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किसानों पर भारी गुजरी हाईवे की रात
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किसानों से बातचीत करते भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। धान की सरकारी खरीद को लेकर प्रशासन से कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद शुक्रवार की रात जीटी रोड पर किसानों ने टेंट गाड़ दिया, लेकिन आंधी और बरसात के बीच हाईवे पर किसानों के अस्थायी तंबू आंधी-बरसात में ध्वस्त हो गए। इसके बावजूद किसान हाईवे पर रात भर डटे रहे। रात गुजारने के लिए कुछ किसानों ने ट्रैक्टर ट्रालियों का तो कुछ ने दुकानों के शेडों का सहारा लिया।
विभिन्न मांगों को लेकर किसानों के जीटी रोड जाम करने की रणनीति से लेकर छह दौर की वार्ता सहित पूरे घटनाक्रम का केंद्र शाहाबाद ही रहा। जीटी रोड पर 21 घंटे के जाम के दौरान किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला प्रशासन की वार्ताएं हुईं। इससे पूर्व भी किसानों की चेतावनी पर प्रशासन ने किसान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उन्हें मनाने का प्रयास किया था। जाम से एक घंटा पूर्व भी शाहाबाद में एसडीएम स्तर की बैठक बेनतीजा रही थी।
दरअसल, जीटी रोड जाम करने की नींव 22 सितंबर शाम साढ़े पांच बजे पड़ गई थी। इस दिन किसान प्रतिनिधिमंडल की डीसी शांतनु शर्मा के साथ बैठक हुई थी। बैठक के दौरान किसान अपनी मांग पर अडिग रहे। हालांकि डीसी की ओर से उच्चाधिकारियों से बातचीत की पेशकश की गई, मगर यह मुलाकात और पेशकश सिरे नहीं चढ़ पाई थी। अगले दिन बरसात के बीच किसान शहीद उधम सिंह स्मारक पर एकत्रित हुए, जहां शाहाबाद के एसडीएम कपिल शर्मा, डीएसपी जय सिंह और एएसपी कर्ण गोयल ने किसानों बातचीत कर जाम न लगाने की पेशकश की। यह वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने जीटी जाम कर दिया।
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जाम के दौरान साढ़े तीन बजे डीसी शांतनु शर्मा और एसपी एसएस भौरिया के साथ पुलिस स्टेशन शाहाबाद में दोबारा मुलाकात हुई। यहां दोनों पक्ष के बीच समझौता नहीं हुआ। उसके बाद शाम साढ़े पांच बजे फिर दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। तब भी कोई हल नहीं निकल पाया। इन वार्ता के बाद आखिरकार डीसी और एसपी जीटी रोड पर ही किसानों से मिलने पहुंचे। किसान अपनी मांग पर अडिग रहे। अंत में शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे दोनों अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने जाम खोल दिया।
मांगों पर सहमति के बाद पंजाबी गीतों पर झूमे किसान
दिल्ली के बाद शाहाबाद आंदोलन की जीत के बाद किसान झूमते नजर आए। ट्रैक्टर-ट्रालियों पर लगे स्पीकरों से पंजाबी गीत गूंजने लगे। इस जीत की खुशी में उन्होंने जमकर भांगड़ा किया। वहीं गतिरोध समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
ऐसे चला घटनाक्रम
किसानों ने 21 सितंबर को सांकेतिक धरना दिया।
डीसी कार्यालय में 22 सितंबर को डीसी व किसान प्रतिनिधिमंडल की वार्ता।
किसान 23 सितंबर को सुबह 10 बजे शहीद उधम सिंह स्मारक पर एकत्रित हुए।
किसान नेताओं ने बैठक कर प्रशासन को एक बजे का अल्टीमेटम दिया।
शाहाबाद एसडीएम और डीएसपी के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात।
एक बजे किसान पैदल मार्च करते हुए जीटी रोड पहुंचे तथा बैरिकेड तोड़कर जाम लगा दिया।
साढ़े तीन बजे डीसी और एसपी के साथ शाहाबाद पुलिस थाने में वार्ता हुई।
साढ़े पांच बजे दोबारा प्रतिनिधिमंडल से मिले दोनों अधिकारी।
रात साढ़े आठ बजे धरनास्थल पर प्रतिनिधिमंडल से एसपी व डीसी की वार्ता।
