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Panipat News: राहत की बजाए आफत बनी बारिश
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समालखा। पिछले कई दिनों से पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में हो रही बारिश अब राहत की बजाए आफत बनती जा रही है। इसके चलते यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है और किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने यमुना के पास के गांवों में डेरा जमा लिया है। नहरी विभाग के कर्मी भी मुस्तैदी से लगे हुए हैं। जबकि सैकड़ों एकड़ फसल भी जलमग्न हो गई है।
प्रशासन की टीमें विभिन्न गांवों में जलस्तर की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से उसकी बेल्ट में स्थित गावों बिलासपुर, हथवाला, राकसेड़ा, सिंबलगढ़ आदि में प्रशासन दलबल के साथ पहुंच गया है। बढ़ते जलस्तर के साथ ही हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालत ये हैं कि गांव बिलासपुर और हथवाला के बंधे तक पानी पहुंच गया है। जबकि हथवाला से सिंबलगढ़ तक करीब दो किलोमीटर का बंधा नहीं होने के कारण पानी ने राकसेडा के खेतों को जलमग्न कर दिया।
हथवाला, बिलासपुर के बंधे हुए छेदों को किया बंद
हथवाला बंधे से करीब 100 मीटर राक्सेड़ा की तरफ और 200 मीटर बिलासपुर की तरफ बंधे में तीन जगह छेद थे। जिससे यमुना का पानी दूसरी तरफ खेतों में आ रहा था। जेई प्रदीप जांगड़ा ने बताया कि बेलदार सोनू, बलवार व अन्य के सहयोग से इन्हें समय रहते हुए बंद कर दिया गया है। जानवारों द्वारा ये छेद बनाए गए होंगे।
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यमुना में बह रहा चार लाख क्यूसिक पानी
नहरी विभाग के जेई प्रदीप जांगड़ा ने बताया कि वर्तमान में यमुना में करीब चार लाख क्यूसिक पानी बह रहा है। वहीं हथनीकुंड बैराज से भी करीब ढाई लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। जेई ने बताया कि पीछे कई जगहों पर बंधे टूटने के कारण यमुना के जलस्तर में गिरावट आई है।
सब्जी, धान की फसल हुई बर्बाद
यमुना के पानी ने उसके साथ लगते गांवों में तबाही मचाई है। इससे सैकड़ों एकड़ में फसल बर्बाद हो गई। किसान अमरीक सिंह सिंबल गढ़, धर्मेंद्र, लोकेश ने बताया कि करीब 500 एकड़ में धान और सब्जी की फसल बर्बाद हो गई। साथ ही पशुओं का चारा भी नहीं बचा। हालत यही रहे तो नुकसान और बढ़ सकता है।
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प्रशासन की टीमें विभिन्न गांवों में जलस्तर की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से उसकी बेल्ट में स्थित गावों बिलासपुर, हथवाला, राकसेड़ा, सिंबलगढ़ आदि में प्रशासन दलबल के साथ पहुंच गया है। बढ़ते जलस्तर के साथ ही हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालत ये हैं कि गांव बिलासपुर और हथवाला के बंधे तक पानी पहुंच गया है। जबकि हथवाला से सिंबलगढ़ तक करीब दो किलोमीटर का बंधा नहीं होने के कारण पानी ने राकसेडा के खेतों को जलमग्न कर दिया।
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हथवाला, बिलासपुर के बंधे हुए छेदों को किया बंद
हथवाला बंधे से करीब 100 मीटर राक्सेड़ा की तरफ और 200 मीटर बिलासपुर की तरफ बंधे में तीन जगह छेद थे। जिससे यमुना का पानी दूसरी तरफ खेतों में आ रहा था। जेई प्रदीप जांगड़ा ने बताया कि बेलदार सोनू, बलवार व अन्य के सहयोग से इन्हें समय रहते हुए बंद कर दिया गया है। जानवारों द्वारा ये छेद बनाए गए होंगे।
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यमुना में बह रहा चार लाख क्यूसिक पानी
नहरी विभाग के जेई प्रदीप जांगड़ा ने बताया कि वर्तमान में यमुना में करीब चार लाख क्यूसिक पानी बह रहा है। वहीं हथनीकुंड बैराज से भी करीब ढाई लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। जेई ने बताया कि पीछे कई जगहों पर बंधे टूटने के कारण यमुना के जलस्तर में गिरावट आई है।
सब्जी, धान की फसल हुई बर्बाद
यमुना के पानी ने उसके साथ लगते गांवों में तबाही मचाई है। इससे सैकड़ों एकड़ में फसल बर्बाद हो गई। किसान अमरीक सिंह सिंबल गढ़, धर्मेंद्र, लोकेश ने बताया कि करीब 500 एकड़ में धान और सब्जी की फसल बर्बाद हो गई। साथ ही पशुओं का चारा भी नहीं बचा। हालत यही रहे तो नुकसान और बढ़ सकता है।