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Kurukshetra News: शंखनाद की ध्वनि के बीच सरस और शिल्प मेले के उद्घाटन संग अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ
Sun, 16 Nov 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:33 AM IST
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सरल मेले का रिबन की गांठ खोलकर उद्घाटन करते राज्यप
- फोटो : udhampur news
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर शनिवार को शंखनाद की ध्वनि के बीच राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सरस व शिल्प मेले का उद्घाटन किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल का ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया गया। उन्होंने मंत्रोच्चारण के बीच महोत्सव के मीडिया सेंटर का भी उद्घाटन किया। इस दौरान पहले ही दिन ब्रह्मसरोवर तटों पर शिल्पकारों और कलाकारों का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
राज्यपाल ने ब्रह्मसरोवर तट पर दीपशिखा प्रज्जवलित करके परंपरा अनुसार सरस और शिल्प मेले का शुभारंभ किया और श्रीमद्भगवद गीता की प्रति पर पुष्प अर्पित किए। इसके पश्चात राज्यपाल ने ब्रह्मसरोवर के तट पर शिल्प और सरस मेले का अवलोकन किया। उन्होंने ढोल-नंगाड़ा पार्टी, करतब दिखा रहे कलाकार, नृत्य कर रहे कलाकार और बीन पार्टी से बात की। उन्होंने कहा कि शिल्प और सरस मेले की सुंदर और भव्य शुरुआत शिल्पकारों के लिए सार्थक होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यक्रम 24 से 1 दिसंबर तक चलेंगे। महोत्सव में संत सम्मेलन, दीपोत्सव, गीता सेमिनार, वैश्विक गीता पाठ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इन कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेंगी और प्राचीन संस्कृति से आत्मसात होने का अनोखा अवसर मिलेगा।
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गीता संदेश आज भी उतना ही उपयोगी
राज्यपाल ने कहा कि हजारों साल पहले इस धरा पर भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह आज भी उतना ही उपयोगी है। यह संदेश युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। गीता महोत्सव न केवल कुरुक्षेत्र की भूमि पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर भी मनाया जा रहा है। इस अवसर पर थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा, केयूके के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, प्राधिकरण के सदस्य सौरव चौधरी उपस्थित थे।
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राज्यपाल ने ब्रह्मसरोवर तट पर दीपशिखा प्रज्जवलित करके परंपरा अनुसार सरस और शिल्प मेले का शुभारंभ किया और श्रीमद्भगवद गीता की प्रति पर पुष्प अर्पित किए। इसके पश्चात राज्यपाल ने ब्रह्मसरोवर के तट पर शिल्प और सरस मेले का अवलोकन किया। उन्होंने ढोल-नंगाड़ा पार्टी, करतब दिखा रहे कलाकार, नृत्य कर रहे कलाकार और बीन पार्टी से बात की। उन्होंने कहा कि शिल्प और सरस मेले की सुंदर और भव्य शुरुआत शिल्पकारों के लिए सार्थक होगी।
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उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यक्रम 24 से 1 दिसंबर तक चलेंगे। महोत्सव में संत सम्मेलन, दीपोत्सव, गीता सेमिनार, वैश्विक गीता पाठ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इन कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेंगी और प्राचीन संस्कृति से आत्मसात होने का अनोखा अवसर मिलेगा।
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गीता संदेश आज भी उतना ही उपयोगी
राज्यपाल ने कहा कि हजारों साल पहले इस धरा पर भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह आज भी उतना ही उपयोगी है। यह संदेश युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। गीता महोत्सव न केवल कुरुक्षेत्र की भूमि पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर भी मनाया जा रहा है। इस अवसर पर थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा, केयूके के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, प्राधिकरण के सदस्य सौरव चौधरी उपस्थित थे।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सरल मेले का रिबन की गांठ खोलकर उद्घाटन करते राज्यप- फोटो : udhampur news