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Kurukshetra News: स्वास्थ्य चुनौतियों पर किया जाएगा मंथन
Sun, 16 Nov 2025 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:48 AM IST
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कुरुक्षेत्र। बैठक में दिशा-निर्देश देते कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान। स्वयं
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान की ओर से 2 दिसंबर को भगवद्गीता का पराडाइम : स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए समग्र दृष्टिकोण विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें स्वामी ज्ञानानंद शिरकत करेंगे।
संगोष्ठी में डीएमआईएचईआर (नागपुर) के प्रो-चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) वेद प्रकाश मिश्रा और सर गंगा राम अस्पताल नई दिल्ली के सीनियर सर्जन प्रोफेसर (डॉ.) बीबी अग्रवाल शिरकत करेंगे। देशभर के विभिन्न आयुर्वेदिक संस्थानों से 500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे।
कार्यक्रम की तैयारियों के लिए कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने शनिवार को बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश हदए। संगोष्ठी के दौरान भगवद्गीता के कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग और ध्यान योग अध्यायों को स्वास्थ्य प्रबंधन के आयुर्वेदिक एवं आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण से जोड़ा जाएगा। कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय तनाव और असंतुलित जीवनशैली का दौर है। ऐसे में भगवद्गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शिका है। आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के सुचारू संचालन के लिए 15 समितियों का गठन किया गया है और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
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संगोष्ठी में डीएमआईएचईआर (नागपुर) के प्रो-चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) वेद प्रकाश मिश्रा और सर गंगा राम अस्पताल नई दिल्ली के सीनियर सर्जन प्रोफेसर (डॉ.) बीबी अग्रवाल शिरकत करेंगे। देशभर के विभिन्न आयुर्वेदिक संस्थानों से 500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे।
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कार्यक्रम की तैयारियों के लिए कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने शनिवार को बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश हदए। संगोष्ठी के दौरान भगवद्गीता के कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग और ध्यान योग अध्यायों को स्वास्थ्य प्रबंधन के आयुर्वेदिक एवं आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण से जोड़ा जाएगा। कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय तनाव और असंतुलित जीवनशैली का दौर है। ऐसे में भगवद्गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शिका है। आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के सुचारू संचालन के लिए 15 समितियों का गठन किया गया है और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
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