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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   International recognition go, then take the first reform

अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने चले, पहले सुधार तो कर लो

Sun, 13 Sep 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र Updated Sun, 13 Sep 2015 11:56 PM IST
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हिंदी भाषा की स्थिति पर सरकारी बाबुओं का ध्यान दिलाने और विभागों में भाषा की शुद्धता बरकरार रखने के लिए शिक्षक संघ, सामाजिक संगठन, अधिकारी, ख्याति प्राप्त लोग और विद्यार्थी संगठन सामने आए हैं।
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उन्होंने माना है कि हिंदी का शुद्ध रूप सामने आना बेहद जरूरी है। साथ ही हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया जाए। अभी तक हिंदी को राज भाषा का दर्जा ही प्राप्त है।
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हिंदी प्रेमियों का मानना है कि सरकार द्वारा हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बेहतर स्थान दिलाने के प्रयास चल रहे हैं।

इस दौरान सभी को इस पर ध्यान देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि जिला के कई सरकारी महकमों में हिंदी के शब्दों और वाक्यों को अशुद्ध तरीके से लिखा गया है। यह अपने आप में हिंदी के लिए एक चुनौती है।
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विभागों में हो हिंदी शब्दकोष: आरजेवाईएस  
राष्ट्रीय संगठन आरजेवाईएस (एनजीओ) के प्रदेशाध्यक्ष संदीप कौशिक ने कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है। इसे सही स्वरूप में प्रदर्शित करने का प्रबंध होना चाहिए।

राजकीय और अराजकीय विभागों में हिंदी शब्दकोष की व्यवस्था होनी चाहिए। विभागों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो जिला स्तर पर अधिकारियों को जागरूक करने का अभियान चलाएंगे।

हिंदी की स्थिति सुधारने को सर्वे कराए सरकार: एसएफआई
छात्र संगठन एसएफआई के यूनिवर्सिटी अध्यक्ष पवन थुआ ने कहा कि सरकार को हिंदी की स्थिति बेहतर करने के लिए सर्वे कराना चाहिए।

जहां भी हिंदी भाषा को गलत ढंग से प्रदर्शित किया गया है, उसे शीघ्र सुधारा जाना चाहिए। कानूनी भाषा अंग्रेजी में है। लगभग सारे कागजात इसी विदेशी भाषा में तैयार होते हैं। हिंदी को कानूनी और कामकाजी भाषा बनाकर इस भाषा को बढ़ावा दिया जा सकता है।

भाषा सुधार के हों सार्थक प्रयास: इनसो
छात्र संगठन इनसो के यूनिवर्सिटी अध्यक्ष संदीप नैन का कहना है कि हिंदी को बढ़ावा देने के कदम उठाने चाहिए। वर्तमान में हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी को महत्व दिया जा रहा है।

यह हिंदी भाषा के साथ नाइंसाफी है। केयू और जिला प्रशासन को हिंदी भाषा के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए भाषा सुधार के सार्थक प्रयास करने चाहिए।

सरकार जगाए हिंदी के प्रति स्वाभिमान: एबीवीपी
एबीवीपी के संगठन मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुनील भारद्वाज ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करानी चाहिए।

भाषा विषय पर सेमीनार भी होने अति महत्वपूर्ण हैं। प्रतिभागियों को पुरस्कृत करना आवश्यक है। इससे लोगों में हिंदी के प्रति लगाव बढ़ेगा। सरकार को चाहिए कि हिंदी के प्रति लोगों में स्वाभिमान जगाएं।

हिंदी को मिले राष्ट्र भाषा का दर्जा: पीएचडी शोधार्थी
केयू हिंदी विभाग के पीएचडी शोधार्थी सुनील कुमार ने कहा कि हिंदी राजभाषा है। इसे राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।

सरकार को चाहिए कि सभी सरकारी काम हिंदी में हों। हिंदी के मानक रूप का प्रयोग हो। इससे लेखन और उच्चारण में शुद्धता आएगी और हिंदी का मान-सम्मान बढ़ेगा।


वर्तनी की गलती में हो सुधार: डॉ. पूनिया
यूनिवर्सिटी कालेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि शब्दों को अशुद्ध लिखना व्याकरणीय दृष्टि से वर्तनी की गलती है।

इसमें सुधार होना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर अंकित गलत शब्द और वाक्यों से अर्थ का अनर्थ निकल जाता है।  उन्हें  समय रहते ठीक नहीं किया गया तो इससे समाज में गलत शब्दों का प्रचलन बढ़ सकता है।


कभी ध्यान नहीं गया, लेकिन हिंदी से खासा प्रेम: डा. खामरा
मथाना सीएचसी में लिखे अशुद्ध शब्दों बारे एसएमओ डॉ. शैलेंद्र खामरा ने स्वीकार किया कि उनके चिकित्सालय में हिंदी को अशुद्ध रूप में लिखा गया है।

कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया, लेकिन हिंदी से खासा प्रेम है। उन्होंने कहा कि गलत शब्द को जल्द सही कराएंगे।

हिंदी को शुद्धता के साथ परोसा जाए : डॉ. परमेश
केयू शिक्षक संघ (कुटा) अध्यक्ष डॉ. परमेश ने कहा कि हिंदी को सही मायनों में उच्चतर पहचान तभी मिलेगी, जब इसको शुद्धता के साथ परोसा जाएगा।

हिंदी को सही लिखा जाए। शिक्षा केंद्र केयू में बोर्ड पर हिंदी में कुछ लिखवाने से पहले केयू प्रशासन को चाहिए कि हिंदी साहित्य विभाग के शिक्षकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करे।


हिंदी लिखने और बोलने में हो शुद्धता : डॉ. प्रवीण सैनी
केयू कुलसचिव डॉ. प्रवीण सैनी ने कहा कि यूनिवर्सिटी परिसर में जहां भी हिंदी शब्दों को अशुद्ध लिखा गया है, इन्हें सही कराया गया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा हमारी स्वदेशी भाषा है। इसके लिखने और बालने में शुद्धता होनी चाहिए।
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