छठे दौर की वार्ता 24 सितंबर को सुबह साढ़े आठ बजे हुई, जिसके बाद किसान जाम खोलने पर राजी हुए।
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शाहाबाद। धान की सरकारी खरीद को लेकर प्रशासन से कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद शुक्रवार की रात जीटी रोड पर किसानों ने टेंट गाड़ दिया, लेकिन आंधी और बरसात के बीच हाईवे पर किसानों के अस्थायी तंबू आंधी-बरसात में ध्वस्त हो गए। इसके बावजूद किसान हाईवे पर रात भर डटे रहे। रात गुजारने के लिए कुछ किसानों ने ट्रैक्टर ट्रालियों का तो कुछ ने दुकानों के शेडों का सहारा लिया।
विभिन्न मांगों को लेकर किसानों के जीटी रोड जाम करने की रणनीति से लेकर छह दौर की वार्ता सहित पूरे घटनाक्रम का केंद्र शाहाबाद ही रहा। जीटी रोड पर 21 घंटे के जाम के दौरान किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला प्रशासन की वार्ताएं हुईं। इससे पूर्व भी किसानों की चेतावनी पर प्रशासन ने किसान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उन्हें मनाने का प्रयास किया था। जाम से एक घंटा पूर्व भी शाहाबाद में एसडीएम स्तर की बैठक बेनतीजा रही थी।
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दरअसल, जीटी रोड जाम करने की नींव 22 सितंबर शाम साढ़े पांच बजे पड़ गई थी। इस दिन किसान प्रतिनिधिमंडल की डीसी शांतनु शर्मा के साथ बैठक हुई थी। बैठक के दौरान किसान अपनी मांग पर अडिग रहे। हालांकि डीसी की ओर से उच्चाधिकारियों से बातचीत की पेशकश की गई, मगर यह मुलाकात और पेशकश सिरे नहीं चढ़ पाई थी। अगले दिन बरसात के बीच किसान शहीद उधम सिंह स्मारक पर एकत्रित हुए, जहां शाहाबाद के एसडीएम कपिल शर्मा, डीएसपी जय सिंह और एएसपी कर्ण गोयल ने किसानों बातचीत कर जाम न लगाने की पेशकश की। यह वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने जीटी जाम कर दिया।
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जाम के दौरान साढ़े तीन बजे डीसी शांतनु शर्मा और एसपी एसएस भौरिया के साथ पुलिस स्टेशन शाहाबाद में दोबारा मुलाकात हुई। यहां दोनों पक्ष के बीच समझौता नहीं हुआ। उसके बाद शाम साढ़े पांच बजे फिर दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। तब भी कोई हल नहीं निकल पाया। इन वार्ता के बाद आखिरकार डीसी और एसपी जीटी रोड पर ही किसानों से मिलने पहुंचे। किसान अपनी मांग पर अडिग रहे। अंत में शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे दोनों अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने जाम खोल दिया।
मांगों पर सहमति के बाद पंजाबी गीतों पर झूमे किसान
दिल्ली के बाद शाहाबाद आंदोलन की जीत के बाद किसान झूमते नजर आए। ट्रैक्टर-ट्रालियों पर लगे स्पीकरों से पंजाबी गीत गूंजने लगे। इस जीत की खुशी में उन्होंने जमकर भांगड़ा किया। वहीं गतिरोध समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
ऐसे चला घटनाक्रम
किसानों ने 21 सितंबर को सांकेतिक धरना दिया।
डीसी कार्यालय में 22 सितंबर को डीसी व किसान प्रतिनिधिमंडल की वार्ता।
किसान 23 सितंबर को सुबह 10 बजे शहीद उधम सिंह स्मारक पर एकत्रित हुए।
किसान नेताओं ने बैठक कर प्रशासन को एक बजे का अल्टीमेटम दिया।
शाहाबाद एसडीएम और डीएसपी के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात।
एक बजे किसान पैदल मार्च करते हुए जीटी रोड पहुंचे तथा बैरिकेड तोड़कर जाम लगा दिया।
साढ़े तीन बजे डीसी और एसपी के साथ शाहाबाद पुलिस थाने में वार्ता हुई।
साढ़े पांच बजे दोबारा प्रतिनिधिमंडल से मिले दोनों अधिकारी।
रात साढ़े आठ बजे धरनास्थल पर प्रतिनिधिमंडल से एसपी व डीसी की वार्ता।
छठे दौर की वार्ता 24 सितंबर को सुबह साढ़े आठ बजे हुई, जिसके बाद किसान जाम खोलने पर राजी हुए।