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Kurukshetra News: श्रीलंका में हिंदी के विकास और चुनौतियों पर केयू में होगा अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान
Tue, 21 Jul 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 21 Jul 2026 06:03 AM IST
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कुरुक्षेत्र। डॉ. सुभाषिनी रत्नायका।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में 23 जुलाई को श्रीलंका में हिंदी का विकास और चुनौतियां विषय पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में श्रीलंका की शिक्षाविद् एवं हिंदी विशेषज्ञ डॉ. सुभाषिनी रत्नायका मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगी।
व्याख्यान का आयोजन सुबह 10 बजे हिंदी विभाग स्थित गणपति चंद्र गुप्त हॉल में होगा। विश्वविद्यालय के लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि इस व्याख्यान में डॉ. सुभाषिनी रत्नायका श्रीलंका में हिंदी भाषा के इतिहास, विकास, शिक्षण व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रभाव और वर्तमान समय में हिंदी के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष करेंगे।
प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि हिंदी विभाग समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्याख्यान, संगोष्ठियों तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा एवं साहित्य को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और हिंदी प्रेमियों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। उनके अनुसार यह व्याख्यान हिंदी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और विश्व स्तर पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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डॉ. सुभाषिनी रत्नायका श्रीलंका की प्रतिष्ठित हिंदी विदुषी, शिक्षाविद् और छात्र परामर्शदाता हैं। वह यूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया के विज्ञान संकाय में स्टूडेंट काउंसलर हैं और मोराटुवा यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न संस्थानों में हिंदी की अतिथि प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में एमफिल किया है और हिंदी विषय में पीएचडी शोधरत हैं। हिंदी भाषा, साहित्य, अनुवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में उनके अनेक शोध-पत्र, पुस्तकें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी के लिए उन्हें महात्मा गांधी मेमोरियल अवार्ड, हिंदी सेवी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
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व्याख्यान का आयोजन सुबह 10 बजे हिंदी विभाग स्थित गणपति चंद्र गुप्त हॉल में होगा। विश्वविद्यालय के लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि इस व्याख्यान में डॉ. सुभाषिनी रत्नायका श्रीलंका में हिंदी भाषा के इतिहास, विकास, शिक्षण व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रभाव और वर्तमान समय में हिंदी के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष करेंगे।
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प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि हिंदी विभाग समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्याख्यान, संगोष्ठियों तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा एवं साहित्य को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और हिंदी प्रेमियों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। उनके अनुसार यह व्याख्यान हिंदी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और विश्व स्तर पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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डॉ. सुभाषिनी रत्नायका श्रीलंका की प्रतिष्ठित हिंदी विदुषी, शिक्षाविद् और छात्र परामर्शदाता हैं। वह यूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया के विज्ञान संकाय में स्टूडेंट काउंसलर हैं और मोराटुवा यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न संस्थानों में हिंदी की अतिथि प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में एमफिल किया है और हिंदी विषय में पीएचडी शोधरत हैं। हिंदी भाषा, साहित्य, अनुवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में उनके अनेक शोध-पत्र, पुस्तकें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी के लिए उन्हें महात्मा गांधी मेमोरियल अवार्ड, हिंदी सेवी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।