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गुरुकुल में शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का संगम : गुलाब चंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Oct 2025 01:36 AM IST
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gurukul is a confluence of education and culture
कुरुक्षेत्र। मलखंब का प्रदर्शन दिखाते ब्रह्मचारी। संवाद 
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के दो दिवसीय 113वें वार्षिक महोत्सव का आयोजन किया गया जिसका समापन वीरवार को हुआ। मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य मार्च-पास्ट से की गई। इसके बाद ब्रह्मचारियों ने एक से बढ़कर एक शारीरिक प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक प्रस्तुति ने विद्यार्थियों के अनुशासन, परिश्रम और गुरुकुल की उत्कृष्ट प्रशिक्षण परंपरा का परिचय दिया।
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गुरुकुल के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार ने सत्र 2024-25 की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 54 विद्यार्थियों ने एनडीए की प्रारंभिक परीक्षा पास की जिनमें से 28 ने मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इसके अलावा कई विद्यार्थियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया। राज्यपाल कटारिया ने कहा कि आचार्य देवव्रत ने सही मायनों में शिक्षा को संस्कार और संस्कृति से जोड़ा है। यहां न केवल युवा निर्माण हो रहा है बल्कि सशक्त भारत का निर्माण भी हो रहा है। गुरुकुल के ब्रह्मचारियों की ओर से प्रस्तुत मल्लखंभ, घुड़सवारी, योग, रस्सी चढ़ाई, लाठी नृत्य (लजियम) और जिमनास्टिक के प्रदर्शन को देखकर कहा कि ये दृश्य हमें हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति की याद दिलाते हैं।
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उन्होंने कहा कि आज ऐसी कलाएं दूसरे शिक्षण संस्थानों में विरल हैं। मल्लखंभ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास का अद्भुत माध्यम है जो उनमें आत्मविश्वास और संतुलन पैदा करता है। योग को उन्होंने भारत की आत्मा बताते हुए कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं शिक्षा के साथ संस्कारों का अमृत भी बांट रही हैं। उन्हें गर्व है कि वे राजस्थान से आते हैं, जहां महर्षि दयानंद सरस्वती ने अमर ग्रंथ की रचना की थी। उन्होंने बताया कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद के शिष्य स्वामी श्रद्धानंद ने ही इस गुरुकुल की स्थापना की थी, जो आज देश का अग्रणी शिक्षण संस्था बन चुका है। महर्षि दयानंद सरस्वती का शिक्षा क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है, जिन्होंने भारत में वैदिक शिक्षा की नींव रखी। इस मौके पर विद्यार्थी, अभिभावक और समाज के लोग मौजूद रहे।
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प्राकृतिक खेती मॉडल को सराहा
राज्यपाल कटारिया ने आचार्य देवव्रत की ओर से शुरू की गई प्राकृतिक खेती मॉडल की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मॉडल से प्रभावित होकर इसे पूरे देश में लागू कर चुके हैं। आज जब रासायनिक खादों और कीटनाशकों से हमारा भोजन दूषित हो चुका है, तो प्राकृतिक खेती ही स्वस्थ भारत की कुंजी है।

लक्ष्य केंद्रित शिक्षा से ही बनता है आदर्श नागरिक
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों को केवल अक्षर ज्ञान देना नहीं बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और वैदिक संस्कारों से पोषित करना है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल में विद्यार्थियों के लिए कॉम्पिटेटिव विंग की अलग फैकल्टी बनाई गई है, ताकि उन्हें समय पर सटीक मार्गदर्शन मिले और वे अपने कॅरिअर में सफलता हासिल करें।

कुरुक्षेत्र। मलखंब का प्रदर्शन दिखाते ब्रह्मचारी। संवाद 

कुरुक्षेत्र। मलखंब का प्रदर्शन दिखाते ब्रह्मचारी। संवाद 

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