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कूड़ा डंपिंग स्टेशन बनी सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट, कई जगह हुए अवैध कब्जे
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कुरुक्षेत्र। ग्रीन बेल्ट में लगा गंदगी का ढेर।
- फोटो : Kurukshetra
सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट की हालत बेहद खस्ता हो गई है। बेल्ट इस समय कूड़ा डंपिंग स्टेशन का रूप ले चुकी है। बात करें सेक्टर-7 या आठ की तो यहां बेल्ट से हरियाली बिल्कुल साफ है और दूर तक करीब एक किलोमीटर के एरिया में बेल्ट के अंदर कूड़ा फैला हुआ है। इसके अलावा बाकी कसर लोगों ने बेल्ट पर कब्जे कर निकाल दी है। हर कोई ग्रीन बेल्ट की जगह का अपने हिसाब से प्रयोग कर रहा है। कई लोगों ने तो पक्के निर्माण तक कर लिए हैं और इस जगह को स्टैंड के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। बाकायदा, ग्रिल या तार लगा कर जगह पर कब्जा कर लिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि फरवरी माह में उपायुक्त द्वारा अधिकारियों को ग्रीन बेल्ट सुधारने के आदेश दिए गए थे और ऐसा न करने पर कार्रवाई की बात भी कही थी, लेकिन उनके आदेश को बीते नौ माह हो चुके हैं, लेकिन आज तक न तो किसी अधिकारी ने इन ग्रीन बेल्ट की सुध ली है और न ही किसी के खिलाफ काई कार्रवाई हो पाई है। इस अनदेखी के कारण मौजूदा हालात बेहद खराब हो चुके हैं।
सिक्सलेन के लिए नष्ट की ग्रीन बेल्ट
एक तरफ तो जहां सरकार और प्रशासन पर्यावरण के प्रति लगातार लोगों को जागरूक करने पर लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पिपली-थर्डगेट सिक्सलेन निर्माण के लिए अग्रसेन चौक से लेकर पिपली तक करीब दो किलोमीटर के एरिया की ग्रीन बेल्ट को नष्ट कर दिया गया। सिक्सलेन निर्माण में सड़क के चौड़ीकरण कार्य में ऐसा होना ही थी, लेकिन प्रशासन ने इस बेल्ट के खत्म होने की भरपाई के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया। इस नष्ट हुई ग्रीन बेल्ट को तो क्या कहीं दूसरी जगह स्थापित किया जाता, यहां तो सेक्टर की पुरानी ग्रीन बेल्ट की तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिस वजह से सेक्टरों में प्रदूषण लेवल लगातार बढ़ रहा है।
बेल्ट में बनाए पार्क और पार्किंग एरिया
बेल्ट पर सेक्टर वासियों ने कई जगह पार्क बना रखे हैं और उनके आसपास तार लगाकर रास्ते बंद किए हुए हैं। इसके साथ ही कई जगह पार्किंग के लिए जगह पक्की कर ली है। ग्रीन बेल्ट की इस जगह को लोग बेखौफ निजी तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं और अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं।
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सेक्टरों में पहले ही पेड़ पौधों की कमी अब ग्रीन बेल्ट की खत्म : शिवांग
सेक्टर तीन वासी शिवांग दत्त शर्मा ने कहा कि सेक्टरों में गांव या कॉलोनी के मुकाबले पहले ही पेड़ पौधे कम होते हैं। इसलिए यहां ग्रीन बेल्ट बनाई जाती है, ताकि सेक्टर हरा भरा दिखे और बेल्ट में लगे पेड़ पौधों से पर्यावरण शुद्ध हो सके, लेकिन सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट तो बिलकुल खत्म हो चुकी है। यह सब अधिकारियों की अनदेखी के कारण हुआ है। जिन्होंने ग्रीन बेल्ट पर कब्जे किए हुए हैं उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चहिए।
बेल्ट से पेड़ काटने वालों को डाटा तैयार, करेंगे शिकायत : भारद्वाज
