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जापानी शुगर-फ्री निजीसेकी नाशपाती बनाएगी तंदुरूस्त
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डायबटिज यानि शुगर युवाओं से लेकर बुजुर्गों को अपनी चपेट में ले चुकी है। लिहाजा शुगर के चलते हर व्यक्ति मीठे से परहेज करता हैं। यही नहीं फलों की मिठास में भी शुगर के आड़े आ जाती है और व्यक्ति फलों को भी नजरअंदाज करता है। मगर जापानी निजीसेकी नाशपाती शुगर फ्री है, जिसका स्वाद भी रसीला है। शुगर-फ्री निजीसेकी नाशपाती तंदुरुस्ती बनाने में काफी कारगर साबित हो रही है। लाडवा में चल रहे पांच दिवसीय फल उत्सव में ऊष्ण-कटिबंधीय केंद्र की ओर से निगी-सिखी को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। निजीसेकी नाशपाती दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
निजीसेकी में मिठास की मात्रा मात्र 5 से 7 फीसद है, जो अन्य फलों के मुकाबले बेहद कम है, जिसे शुगर फ्री भी कह सकते हैं। खास बात यह है कि निजीसेकी में रस यानि पानी की मात्रा 75 फीसद है, जिसके इसमें बहुत रसीलापन हो जाता है। लाडवा केंद्र में इसे वर्ष 2014 में जापान से लाकर लगाया गया था। निजीसेकी को एशियाई नाशपाती के रूप में भी जाना जाता है। पौधा तैयार होने के बाद जब इस पर फल लगा तो उसका रंग हरे की बजाय हल्का गोल्डन था। इसको देखकर बागवानी वैज्ञानिक चकित रह गए। इसके बाद निजीसेकी पर शोध किया गया तो पाया कि इसमें जूस यानि रसीलापन 75 फीसद निकला, जबकि मिठास की मात्रा 5 से 10 फीसद के बीच थी, जबकि सामान्य नाशपाती में मिठास की मात्रा 15 से 20 फीसद के बीच में होती है। जो सामान्य नाशपाती के मुकाबले बहुत कम है। केंद्र की ओर से 30 रुपये में इसका पौधा भी उपलब्ध कराया जा रहा है और यह आसानी से उग भी जाता है। उष्ण-कटिबंधीय केंद्रीय लाडवा के निदेशक डॉ. पवन कुमार का कहना है कि यह नाशपाती रसदार और कम मीठे वाली है। केंद्र में उसे उगाया जा रहा है। एशियाई विटामिन-के, कॉपर और पोटेशियम तत्व युक्त है। यह कम अम्लता यानि एसिड मुक्त है जो एक हाइपोएलर्जेनिक भोजन है। निजीसेकी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
रविवार का दिन रहा नाशपाती-दिवस
फल उत्सव में रविवार को नाशपाती दिवस के दौरान नाशपाती, आड़ू और आलूबुखारा जैसे फलों को प्रदर्शित किया गया। नाशपाती और आड़ू पर उन्नत खेती तकनीक पर वेबिनार के जरिये चर्चा की गई। इस दौरान नाशपाती और आड़ू की उन्नत उत्पादन तकनीक पर लाइव प्रदर्शन किया गया।
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निजीसेकी में मिठास की मात्रा मात्र 5 से 7 फीसद है, जो अन्य फलों के मुकाबले बेहद कम है, जिसे शुगर फ्री भी कह सकते हैं। खास बात यह है कि निजीसेकी में रस यानि पानी की मात्रा 75 फीसद है, जिसके इसमें बहुत रसीलापन हो जाता है। लाडवा केंद्र में इसे वर्ष 2014 में जापान से लाकर लगाया गया था। निजीसेकी को एशियाई नाशपाती के रूप में भी जाना जाता है। पौधा तैयार होने के बाद जब इस पर फल लगा तो उसका रंग हरे की बजाय हल्का गोल्डन था। इसको देखकर बागवानी वैज्ञानिक चकित रह गए। इसके बाद निजीसेकी पर शोध किया गया तो पाया कि इसमें जूस यानि रसीलापन 75 फीसद निकला, जबकि मिठास की मात्रा 5 से 10 फीसद के बीच थी, जबकि सामान्य नाशपाती में मिठास की मात्रा 15 से 20 फीसद के बीच में होती है। जो सामान्य नाशपाती के मुकाबले बहुत कम है। केंद्र की ओर से 30 रुपये में इसका पौधा भी उपलब्ध कराया जा रहा है और यह आसानी से उग भी जाता है। उष्ण-कटिबंधीय केंद्रीय लाडवा के निदेशक डॉ. पवन कुमार का कहना है कि यह नाशपाती रसदार और कम मीठे वाली है। केंद्र में उसे उगाया जा रहा है। एशियाई विटामिन-के, कॉपर और पोटेशियम तत्व युक्त है। यह कम अम्लता यानि एसिड मुक्त है जो एक हाइपोएलर्जेनिक भोजन है। निजीसेकी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
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रविवार का दिन रहा नाशपाती-दिवस
फल उत्सव में रविवार को नाशपाती दिवस के दौरान नाशपाती, आड़ू और आलूबुखारा जैसे फलों को प्रदर्शित किया गया। नाशपाती और आड़ू पर उन्नत खेती तकनीक पर वेबिनार के जरिये चर्चा की गई। इस दौरान नाशपाती और आड़ू की उन्नत उत्पादन तकनीक पर लाइव प्रदर्शन किया गया।
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