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भविष्य निर्माण में साहित्य, भाषा की अहम भूमिका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 01:18 AM IST
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Important role of literature, language in future making, Kurukshetra
मुख्य वक्ता डॉ. अशोक भाटिया का स्वागत करते आयोजक। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। राजकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, पलवल के हिंदी विभाग ने हिंदी साहित्य परिषद व भाषा मंच के तत्वावधान में एक व्याख्यान का आयोजन किया। ‘हिंदी में रोजगार की बढ़ती संभावनाएं’ विषय पर आयोजित व्याख्यान मे साहित्यकार प्रो. अशोक भाटिया ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। उप प्राचार्य प्रो. बीर इंद्र कौर ने कहा की हिंदी भाषा व साहित्य विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए हमें छात्र जीवन से ही भाषा व साहित्य को आत्मसात करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा व साहित्य जीवन निर्माण के साथ हमारी आजीविका के प्रश्नों को भी हल करती है। वर्तमान समय में हिंदी भाषा को अध्ययन अध्यापन के माध्यम के तौर पर इंजीनियरिंग, मेडिकल, कॉमर्स व कानून के क्षेत्रों व्यापक स्तर पर अपनाया जा रहा है इसकी वजह से हिंदी में रोजगार के नए अवसर खुले हैं।
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मुख्य वक्ता डॉ. अशोक भाटिया ने बताया कि उच्च प्रशासनिक सेवा में वैकल्पिक विषय हिंदी चुनकर सरकारी क्षेत्र में नौकरी हासिल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त साहित्य के क्षेत्र में पेशेवर कवि, लेखक, प्रेरक वक्ता, मंच संचालक, अनुवादक, प्रूफ रीडर व टाइपिस्ट का काम करके आत्मनिर्भर बन सकते हैं। अन्य क्षेत्रों जैसे कि सिनेमा व विज्ञापन की दुनिया में हिंदी के माध्यम से पहचान बनाई जा सकती है।
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हिंदी के सहायक प्रोफेसर सुनील कुमार थुआ ने कहा कि हिंदी चिंतन व चेतना की भाषा है। वर्तमान युग सूचना व तकनीक का है। हिंदी भाषा व साहित्य को भी इसके माध्यम से पंख मिले हैं। आज फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, वेब साईट, वेब पोर्टल, वेब सीरिज व अन्य मल्टीनेशनल कंपनियों जैसे कि फ्लिपकार्ट, अमेजन व गूगल आदि में हिंदी भाषा का वर्चस्व लगातार बढ़ रहा है, जिसमें हिंदी जानने वालों के लिए रोजगार व स्टार्टअप्स के बेहतर अवसर खुल रहे हैं।

डॉ. सीमा दीक्षित ने कहा कि हिंदी हमारे संस्कार व संस्कृति की भाषा है इसके माध्यम से एक सभ्य समाज बनता है व प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है। व्याख्यान में हिंदी साहित्य परिषद व भाषा मंच से जुड़ी लगभग 80 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर पंजाबी विभाग के सहायक प्रो. देवेंद्र, राजबीर, रीना यादव आदि उपस्थित रहीं।
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