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Kurukshetra News: गुरु ही दूर करता है अज्ञानता का अंधकार
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कुरुक्षेत्र। जिसे मन से गुरु मान लिया जाए और अनजाने में जिसने कोई भी गुर आपको सिखाया, जिससे आप जीवन में प्रकाश की ओर बढ़ने लगे तो वो गुरु ही आपके लिए सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय हो जाता है। इसलिए जाने अनजाने में कभी भी उस गुरु का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु का अपमान करने से आपकी कीर्ति लक्ष्मी आपसे रूठ जाती हैं।
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फोटो 47
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गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक के अनुसार आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता
है। इस दिन शिष्य गुरुओं का पूजन करते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। गुरु पूर्णिमा पर कई शुभ योग इस बार बन रहे हैं, जिससे इस दिन का काफी महत्व बढ़
गया है। गुरु पूर्णिमा तीन जुलाई दिन सोमवार को मनाई जाएगी। हर वर्ष गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती हैं।
पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं और गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। गुरु ही ऐसा माध्यम है जो कि अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले
जाते हैं। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया हैं। क्योंकि गुरु ही भगवान के बारे में बताते हैं और इनके बिना ब्रह्मज्ञान और
मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है। गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पांय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय। कबीर दास का यह दोहा गुरु के प्रति सम्मान को व्यक्त करते हुए है। गुरु पूर्णिमा गुरु व शिष्य की परंपरा के लिए विशेष होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के अलावा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय की पूजा और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती हैं। वहीं गुरु की पूजा करने से कुंडली में गुरु दोष समाप्त होता है।
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गुरु पूर्णिमा तिथि
आषाढ़ मास की पूर्णिमा का प्रारंभ - दो जुलाई रात आठ बजकर 21 मिनट पर
आषाढ़ मास की पूर्णिमा का समापन -तीन जुलाई शाम पांच बजकर आठ मिनट पर
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गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक के अनुसार आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता
है। इस दिन शिष्य गुरुओं का पूजन करते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। गुरु पूर्णिमा पर कई शुभ योग इस बार बन रहे हैं, जिससे इस दिन का काफी महत्व बढ़
गया है। गुरु पूर्णिमा तीन जुलाई दिन सोमवार को मनाई जाएगी। हर वर्ष गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती हैं।
पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं और गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। गुरु ही ऐसा माध्यम है जो कि अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले
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जाते हैं। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया हैं। क्योंकि गुरु ही भगवान के बारे में बताते हैं और इनके बिना ब्रह्मज्ञान और
मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है। गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पांय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय। कबीर दास का यह दोहा गुरु के प्रति सम्मान को व्यक्त करते हुए है। गुरु पूर्णिमा गुरु व शिष्य की परंपरा के लिए विशेष होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के अलावा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय की पूजा और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती हैं। वहीं गुरु की पूजा करने से कुंडली में गुरु दोष समाप्त होता है।
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गुरु पूर्णिमा तिथि
आषाढ़ मास की पूर्णिमा का प्रारंभ - दो जुलाई रात आठ बजकर 21 मिनट पर
आषाढ़ मास की पूर्णिमा का समापन -तीन जुलाई शाम पांच बजकर आठ मिनट पर