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Kurukshetra News: सरकारी स्कूलों में फर्जी दाखिलों की जांच शुरू, सीबीआई ने मांगा मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और वर्दी भत्ते का रिकॉर्ड
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कुरुक्षेत्र। जिले के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2014-15 और 2015-16 के दौरान हुए कथित फर्जी दाखिलों की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संभाला है। इस मामले में सीबीआई ने शिक्षा निदेशालय से पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों से जुड़ी योजनाओं जैसे मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और वर्दी भत्ता का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा था, जिसे भेजने का समय 26 जून था। ऐसे में जिला मौलिक शिक्षा विभाग अभी तक पूरा डेटा नहीं जुटा सका।
जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय के सुपरिटेंडेंट रणबीर रोहिल्ला ने बताया कि पिहोवा, थानेसर और बाबैन ब्लॉक का रिकॉर्ड जुटा लिया गया है, जबकि शाहाबाद और लाडवा ब्लॉक का रिकॉर्ड अब तक नहीं पहुंचा है। विभाग ने सभी ब्लॉकों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द रिकॉर्ड एकत्र कर भेजें। विभाग की ओर 26 जून तक की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
ये है पूरा मामला
वर्ष 2013-14 से पहले सरकारी स्कूलों में दाखिले ऑफलाइन होते थे, लेकिन इसके बाद एमआईएस पोर्टल लागू हुआ और आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। आरोप है कि कई फर्जी नामों से दाखिले दिखाकर मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ उठाया गया। हालांकि निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया था कि जिन स्कूलों से समय पर सूचना नहीं मिलेगी, उनके प्रधानाचार्य जांच के घेरे में आ सकते हैं। इस कारण गर्मियों की छुट्टियों के बावजूद स्कूल स्टाफ रिकॉर्ड तैयार करने में जुटा हुआ है। सीबीआई इस रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच करेगी कि किन स्कूलों में फर्जी दाखिले दिखाकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग हुआ।
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जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय के सुपरिटेंडेंट रणबीर रोहिल्ला ने बताया कि पिहोवा, थानेसर और बाबैन ब्लॉक का रिकॉर्ड जुटा लिया गया है, जबकि शाहाबाद और लाडवा ब्लॉक का रिकॉर्ड अब तक नहीं पहुंचा है। विभाग ने सभी ब्लॉकों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द रिकॉर्ड एकत्र कर भेजें। विभाग की ओर 26 जून तक की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
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ये है पूरा मामला
वर्ष 2013-14 से पहले सरकारी स्कूलों में दाखिले ऑफलाइन होते थे, लेकिन इसके बाद एमआईएस पोर्टल लागू हुआ और आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। आरोप है कि कई फर्जी नामों से दाखिले दिखाकर मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ उठाया गया। हालांकि निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया था कि जिन स्कूलों से समय पर सूचना नहीं मिलेगी, उनके प्रधानाचार्य जांच के घेरे में आ सकते हैं। इस कारण गर्मियों की छुट्टियों के बावजूद स्कूल स्टाफ रिकॉर्ड तैयार करने में जुटा हुआ है। सीबीआई इस रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच करेगी कि किन स्कूलों में फर्जी दाखिले दिखाकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग हुआ।
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