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अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस : 81 खेल नर्सरियों में तैयार हो रहे 2,025 से ज्यादा खिलाड़ी
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कुरुक्षेत्र। अपनी महिला टीम के साथ कोच रजनी व खिलाड़ी। संवाद
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस खेलों के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देता है। जिले में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि से 81 खेल नर्सरियों में 2,025 से ज्यादा खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। सरकारी और निजी नर्सरियां उभरती प्रतिभाओं को जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रही हैं।
जिले में 32 सरकारी खेल नर्सरियां संचालित हैं, जिनमें 800 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहीं 49 निजी खेल नर्सरियों में 1,225 खिलाड़ी विभिन्न खेलों की बारीकियां सीख रहे हैं। प्रत्येक नर्सरी में कम से कम 25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कई नर्सरियों में 50 से अधिक खिलाड़ी कोचों से प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन नर्सरियों से निकले खिलाड़ियों ने देश और जिले का नाम रोशन किया है। वॉलीबॉल, कराटे, जूडो, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में खिलाड़ी पदक जीतते हैं। डीएसओ मनोज कुमार ने बताया कि खेल नर्सरियां खिलाड़ियों की नींव मजबूत कर रही हैं। कुरुक्षेत्र के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
खिलाड़ियों के लिए हर दिन खेल दिवस जैसा : नेहा
साइकिलिंग कोच नेहा ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उत्साह और अनुशासन का नाम है। खिलाड़ियों के लिए हर दिन खेल दिवस जैसा होता है, क्योंकि वे रोज नए लक्ष्य तय करते हैं। कुरुक्षेत्र आज खेलों का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। जिले की खेल नर्सरियां और प्रशिक्षण सुविधाएं प्रतिभा निखार रही हैं। खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी उज्ज्वल खेल भविष्य का संकेत है।
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बेटियों को मिल रहा मंच : रजनी
कोच रजनी ने बताया कि खेल नर्सरियां बेटियों को भी आगे बढ़ने का मजबूत मंच दे रही हैं। एथलेटिक्स, कबड्डी, बॉक्सिंग, कुश्ती और हॉकी जैसे खेलों में बड़ी संख्या में बालिका खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही हैं। अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है और अधिक लड़कियां खेलों में भाग ले रही हैं। ये खिलाड़ी अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
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जिले में 32 सरकारी खेल नर्सरियां संचालित हैं, जिनमें 800 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहीं 49 निजी खेल नर्सरियों में 1,225 खिलाड़ी विभिन्न खेलों की बारीकियां सीख रहे हैं। प्रत्येक नर्सरी में कम से कम 25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कई नर्सरियों में 50 से अधिक खिलाड़ी कोचों से प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन नर्सरियों से निकले खिलाड़ियों ने देश और जिले का नाम रोशन किया है। वॉलीबॉल, कराटे, जूडो, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में खिलाड़ी पदक जीतते हैं। डीएसओ मनोज कुमार ने बताया कि खेल नर्सरियां खिलाड़ियों की नींव मजबूत कर रही हैं। कुरुक्षेत्र के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
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खिलाड़ियों के लिए हर दिन खेल दिवस जैसा : नेहा
साइकिलिंग कोच नेहा ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उत्साह और अनुशासन का नाम है। खिलाड़ियों के लिए हर दिन खेल दिवस जैसा होता है, क्योंकि वे रोज नए लक्ष्य तय करते हैं। कुरुक्षेत्र आज खेलों का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। जिले की खेल नर्सरियां और प्रशिक्षण सुविधाएं प्रतिभा निखार रही हैं। खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी उज्ज्वल खेल भविष्य का संकेत है।
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बेटियों को मिल रहा मंच : रजनी
कोच रजनी ने बताया कि खेल नर्सरियां बेटियों को भी आगे बढ़ने का मजबूत मंच दे रही हैं। एथलेटिक्स, कबड्डी, बॉक्सिंग, कुश्ती और हॉकी जैसे खेलों में बड़ी संख्या में बालिका खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही हैं। अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है और अधिक लड़कियां खेलों में भाग ले रही हैं। ये खिलाड़ी अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

कुरुक्षेत्र। अपनी महिला टीम के साथ कोच रजनी व खिलाड़ी। संवाद

कुरुक्षेत्र। अपनी महिला टीम के साथ कोच रजनी व खिलाड़ी। संवाद