास्त्री
Sun, 24 Aug 2025 03:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 24 Aug 2025 03:40 AM IST
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। सेक्टर-पांच के श्री शिव शक्ति मंदिर में श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने मनुष्य की इच्छाओं और प्रभुभक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा को पाने के लिए सांसारिक इच्छाओं का दमन करना होगा।
उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहता है कि हमारे सभी इच्छाएं पूर्ण हो लेकिन संसार के किसी भी प्राणी की सभी इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकती हैं। मनुष्य की एक इच्छा की पूर्ति होने के बाद स्वतः दूसरी इच्छा खड़ी हो जाती है। और यही दुख का कारण है। जब तक इच्छाओं का दमन नहीं होगा तब तक हम परमात्मा की और अग्रसर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जितना सांसारिक चीजों में मोह माया बढ़ती जाएगी, उतना ही हम परमात्मा से दूर होते चले जाएंगे। अतः जीवन में परमात्मा प्राप्ति की इच्छा करने वाले लोगों को पहले अपनी इच्छाओं का दमन करना चाहिए और मनुष्य को अपने इंद्रिय को बस में रखना चाहिए। अगर मनुष्य को अपने अंदर कुछ विशेषता दिख रही है तो समझिए यह शरणागति और ईश्वर की प्राप्ति में बाधक है। जब तक मनुष्य को अपने बल का अभिमान रहता है तब तक वह भगवान की शरण में नहीं आ सकता। ईश्वर के शरणागति होने पर मनुष्य सदा के लिए निर्भय हो जाता है।ईश्वर का ध्यान लगाने पर बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। संवाद
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहता है कि हमारे सभी इच्छाएं पूर्ण हो लेकिन संसार के किसी भी प्राणी की सभी इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकती हैं। मनुष्य की एक इच्छा की पूर्ति होने के बाद स्वतः दूसरी इच्छा खड़ी हो जाती है। और यही दुख का कारण है। जब तक इच्छाओं का दमन नहीं होगा तब तक हम परमात्मा की और अग्रसर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जितना सांसारिक चीजों में मोह माया बढ़ती जाएगी, उतना ही हम परमात्मा से दूर होते चले जाएंगे। अतः जीवन में परमात्मा प्राप्ति की इच्छा करने वाले लोगों को पहले अपनी इच्छाओं का दमन करना चाहिए और मनुष्य को अपने इंद्रिय को बस में रखना चाहिए। अगर मनुष्य को अपने अंदर कुछ विशेषता दिख रही है तो समझिए यह शरणागति और ईश्वर की प्राप्ति में बाधक है। जब तक मनुष्य को अपने बल का अभिमान रहता है तब तक वह भगवान की शरण में नहीं आ सकता। ईश्वर के शरणागति होने पर मनुष्य सदा के लिए निर्भय हो जाता है।ईश्वर का ध्यान लगाने पर बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। संवाद
विज्ञापन