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यहां भगवान श्रीराम ने किया था पिता दशरथ का श्राद्ध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2022 01:57 AM IST
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Here Lord Shri Ram performed Shradh of father Dasharatha, Kurukshetra
सरस्वती के पूर्वी घाट पर स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में स्थापित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, ? - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। पिहोवा का पूर्व वाहिनी सरस्वती प्राची तीर्थ भगवान श्री राम के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना का साक्षी है। यहां श्रीराम ने खिचड़ी के साथ अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था। राज्याभिषेक के बाद श्रीराम ने यह परंपरा निभाई थी। इस तीर्थ में रघुकुल के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ का आश्रम भी था। इस स्थान पर वशिष्ठेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर भी स्थापित है। इससे कुछ आगे ही सरस्वती नदी के पूर्वी घाट पर श्री रघुनाथ का प्राचीन मंदिर है। यहां श्री राम अपनी पत्नी सीता, भ्राता लक्ष्मण व हनुमान जी के साथ विराजमान है।
श्री रघुनाथ जी का यह ऐतिहासिक मंदिर 300 साल से ज्यादा पुराना है। हालांकि अब इस मंदिर का नवीनीकरण हो गया है। मंदिर की व्यवस्था तीर्थ पुरोहित राजेश व रजनीश टिंडवान परिवार देख रहा है। यह परिवार जम्मू के अंतिम शासक हरि सिंह के तीर्थ पुरोहित भी है। इस मंदिर का निर्माण जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह के पूर्वजों ने ही कराया था।
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श्री रघुनाथ का ऐसा एक मंदिर जम्मू एवं कश्मीर में भी विद्यमान है। उसी मंदिर की तर्ज पर सरस्वती पूर्वी घाट पर रघुनाथ का मंदिर बनाया गया। मंदिर में भगवान श्रीराम की मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है। यह मूर्ति मंदिर निर्माण के समय की है, जबकि सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां सफेद पत्थर की हैं। इन मूर्तियों को बाद में स्थापित किया गया है। हालांकि मंदिर में पहले सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां भी काले पत्थर की थी।
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मंदिर के व्यवस्थापक रजनीश टिंडवान ने बताया कि मंदिर 300 साल से ज्यादा पुराना है। मंदिर के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मंदिर का निर्माण जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह के पूर्वजों ने कराया था। हरि सिंह के पूर्वजों ने अपने तीर्थ पुरोहितों (उनके पूर्वजों) को मंदिर की देखरेख का जिम्मा दिया था। उस समय से उनका परिवार मंदिर की देखभाल कर रहा है। मंदिर का नवीनीकरण कराया गया है। मंदिर में हर साल रामनवमी पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। रामनवमी पर मंदिर में सुंदरकांड पाठ किया जाएगा। पाठ के बाद भंडारा होगा। वहीं श्री हनुमान जन्मोत्सव पर भी मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।

भगवान श्रीराम ने किया प्राची में पिंडदान व श्राद्ध
सरस्वती प्राची वशिष्ठ तीर्थ पर भगवान श्री राम ने अपने पिता दशरथ के निमित्त पिंडदान किया था। इतिहासकार विनोद पचौली ने बताया कि पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम राज्याभिषेक के बाद पृथुदक प्राची तीर्थ पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने पिता दशरथ के लिए पिंडदान किया था। इस स्थान पर उन्होंने खिचड़ी के साथ दशरथ का श्राद्ध भी किया था।
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