ग्रीन अर्थ संस्था संचालक नरेश भारद्वाज ने कहा कि छाया और साफ हवा सबको चाहिए, लेकिन अपने घर के आगे पौधा कोई लगाना नहीं चाहता। वन विभाग पेड़ लगाता रहता है और लोग उसे काट देते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती। यह एक बहुत बड़ी लापरवाही है। सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट गंदगी और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुकी है, जिस वजह से यहां प्रदूषण लेवल भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिन-जिन लोगों ने सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट से पेड़ काटे हैं और जिन्होंने इस पर कब्जा किया हुआ है। उन सबका डाटा संस्था द्वार तैयार कर लिया गया है, जल्द ही इस संबंध में एक शिकायत उपायुक्त को सौंपी जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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सिक्सलेन के लिए नष्ट की ग्रीन बेल्ट
एक तरफ तो जहां सरकार और प्रशासन पर्यावरण के प्रति लगातार लोगों को जागरूक करने पर लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पिपली-थर्डगेट सिक्सलेन निर्माण के लिए अग्रसेन चौक से लेकर पिपली तक करीब दो किलोमीटर के एरिया की ग्रीन बेल्ट को नष्ट कर दिया गया। सिक्सलेन निर्माण में सड़क के चौड़ीकरण कार्य में ऐसा होना ही थी, लेकिन प्रशासन ने इस बेल्ट के खत्म होने की भरपाई के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया। इस नष्ट हुई ग्रीन बेल्ट को तो क्या कहीं दूसरी जगह स्थापित किया जाता, यहां तो सेक्टर की पुरानी ग्रीन बेल्ट की तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिस वजह से सेक्टरों में प्रदूषण लेवल लगातार बढ़ रहा है।
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बेल्ट में बनाए पार्क और पार्किंग एरिया
बेल्ट पर सेक्टर वासियों ने कई जगह पार्क बना रखे हैं और उनके आसपास तार लगाकर रास्ते बंद किए हुए हैं। इसके साथ ही कई जगह पार्किंग के लिए जगह पक्की कर ली है। ग्रीन बेल्ट की इस जगह को लोग बेखौफ निजी तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं और अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं।
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सेक्टरों में पहले ही पेड़ पौधों की कमी अब ग्रीन बेल्ट की खत्म : शिवांग
सेक्टर तीन वासी शिवांग दत्त शर्मा ने कहा कि सेक्टरों में गांव या कॉलोनी के मुकाबले पहले ही पेड़ पौधे कम होते हैं। इसलिए यहां ग्रीन बेल्ट बनाई जाती है, ताकि सेक्टर हरा भरा दिखे और बेल्ट में लगे पेड़ पौधों से पर्यावरण शुद्ध हो सके, लेकिन सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट तो बिलकुल खत्म हो चुकी है। यह सब अधिकारियों की अनदेखी के कारण हुआ है। जिन्होंने ग्रीन बेल्ट पर कब्जे किए हुए हैं उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चहिए।
बेल्ट से पेड़ काटने वालों को डाटा तैयार, करेंगे शिकायत : भारद्वाज
ग्रीन अर्थ संस्था संचालक नरेश भारद्वाज ने कहा कि छाया और साफ हवा सबको चाहिए, लेकिन अपने घर के आगे पौधा कोई लगाना नहीं चाहता। वन विभाग पेड़ लगाता रहता है और लोग उसे काट देते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती। यह एक बहुत बड़ी लापरवाही है। सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट गंदगी और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुकी है, जिस वजह से यहां प्रदूषण लेवल भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिन-जिन लोगों ने सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट से पेड़ काटे हैं और जिन्होंने इस पर कब्जा किया हुआ है। उन सबका डाटा संस्था द्वार तैयार कर लिया गया है, जल्द ही इस संबंध में एक शिकायत उपायुक्त को सौंपी जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।