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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव संपन्न : 18 दिनों तक संस्कृति, शिल्प व अध्यात्म का संगम बना रहा पवित्र ब्रह्मसरोवर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:44 AM IST
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International Gita Mahotsav concludes: The sacred Brahmasarovar remained a confluence of culture, crafts and spirituality for 18 days.
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का रविवार को समापन हुआ, जिसके अंतिम दिन रविवार को भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक संस्कृति का जलवा बिखेरा, जिसे देखकर पर्यटक गदगद हो उठे। रविवार को छुट्टी का दिन होने के चलते पर्यटकों का सैलाब उमड़ा रहा तो जमकर खरीदारी भी की गई। इससे अधिकतर शिल्पकारों के चेहरे खिले रहे। 28 नवंबर से शुरू हुए गीता महोत्सव के दौरान 18 दिनों तक पवित्र ब्रह्मसरोवर संस्कृति, लोक कला एवं अध्यात्म का संगम बना रहा, जहां लघु भारत का नजारा दिखाई दिया।
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विभिन्न राज्यों से पहुंचे लोक कलाकार महोत्सव के अंतिम दिन पवित्र ब्रह्मसरोवर को नमन कर एक-दूसरे को गले लगकर अगले वर्ष फिर मिलने का वादा करते हुए अपने-अपने प्रदेश के लिए रवाना हुए लेकिन देर रात तक हजारों पर्यटक सरस व शिल्प मेले में जुटे रहे, जिसके चलते अधिकतर शिल्पकार कारोबार में व्यस्त रहे।
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महोत्सव से धर्मनगरी को मिली बड़ी पहचान

महोत्सव से धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को बड़ी पहचान मिली है। जहां महोत्सव में पहुंचकर देश-विदेश के लाखों लोग साक्षी बने तो वहीं दुनिया के कोने-कोने में बैठे लाखों लोगों ने सोशल साइट्स व अन्य मीडिया के माध्यम से महोत्सव का आनंद लिया। ठंड का मौसम होने के बावजूद रोजाना पर्यटकों व श्रद्धालुओं ने इस महोत्सव में आकर जमकर खरीदारी की।
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ओडिशा से लेकर तंजानिया, उज्बेकिस्तान व तजाकिस्तान तक से पहुंचे शिल्पकार व कलाकार



महोत्सव में सहभागी प्रदेश ओडिशा से लेकर सहभागी देश तंजानिया व उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के शिल्पकार व लोक कलाकार भी महोत्सव में पहुंचकर गदगद रहे। यह पहला मौका था जब सहभागी देश के अलावा अन्य देशों के शिल्पकारों को भी यहां अपनी-अपनी शिल्पकला को दिखाने का मौका मिला। उज्बेकिस्तान व तजाकिस्तान से 26 शिल्पकारों का दल पहुंचा था। वहीं ओडिशा व तंजानिया के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक कला से भी खूब रंग जमाया।


विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
महोत्सव में इस बार जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब, असम, झारखंड, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, सिक्किम सहित 19 प्रदेशों के लोक कलाकार यहां पहुंचे तो वहीं 24 प्रदेशों के शिल्पकारों ने भी अपनी-अपनी शिल्पकला से पर्यटकों को रूबरू कराया।





ये पहुंचे थे बड़े कलाकार
सांध्यकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी प्रसिद्ध अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि, गायक हंस राज हंस, अभिनेता आशुतोष राणा, कवि डाॅ. कुमार विश्वास, प्रसिद्ध हरियाणवी गायक गजेंद्र फोगाट, महावीर गुड्डू, रंजू प्रसाद, मनीषा आदि ने अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इसके साथ-साथ हरियाणा, ओडिशा व तंजानिया के पवेलियन में हरियाणा, ओडिशा व तंजानिया की सांस्कृतिक विरासत के झरोखे भी पर्यटकों ने देखे।





नगाड़ा पार्टी, बहरूपिए व कच्ची घोड़ी रही आकर्षण का केंद्र

सांस्कृतिक कलाकारों के अलावा नगाड़ा पार्टी, राजस्थान की कच्ची घोड़ी के साथ-साथ पंजाब से आए बाजीगर ग्रुप भी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र रहे। इन कलाकारों ने जहां बच्चों का खूब मनोरंजन किया, वहीं विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी खींचने का पर्यटकों में खूब क्रेज रहा। इन सेल्फी प्वाइंट पर रात्रि के समय जगमग रंग-बिरंगी रोशनी में फोटो खींचकर पर्यटक बहुत खुश हुए।





बही अध्यात्म की रसधारा
महोत्सव के दौरान लोक संस्कृति व शिल्पकला के साथ ही अध्यात्म की भी रसधारा बही। जहां पुरुषोत्तमपुरा बाग में संत सम्मेलन में देशभर के संत जुटे और गीता पर खूब चर्चा की तो वहीं पहली बार अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें गीता के संदेश व देव स्थानों के साथ युवा पीढ़ी को जोड़ने का आह्वान किया गया। यही नहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीर्थ सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 48 कोस कुरुक्षेत्र के सभी तीर्थों की समितियां शामिल हुईं।
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