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गर्दन पर वसा का जमाव और कालापन है तो लिवर की जांच कराएं : डॉ. ममगाईं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 02:34 AM IST
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If there is fat accumulation and blackness on the neck, get your liver checked: Dr. Mamagai
कुरुक्षेत्र। मरीजाें की जांच करते डॉ.शैलेंद्र ममगाईं। स्वयं
कुरुक्षेत्र। लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल में रविवार को विश्व जिगर दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्व सिविल सर्जन व जिला नागरिक अस्पताल के परामर्शक-फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि शराब या धूम्रपान ही नहीं सुस्त जीवनशैली और खान-पान की बदलती आदतों से बढ़ते मोटापे के कारण दुनियाभर में जिगर (यकृत व लिवर) की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो साल 2050 तक विश्व में प्रभावित लोगों की संख्या 180 करोड़ हो सकती है।
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उन्होंने प्रसिद्ध द लेंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के हवाले से बताया कि साल 2023 में दुनियाभर में लगभग 130 करोड़ लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लीवर डिजीज (एमएएसएलडी) से पीड़ित थे। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) 2023 के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन के मुताबिक 1990 में 50 करोड़ लोग एमएएसएलडी से पीड़ित थे। इनमें 2023 तक 143 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। एमएएसएलडी को पहले नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) के नाम से जाना जाता था। यह ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है।
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उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व सबसे अधिक प्रभावित

अध्ययन के मुताबिक उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में एमएसएलडी की दर अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है।प्रभावित आबादी का बड़ा हिस्सा होने के कारण इन देशों में भविष्य में लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों के तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसका कारण शराब नहीं बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी चय-अपचय की गड़बड़ी होती है। यह बीमारी खासतौर पर मोटापा, डायबिटीज और असंतुलित जीवनशैली से जुड़ी होती है।
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पुरुष जिगर की बीमारियों की चपेट में ज्यादा

डॉ. शैली ने बताया कि महिलाओं की तुलना में पुरुष जिगर की बीमारियों की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। पुरुषों में 35 से 39 वर्ष और महिलाओं में 55 से 59 वर्ष की उम्र के बीच इसके सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि यह बीमारी अब कामकाजी उम्र के लोगों को भी तेजी से प्रभावित कर रही है।

बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय

डॉ. ममगाईं ने बताया कि बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। खाना पूरी तरह चबाकर खाएं, ओवरइटिंग न करें, माइंडफुल इटिंग करें, खाना खाने के 3 घंटे बाद ही किसी तरह की कसरत करें। उच्च फाइबर युक्त भोजन, फलियों, फल, सब्जियों, नट्स और सीड्स का सेवन करें। इसके अलावा पेस्ट्री, केक, सफेद ब्रेड, पास्ता, सोडा, एनर्जी ड्रिंक और पैकेट वाले जूस आदि से परहेज करें, क्योंकि इसे पेट में सूजन हो सकती है। शुगर, मोटापा और गर्दन पर वसा का जमाव और कालापन है, तो लिवर की जरूर जांच कराएं।

कुरुक्षेत्र। मरीजाें की जांच करते डॉ.शैलेंद्र ममगाईं। स्वयं

कुरुक्षेत्र। मरीजाें की जांच करते डॉ.शैलेंद्र ममगाईं। स्वयं

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