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सड़क किनारे हाईटेंशन तारों के सहारे झूल रहे पेड़
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 12 May 2014 12:16 AM IST
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पिपली-यमुनानगर स्टेट हाईवे पर लगे कई पेड़ बिजली निगम की हाईटेंशन तारों के सहारे झूल रहे हैं। ये पेड़ कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। पीडब्ल्यूडी, वन विभाग और बिजली निगम की ये लापरवाही स्टेट हाईवे से गुजरने वाले लोगों के जीवन से खिलवाड़ करती नजर आ रही है।
बहरहाल यहां से गुजरने वाले राहगीर गंतव्य की ओर बढ़ते समय सुरक्षित सड़क पार करने के बाद भगवान का शुक्रिया करते हुए अधिकारियों को कोसना कतई नहीं भूलते।
यहां बता दें कि छह माह पहले आए तेज अंधड़ में पिपली-यमुनानगर स्टेट हाईवे के किनारे खड़े कई पेड़ धराशाई हो गए थे। इनमें से कई पेड़ ऐेसे हैं, जो कभी भी बिजली की हाईटेंशन तारों पर गिरने के बाद उन्हें तोड़ते हुए स्टेट हाईवे पर बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं।
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लोगों की सुरक्षा से बेपरवाह प्रशासनिक और पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, बिजली निगम के अधिकारी राहगीरों की सुरक्षा-व्यवस्था को नजरअंदाज कर आंखें मूंदे बैठे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सड़क किनारे अटके पेड़ों के बिल्कुल सामने गांव मथाना का 66 केवी का बिजली निगम का पावर हाउस भी है, इसके बावजूद निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, क्योंकि पेड़ों के गिरने से न केवल बिजली निगम की तारें डैमेज होगी, बल्कि बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती हैं।
हैरत की बात ये है कि जहां पिपली-यमुनानगर स्टेट हाईवे पर हवा में झूलते वन विभाग के पेड़ राहगीरों के जीवन पर काल बन कर मंडरा रहे हैं, वहीं जिला के कुछेक अधिकारी तत्काल कार्रवाई कराने की बजाए कष्ट निवारण समिति की बैठक का इंतजार करने में लगे हैं। जब स्टेट हाइवे के किनारे टूटे हुए वृक्षों के बारे में पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के कार्यकारी अभियंता केके नैन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सड़क किनारे खड़े पेड़ों का ध्यान रखने की जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि वन विभाग की है।
तब बिजली की तार गिरने से हुई थी कई मौतें
जुलाई 2001 में कुरुक्षेत्र जिला बिजली की तारें गिरने का दर्द झेल चुका है। तब एक बस के ऊपर बिजली तार गिरने से आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जन भर से ज्यादा लोग जोरदार करेंट लगने के कारण बुरी तरह झुलस गए थे। कुरुक्षेत्र के गांव दीवाना के निकट हुए इस दर्दनाक हादसे से भी सबक न लेते हुए अधिकारियों की लापरवाही जारी है।
वर्जन
आचार संहिता समाप्त होते ही वे उपायुक्त के साथ होने वाली कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक में स्टेट हाइवे किनारे टूटे वृक्षों की समस्या को अधिकारियों के समक्ष रखेंगे और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही समस्या का समाधान करवाएंगे।
लेखराज आरटीओ, कुरुक्षेत्र
वर्जन
जल्द ही निरीक्षण करके टूटे हुए वृक्षों की फेहरिस्त तैयार करेंगे और लॉगिंग विंग को आगामी कार्रवाई के लिए सूची सौंपी जाएगी। सैनी के मुताबिक वृक्षों के नजदीक बिजली की तारें होेने की वजह से कार्रवाई में कुछ देरी हो सकती है। यदि बिजली निगम उन्हें मदद करें, तो जल्द ही कार्रवाई कर दी जाएगी।
सोहन लाल सैनी, वन मंडल अधिकारी
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बहरहाल यहां से गुजरने वाले राहगीर गंतव्य की ओर बढ़ते समय सुरक्षित सड़क पार करने के बाद भगवान का शुक्रिया करते हुए अधिकारियों को कोसना कतई नहीं भूलते।
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यहां बता दें कि छह माह पहले आए तेज अंधड़ में पिपली-यमुनानगर स्टेट हाईवे के किनारे खड़े कई पेड़ धराशाई हो गए थे। इनमें से कई पेड़ ऐेसे हैं, जो कभी भी बिजली की हाईटेंशन तारों पर गिरने के बाद उन्हें तोड़ते हुए स्टेट हाईवे पर बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं।
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लोगों की सुरक्षा से बेपरवाह प्रशासनिक और पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, बिजली निगम के अधिकारी राहगीरों की सुरक्षा-व्यवस्था को नजरअंदाज कर आंखें मूंदे बैठे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सड़क किनारे अटके पेड़ों के बिल्कुल सामने गांव मथाना का 66 केवी का बिजली निगम का पावर हाउस भी है, इसके बावजूद निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, क्योंकि पेड़ों के गिरने से न केवल बिजली निगम की तारें डैमेज होगी, बल्कि बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती हैं।
हैरत की बात ये है कि जहां पिपली-यमुनानगर स्टेट हाईवे पर हवा में झूलते वन विभाग के पेड़ राहगीरों के जीवन पर काल बन कर मंडरा रहे हैं, वहीं जिला के कुछेक अधिकारी तत्काल कार्रवाई कराने की बजाए कष्ट निवारण समिति की बैठक का इंतजार करने में लगे हैं। जब स्टेट हाइवे के किनारे टूटे हुए वृक्षों के बारे में पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के कार्यकारी अभियंता केके नैन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सड़क किनारे खड़े पेड़ों का ध्यान रखने की जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि वन विभाग की है।
तब बिजली की तार गिरने से हुई थी कई मौतें
जुलाई 2001 में कुरुक्षेत्र जिला बिजली की तारें गिरने का दर्द झेल चुका है। तब एक बस के ऊपर बिजली तार गिरने से आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जन भर से ज्यादा लोग जोरदार करेंट लगने के कारण बुरी तरह झुलस गए थे। कुरुक्षेत्र के गांव दीवाना के निकट हुए इस दर्दनाक हादसे से भी सबक न लेते हुए अधिकारियों की लापरवाही जारी है।
वर्जन
आचार संहिता समाप्त होते ही वे उपायुक्त के साथ होने वाली कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक में स्टेट हाइवे किनारे टूटे वृक्षों की समस्या को अधिकारियों के समक्ष रखेंगे और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही समस्या का समाधान करवाएंगे।
लेखराज आरटीओ, कुरुक्षेत्र
वर्जन
जल्द ही निरीक्षण करके टूटे हुए वृक्षों की फेहरिस्त तैयार करेंगे और लॉगिंग विंग को आगामी कार्रवाई के लिए सूची सौंपी जाएगी। सैनी के मुताबिक वृक्षों के नजदीक बिजली की तारें होेने की वजह से कार्रवाई में कुछ देरी हो सकती है। यदि बिजली निगम उन्हें मदद करें, तो जल्द ही कार्रवाई कर दी जाएगी।
सोहन लाल सैनी, वन मंडल अधिकारी