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हिंदी भाषा संस्कृति, इतिहास और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम : प्रो. सचदेवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:29 AM IST
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Hindi language is a medium of expression of culture, history and emotions: Prof. Sachdeva
कुरुक्षेत्र। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कुवि के सीनेट हॉल में देश भक्ति पर आधारित राज्य स्तरीय
कुरुक्षेत्र। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिड एंड ऑनर्स स्टडीज और जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सीनेट हॉल में देश भक्ति पर आधारित राज्य स्तरीय कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में अंबाला, पानीपत, कैथल, यमुनानगर के कुल 25 कॉलेजों के 106 विद्यार्थी शामिल रहे।
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प्रतियोगिता में एसडी कॉलेज अंबाला कैंट छाया रहा। कॉलेज की छात्रा तन्नूश्री ने पहला और प्रदयूमन शर्मा ने दूसरा स्थान हासिल किया। राजकीय पीजी कॉलेज अंबाला की लविका तीसरे स्थान पर रही। डीएमएम कॉलेज कुरुक्षेत्र की महक, डीएवी गर्ल्ज कॉलेज यमुनानगर आयुंशी गर्ग व जाट कॉलेज रोहतक के सोनू कुमार को सांत्वना पुरस्कार मिला।
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इसमें कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है। यह देश को एकता के सूत्र में बांधने की भाषा है। यह केवल भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है। हमारे देश में केवल हिंदी ही राजभाषा है इसलिए हमें हिंदी भाषा पर गौरवान्वित अनुभव करना चाहिए।
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युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने सभी अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन करते हुए कहा कि हिंदी भाषा भारत की बिंदी है।



कुलपति ने कहा कि हमारी ऑफिशियल भाषा हिंदी है। अंग्रेजी को सह-राजभाषा का दर्जा 1949 में 15 वर्ष के लिए दिया गया था जो बाद में असीमित समय के लिए बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हिंदी पूरे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जिसे मातृभाषा के रूप में 44 प्रतिशत लोग प्रयोग करते हैं, दूसरे स्थान पर बंगाली आठ प्रतिशत, तीसरे स्थान पर मराठी सात प्रतिशत और अंग्रेजी भाषा का प्रयोग पहली सहायक भाषा के रूप में 0.02 प्रतिशत लोग करते हैं।
कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने कहा कि हिंदी पर हमें अभिमान है। हिंदी भाषा में जैसा अक्षर लिखा जाता है वैसा ही पढ़ा जाता है। आठवीं शताब्दी में हिंदी की उत्पत्ति हुई। हिंदी भाषा को किसी भी भाषा से खतरा नहीं है जबकि हिंदी अन्य भाषाओं को संग्रहित कर आगे बढ़ रही है। जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने कार्यक्रम की विषय वस्तु बताते हुए कहा कि हिंदी ने पिछले 20 सालों में रिकॉर्ड तोड दिए हैं। आज 100 से ज्यादा टीवी चैनल हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं। यूएनओ व विदेश मंत्रालय में हिंदी में कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम के मंच का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना ने किया। निर्णायक मंडल के रूप में प्रो. दिनेश दधीचि, प्रो. सीडीएस कौशल व डॉ. रेनू दहिया मौजूद रही।

इस अवसर पर प्रो. रीटा, प्रो. विवेक चावला, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. विवेक गौड़, डॉ. मधुदीप, डॉ. रोमा, डॉ. अभिनव, डॉ. तपेश किरण, डॉ. रोशन मस्ताना, डॉ. प्रदीप राय, सचिन, सुनीता, राहुल अरोड़ा, राकेश भोरिया सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कुवि के सीनेट हॉल में देश भक्ति पर आधारित राज्य स्तरीय

कुरुक्षेत्र। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कुवि के सीनेट हॉल में देश भक्ति पर आधारित राज्य स्तरीय

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