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Kurukshetra News: गोल्ड मेडलिस्ट बोले- अपने साथ परिवार के सपने को भी किया पूरा
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कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थी न केवल अपनी मेहनत के दम पर चमके, बल्कि अपने छात्रों, सहयोगियों और परिवार को मेडल से प्रेरित करने का संकल्प लेकर मंच पर खड़े हुए। सभी गोल्ड मेडलिस्टों ने एक स्वर में कहा कि हमने अपने साथ परिवारजनों के सपनों को भी पूरा किया है।
मूर्तिकार व शिक्षक पलक बोलीं- इस मेडल से छात्रों को प्रेरित करूंगी
मूर्तिकार व शिक्षक कैथल निवासी पलक ने ललित कला विभाग में संचालित मूर्तिकला स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी लगता नहीं था कि वह गोल्ड मेडलिस्ट बनेंगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने 12वीं तक मेडिकल की पढ़ाई की है। उन्हें हमेशा से कला से प्रेम था। इसलिए उनके पिता ने उनसे बिना पूछे उनका दाखिला ललित कला में करवा दिया। उन्होंने स्नातकोत्तर करते हुए अपनी कला पर खूब काम किया था और मन लगाकर पढ़ाई की थी जिसका फल उन्हें गोल्ड मेडल के रूप में मिला है। अब वह एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं और बच्चों को ललित कला सिखाती हैं।
सहयोगियों को मेडल दिखा प्रोत्साहित करूंगी : निकुंज
बीएससी प्रिंटिग एंड पैकेजिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली निकुंज ने कहा कि वह एक पैकेजिंग कंपनी में सीनियर सेल्स एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरे सहयोगी अक्सर हार मान लेते हैं। आज यह मेडल लेकर मैं उन्हें दिखाऊंगी कि निरंतर प्रयास से कुछ भी असंभव नहीं। वे भी अपनी क्षमता पहचानें और आगे बढ़ें।
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रंगों से खेलते-खेलते चूम लिया सोना : निकिता
ललित कला में बीए करने वाली निकिता ने अपनी कक्षा में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि उनके लिए यह गोल्ड लेना एक सपने जैसा है। उन्होंने कहा कि वह किताबों पर कम ध्यान देती थी और अपनी कला पर ज्यादा। उन्होंने कहा कि वह हमेशा रंगों, ब्रश और कैनवास के साथ खेलती रहती थी। कभी नहीं सोचा था कि यह शौक मुझे गोल्ड मेडल तक ले जाएगा।
बेटे को डिग्री लेता देखा तो अपना समय आया याद
मल्टी मीडिया में डिग्री लेकर जब छात्र हर्षित अपने पिता मोहन लाल के पास गए तो वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी करीब तीन दशक पहले इसी मंच से डिग्री प्राप्त की थी। बेटे को देख लग रहा है कि मैं खुद दोबारा डिग्री लेकर नीचे उतर रहा हूं।
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मूर्तिकार व शिक्षक पलक बोलीं- इस मेडल से छात्रों को प्रेरित करूंगी
मूर्तिकार व शिक्षक कैथल निवासी पलक ने ललित कला विभाग में संचालित मूर्तिकला स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी लगता नहीं था कि वह गोल्ड मेडलिस्ट बनेंगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने 12वीं तक मेडिकल की पढ़ाई की है। उन्हें हमेशा से कला से प्रेम था। इसलिए उनके पिता ने उनसे बिना पूछे उनका दाखिला ललित कला में करवा दिया। उन्होंने स्नातकोत्तर करते हुए अपनी कला पर खूब काम किया था और मन लगाकर पढ़ाई की थी जिसका फल उन्हें गोल्ड मेडल के रूप में मिला है। अब वह एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं और बच्चों को ललित कला सिखाती हैं।
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सहयोगियों को मेडल दिखा प्रोत्साहित करूंगी : निकुंज
बीएससी प्रिंटिग एंड पैकेजिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली निकुंज ने कहा कि वह एक पैकेजिंग कंपनी में सीनियर सेल्स एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरे सहयोगी अक्सर हार मान लेते हैं। आज यह मेडल लेकर मैं उन्हें दिखाऊंगी कि निरंतर प्रयास से कुछ भी असंभव नहीं। वे भी अपनी क्षमता पहचानें और आगे बढ़ें।
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रंगों से खेलते-खेलते चूम लिया सोना : निकिता
ललित कला में बीए करने वाली निकिता ने अपनी कक्षा में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि उनके लिए यह गोल्ड लेना एक सपने जैसा है। उन्होंने कहा कि वह किताबों पर कम ध्यान देती थी और अपनी कला पर ज्यादा। उन्होंने कहा कि वह हमेशा रंगों, ब्रश और कैनवास के साथ खेलती रहती थी। कभी नहीं सोचा था कि यह शौक मुझे गोल्ड मेडल तक ले जाएगा।
बेटे को डिग्री लेता देखा तो अपना समय आया याद
मल्टी मीडिया में डिग्री लेकर जब छात्र हर्षित अपने पिता मोहन लाल के पास गए तो वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी करीब तीन दशक पहले इसी मंच से डिग्री प्राप्त की थी। बेटे को देख लग रहा है कि मैं खुद दोबारा डिग्री लेकर नीचे उतर रहा हूं।

कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद

कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद

कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद

कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद

कुरुक्षेत्र। गोल्ड मेडलिस्ट पलक। संवाद