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विकसित भारत-2047 के लिए गौरवशाली इतिहास और विरासत को जानना आवश्यक : सुभाष बराला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2025 11:06 PM IST
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It is necessary to know the glorious history and heritage for developed India-2047: Subhash Barala
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. आरके सदन में लोक प्रशासन विभाग एवं न्यू पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विकसित भारत 2047 चुनौतियां, अवसर एवं विकास विषय पर मंथन किया गया। दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यातिथि राज्य सभा सांसद सुभाष बराला और अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडे रहे।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि सांसद सुभाष बराला ने कहा है कि विकसित भारत-2047 के लिए हमें अपने गौरवशाली इतिहास एवं विरासत को जानना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों के साथ वैश्विक संबंधों को मजबूत कर भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति दी है। अभी हाल ही में यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंधों में प्रगाढ़ता आई है, जिसकी विकसित भारत-2047 में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गौरवशाली इतिहास के साथ समृद्ध विरासत को जाने के साथ सनातन परंपरा का निर्वहन करने की आवश्यकता है। नई तकनीक के साथ सनातन संस्कृति एवं विचार को साथ लेकर चलने की जरूरत भी है। युवाओं को पढ़ाई के साथ खेल में आगे बढ़ाने का आह्वान किया ताकि युवा सही दिशा में अपने कदम बढ़ा सकें।
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डॉ. ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि 2047 विकसित भारत को लेकर आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरण एवं सुशासन के साथ उन्नति को लक्षित किया गया है। इसे लेकर स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, नवाचार एवं उद्यमिता पर जोर दिया गया है। उन्होंने तकनीकी पर अत्यधिक न आश्रित होने की बात कहते हुए चिप को लेकर व्यक्तिगत जानकारी लीक होने पर भी प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल कहा कि हमें अपने प्राचीन ज्ञान को संचित कर जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान को सत्यापित करने की जरूरत नहीं है, इसलिए विकसित भारत के साथ हमें अपनी मानसिकता को भी विकसित करना चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि नवाचार एवं सृजनात्मकता का वातावरण विकसित भारत की नींव है। वर्तमान में भारत विश्व के पांच अग्रणी देशों में शामिल है। किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जा दाता भी है। आज कृषि, विज्ञान एवं तकनीक के साथ हर क्षेत्र में भारत तीव्र गति से कार्य कर रहा है। सेमिनार निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार ने बताया कि इस दो दिवसीय सेमिनार में 15 राज्यों के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
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