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Kurukshetra News: मांगों के समर्थन में एचएलए ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
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कुरुक्षेत्र। कॉलेजों और जिला पुस्तकालयों में वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए योग्यता का पुनर्वर्गीकरण और संशोधन करने को लेकर हरियाणा लाइब्रेरी एसोसिएशन (एचएलए) ने बुधवार को शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा को ज्ञापन सौंपा और योग्यता में संशोधन करने की मांग की गई है। संघ के सदस्यों ने अपनी विभिन्न समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा ने संघ के सदस्यों की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया।
संघ के सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के मुताबिक पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में मास्टर डिग्री और नेट या पीएचडी की आवश्यकता होती है, जबकि यह योग्यता सरकारी सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों में पूरी तरह से लागू है, लेकिन सरकारी कॉलेजों में इसे अपनाया नहीं गया है। इस अंतर के कारण योग्य उम्मीदवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में हरियाणा एजुकेशन कॉलेज ग्रेड सर्विस रूल्स 1986 के पुराने मानदंड के मुताबिक ही वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए दूसरी श्रेणी के स्नातक और दूसरी श्रेणी के मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस को जरूरी किया गया है। इस पुराने नियम के कारण योग्य पेशेवरों की भर्ती में अड़चन आ रही है और पिछले चार दशकों में किसी भी वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष की सीधी भर्ती नहीं हुई है।
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संघ का कहना है कि योग्य नेतृत्व के बिना इन शैक्षणिक संस्थानों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। डिजिटल पुस्तकालयों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित और सक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति आवश्यक है। सरकार की ओर से कई प्रतिनिधित्वों के बावजूद आवश्यक संशोधन नहीं किए गए हैं। संघ ने प्रदेश सरकार से 1986 के सेवा नियमों में संशोधन करने और यूजीसी मानदंडों के मुताबिक योग्यता करने की मांग रखी है। अध्यक्ष डॉ. रूपेश गौड़ का कहना है कि उम्मीद है, ये लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार जल्द ही वास्तविकता बनेगा, जिसका लाभ कई अभ्यर्थियों को मिलेगा। योग्य पेशेवरों की नियुक्ति के माध्यम से पुस्तकालय सेवाओं का आधुनिकीकरण हरियाणा में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता बढ़ाने और नागरिकों के बीच आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौके पर महासचिव डॉ. अजय कुमार अरोड़ा, प्रदीप कुमार, सुखबीर सिंह, विकास कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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संघ के सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के मुताबिक पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में मास्टर डिग्री और नेट या पीएचडी की आवश्यकता होती है, जबकि यह योग्यता सरकारी सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों में पूरी तरह से लागू है, लेकिन सरकारी कॉलेजों में इसे अपनाया नहीं गया है। इस अंतर के कारण योग्य उम्मीदवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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वर्तमान में हरियाणा एजुकेशन कॉलेज ग्रेड सर्विस रूल्स 1986 के पुराने मानदंड के मुताबिक ही वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए दूसरी श्रेणी के स्नातक और दूसरी श्रेणी के मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस को जरूरी किया गया है। इस पुराने नियम के कारण योग्य पेशेवरों की भर्ती में अड़चन आ रही है और पिछले चार दशकों में किसी भी वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष की सीधी भर्ती नहीं हुई है।
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संघ का कहना है कि योग्य नेतृत्व के बिना इन शैक्षणिक संस्थानों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। डिजिटल पुस्तकालयों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित और सक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति आवश्यक है। सरकार की ओर से कई प्रतिनिधित्वों के बावजूद आवश्यक संशोधन नहीं किए गए हैं। संघ ने प्रदेश सरकार से 1986 के सेवा नियमों में संशोधन करने और यूजीसी मानदंडों के मुताबिक योग्यता करने की मांग रखी है। अध्यक्ष डॉ. रूपेश गौड़ का कहना है कि उम्मीद है, ये लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार जल्द ही वास्तविकता बनेगा, जिसका लाभ कई अभ्यर्थियों को मिलेगा। योग्य पेशेवरों की नियुक्ति के माध्यम से पुस्तकालय सेवाओं का आधुनिकीकरण हरियाणा में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता बढ़ाने और नागरिकों के बीच आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौके पर महासचिव डॉ. अजय कुमार अरोड़ा, प्रदीप कुमार, सुखबीर सिंह, विकास कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।