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Kurukshetra News: तारों की छाया में मेहनत करने वालों का भगवान भी सहारा बनता है...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Nov 2023 01:56 AM IST
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God also becomes a support for those who work hard under the shadow of the stars...
कुरुक्षेत्र। तारों की छाया में मेहनत करने वालों का भगवान भी सहारा बनता है। मेहनत के बल पर कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। पिता द्वारा दी गई यह सीख जेहन में उतरी तो हौसले को उड़ान मिल पाई। गांव से लेकर हर स्तर पर अनेक बाधाएं पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। एक पिता की सीख कैसे जीवन बदल सकती है, यह करीब से जाना है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय कुश्ती पहलवान बबीता फौगाट का।
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मंगलवार को भाजपा महिला मोर्चा की ओर से महिला खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में बतौर विशेष अतिथि पहुंची बबीता फौगाट ने खिलाड़ियों में भी जोश भरा तो वहीं चर्चा करते हुए कहा कि वह अपने पिता की दी सीख को जिंदगी भर नहीं भुला सकती। एक सीख ने पूरे हालात से लड़ने का जज्बा पैदा किया तो हर बाधा भी पार कर सकी। ऐसे ही हर माता-पिता को अपने बच्चों को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
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उनका कहना था कि सात साल की उम्र में ही उन्होंने खेलना शुरू कर दिया था। कॅरिअर की शुरुआत में जीवन बहुत कठिन था, क्योंकि वह एक ऐसे परिवेश से थी, जहां एक महिला के लिए कुश्ती जैसे खेल के बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं था और उनके पिता महाबीर सिंह फौगाट को भी लोगों ने कुश्ती में उतारने पर बहुत ताने दिए थे, लेकिन लोगों की बातों को नजरअंदाज कर उन्होंने हमारी काबलियत को निखारने का काम किया। वे हमें हर रोज कई-कई घंटों तक सुबह तारों की छाया में अभ्यास करवाया करते थे। वे कहते थे कि तारों की छाया में मेहनत करने वालों का भगवान भी सहारा बनता है। बबीता का कहना है कि उनके पिता ने हर कदम पर पिता के साथ-साथ गुरु के तौर पर उनका मार्गदर्शन किया है। उनका कहना है कि पिता ने नाम रखा बबीता फौगाट, लेकिन कुश्ती में अपने बेहतर प्रदर्शन के कारण आज विश्व में रेसलर बबीता फौगाट के नाम से जाना जाता है।
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उन्होंने अपने पिता से गुरु के तौर पर हर वो सीख ली, जिससे वे किसी भी प्रकार की स्थिति का खुद ही सामना कर सकें। उनका कहना है कि कुश्ती के मैदान में उनके पिता केवल कोच के तौर पर ही उनसे बात करते थे और इस दौरान यदि हमसे कोई गलती होती तो वे उन्हें धमका देते थे, जिसका नतीजा है कि उनकी बेटियां दंगल गर्ल के नाम से पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। पिता के तौर पर भी उन्होंने परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी और कोच के तौर पर उन्होंने कुश्ती के बारीकी गुर भी सिखाए हैं।
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