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तो मरुस्थल में तब्दील हो जाएगी धर्मनगरी
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:36 PM IST
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भूजल का दोहन अंधाधुंध किया जा रहा है। यही हालात रहे तो धर्मनगरी की धरती जल्द ही मरुस्थल में तब्दील हो जाएगी। 41 वर्षों से भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले लगभग 10 वर्षों में हालात ज्यादा बदतर हुए हैं। एक दशक में हर वर्ष भूजल स्तर में एक मीटर गिरावट दर्ज की गई है।
इस वजह से केंद्र सरकार ने जिले के सभी ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिए हैं। शाहबाद ब्लॉक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सरकार ने जिले भर में ट्यूबवेल लगाने पर पाबंदी लगाई हुई है। कोई ट्यूबवेल न लगाए, इसकी निगरानी के लिए जिला उपायुक्त की देखरेख में ब्लॉक स्तर पर निगरानी कमेटी गठित की गई है।
यह अलग बात है कि आज तक यह कमेटियां एक भी ऐसा मामला उजागर नहीं कर पाई हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमिगत जल स्तर गिरावट की गति यदि यही रही तो अगले 30 वर्षों में गंभीर जलसंकट खड़ा हो जाएगा और मरुस्थल जैसे हालात बन जाएंगे। इससे कृषि करना तो दूर, पीने तक के लिए पानी मुश्किल से मिलेगा।
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अत्यधिक हो रहा दोहन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार भूमिगत जलस्तर के गिरने के पीछे मुख्य कारण अत्यधिक दोहन है। कृषि के लिए ही नहीं, निर्माण कार्यों से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक में बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद किया जा रहा है। धान और गन्ने की खेती में भी अत्यधिक पानी उपयोग किया जाता है। इससे हालात लगातार गंभीर हो रहे हैं।
सरकार ने झाड़ा पल्ला, नहीं किया जा रहा रिचार्ज
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक भूजल के गिरते स्तर पर ध्यान नहीं दे रही। शायद यही कारण है कि सरकार ने वर्षा का पानी रिचार्ज करने के निर्देश देकर पल्ला झाड़ लिया है। हुडा क्षेत्र में भी 200 गज से अधिक के प्लॉट में पानी रिचार्ज सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
ये हैं हालात
खंड भूजल स्तर
शाहबाद 40 मीटर
लाडवा 30 मीटर
बाबैन 38 मीटर
पिहोवा 33 मीटर
थानेसर 32 मीटर
सरकार को करनी होगी सख्ती : सतेंद्र यादव
भूजल शैल के अनुभाग अधिकारी सतेंद्र यादव ने कहा कि भूजल स्तर में हो रही गिरावट बड़े खतरे का संकेत है। इसे रोकने के लिए सरकार को सख्ती बरतनी होगी। लोगों को जागरूक करने की भी जरूरत है। हर व्यक्ति को पानी रिचार्ज में रुचि दिखानी चाहिए। वर्षा में आई कमी भी भूजल स्तर के गिरने में अहम कारण रही है।
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इस वजह से केंद्र सरकार ने जिले के सभी ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिए हैं। शाहबाद ब्लॉक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सरकार ने जिले भर में ट्यूबवेल लगाने पर पाबंदी लगाई हुई है। कोई ट्यूबवेल न लगाए, इसकी निगरानी के लिए जिला उपायुक्त की देखरेख में ब्लॉक स्तर पर निगरानी कमेटी गठित की गई है।
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यह अलग बात है कि आज तक यह कमेटियां एक भी ऐसा मामला उजागर नहीं कर पाई हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमिगत जल स्तर गिरावट की गति यदि यही रही तो अगले 30 वर्षों में गंभीर जलसंकट खड़ा हो जाएगा और मरुस्थल जैसे हालात बन जाएंगे। इससे कृषि करना तो दूर, पीने तक के लिए पानी मुश्किल से मिलेगा।
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अत्यधिक हो रहा दोहन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार भूमिगत जलस्तर के गिरने के पीछे मुख्य कारण अत्यधिक दोहन है। कृषि के लिए ही नहीं, निर्माण कार्यों से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक में बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद किया जा रहा है। धान और गन्ने की खेती में भी अत्यधिक पानी उपयोग किया जाता है। इससे हालात लगातार गंभीर हो रहे हैं।
सरकार ने झाड़ा पल्ला, नहीं किया जा रहा रिचार्ज
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक भूजल के गिरते स्तर पर ध्यान नहीं दे रही। शायद यही कारण है कि सरकार ने वर्षा का पानी रिचार्ज करने के निर्देश देकर पल्ला झाड़ लिया है। हुडा क्षेत्र में भी 200 गज से अधिक के प्लॉट में पानी रिचार्ज सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
ये हैं हालात
खंड भूजल स्तर
शाहबाद 40 मीटर
लाडवा 30 मीटर
बाबैन 38 मीटर
पिहोवा 33 मीटर
थानेसर 32 मीटर
सरकार को करनी होगी सख्ती : सतेंद्र यादव
भूजल शैल के अनुभाग अधिकारी सतेंद्र यादव ने कहा कि भूजल स्तर में हो रही गिरावट बड़े खतरे का संकेत है। इसे रोकने के लिए सरकार को सख्ती बरतनी होगी। लोगों को जागरूक करने की भी जरूरत है। हर व्यक्ति को पानी रिचार्ज में रुचि दिखानी चाहिए। वर्षा में आई कमी भी भूजल स्तर के गिरने में अहम कारण रही है।