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विधि क्षेत्र में कॅरिअर की अपार संभावनाएं : मोहित
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ओर से साप्ताहिक प्रायोगिक कार्यशाला में महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय से जुड़े विशेषज्ञ अधिवक्ता मोहित गोयल इस कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता रहे।
उन्होंने विधि को एक श्रेष्ठ व सम्मानजनक पेशा बताया और वहीं विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व और पेशे के प्रति निष्ठावान रहने का संदेश दिया। उन्होंने अधिवक्ता के कॅरिअर की विभिन्न अवस्थाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और व्यावसायिक नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विधि क्षेत्र में कॅरिअर की अपार संभावनाएं हैं। इसमें भी सपनों को उड़ान दी जा सकती है।
उन्होंने सब्स्टैंटिव लॉ और प्रोसीजरल लॉ के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया और दोनों की पारस्परिक निर्भरता को समझाया। उन्होंने न्यायालय व पुलिस स्टेशन में प्रयुक्त प्रमुख विधिक शब्दावली, रिमांड की प्रक्रिया और गवाहों को समन करने की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी। गोयल ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, समन ट्रायल, दीवानी एवं फौजदारी मामलों की प्रक्रिया और अपील संबंधी प्रावधानों पर भी संक्षेप में चर्चा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण आयोग की कार्यप्रणाली, अपील की प्रक्रिया व एफिडेविट के महत्व को विस्तार से समझाया। इस दौरान डॉ. उर्मिला, डॉ.बबीता, डॉ. अंजू बाला और डॉ. सुनील भारती भी रहे।
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उन्होंने विधि को एक श्रेष्ठ व सम्मानजनक पेशा बताया और वहीं विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व और पेशे के प्रति निष्ठावान रहने का संदेश दिया। उन्होंने अधिवक्ता के कॅरिअर की विभिन्न अवस्थाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और व्यावसायिक नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विधि क्षेत्र में कॅरिअर की अपार संभावनाएं हैं। इसमें भी सपनों को उड़ान दी जा सकती है।
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उन्होंने सब्स्टैंटिव लॉ और प्रोसीजरल लॉ के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया और दोनों की पारस्परिक निर्भरता को समझाया। उन्होंने न्यायालय व पुलिस स्टेशन में प्रयुक्त प्रमुख विधिक शब्दावली, रिमांड की प्रक्रिया और गवाहों को समन करने की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी। गोयल ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, समन ट्रायल, दीवानी एवं फौजदारी मामलों की प्रक्रिया और अपील संबंधी प्रावधानों पर भी संक्षेप में चर्चा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण आयोग की कार्यप्रणाली, अपील की प्रक्रिया व एफिडेविट के महत्व को विस्तार से समझाया। इस दौरान डॉ. उर्मिला, डॉ.बबीता, डॉ. अंजू बाला और डॉ. सुनील भारती भी रहे।
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