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Kurukshetra News: अतिथि अध्यापकों ने की नियमितीकरण की मांग
Wed, 22 Jul 2026 06:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:05 AM IST
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कुरुक्षेत्र। लघु सचिवालय में नियमितीकरण की मांग को लेकर चल रहे अतिथि अध्यापकों के अनिश्चितकालीन पड़ाव को मंगलवार को किसान संगठनों का समर्थन मिला। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान धरनास्थल पर पहुंचे और अतिथि अध्यापकों की मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता कृष्ण उचाना ने की, जबकि जींद जिले के अतिथि अध्यापक 24 घंटे के पड़ाव पर बैठे।
सभा को संबोधित करते हुए मास्टर बलबीर सिंह, कृष्ण कुमार उचाना, अनिल वशिष्ठ, अनिल सैनी और जोरा सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने सरकार बनने पर पहली कलम से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी घोषणा के अनुरूप अतिथि अध्यापकों को नियमित करना चाहिए।
वक्ताओं ने दावा किया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल और 27 मई के अपने आदेशों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों को नियमित मानते हुए संबंधित लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के 16 अप्रैल 2026 के फैसले का भी हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति को वैध माना गया है।
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उन्होंने सरकार से मांग की कि न्यायालयों के निर्णयों और वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के अनुरूप अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए तथा पात्र अध्यापकों को नियमानुसार मिलने वाले सभी लाभ उपलब्ध कराए जाएं।
धरने में मास्टर चांद राम, राजकुमार कालीरमन, रमेश कुमार सहित अन्य अतिथि अध्यापक और किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे। संवाद
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सभा को संबोधित करते हुए मास्टर बलबीर सिंह, कृष्ण कुमार उचाना, अनिल वशिष्ठ, अनिल सैनी और जोरा सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने सरकार बनने पर पहली कलम से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी घोषणा के अनुरूप अतिथि अध्यापकों को नियमित करना चाहिए।
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वक्ताओं ने दावा किया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल और 27 मई के अपने आदेशों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों को नियमित मानते हुए संबंधित लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के 16 अप्रैल 2026 के फैसले का भी हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति को वैध माना गया है।
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उन्होंने सरकार से मांग की कि न्यायालयों के निर्णयों और वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के अनुरूप अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए तथा पात्र अध्यापकों को नियमानुसार मिलने वाले सभी लाभ उपलब्ध कराए जाएं।
धरने में मास्टर चांद राम, राजकुमार कालीरमन, रमेश कुमार सहित अन्य अतिथि अध्यापक और किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे। संवाद