कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर एक व्याख्यान हुआ। इसका विषय मानवता की एक बूंद - रक्तदान करें, जीवन बचाएं था। विशेषज्ञ रमेश चौधरी और सुल्तान भारद्वाज ने छात्राओं को रक्तदान के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि मानव रक्त कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता। रक्त दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों, शल्य चिकित्सा रोगियों और गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों का जीवन बचाता है।
छात्राओं को रक्तदान से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और रूढ़िवादी धारणाओं को दूर करने के लिए प्रेरित किया गया। स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर जरूरतमंदों का जीवन बचा सकते हैं। दान की गई एक यूनिट रक्त तीन व्यक्तियों का जीवन बचा सकती है। प्राचार्य डॉ. उपासना आहुजा ने कहा कि युवती-महिला के रक्तदान से सामाजिक रूढ़ियां टूटती हैं। यह शक्ति, संवेदनशीलता और करुणा का परिचय देता है। उन्होंने आगामी पांच अक्तूबर को रक्तदान शिविर में छात्राओं को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संदेश दिया।