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Kurukshetra News: आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में कल लगेगा निशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी शिविर
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में सात जून को निशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर अस्पताल के ओपीडी कमरा नं 14 में सुबह नौ बजे से शुरू होगा। जो दोपहर दो बजे तक चलेगा।
चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट (बीएनडी) अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस जैसे हड्डी संबंधी रोग का पता लगाने के लिए किया जाता है। जो सुरक्षित, दर्द रहित और जल्दी होने वाला टेस्ट है जिसके माध्यम से हड्डियों की मजबूती को मापा जाता है ऐसे मरीज जो पीठ में दर्द या फिर कमर के निचले भाग में लंबे समय से दर्द से परेशान हैं उनके लिए यह शिविर लगाया जा रहा है। शिविर में डेक्सा मशीन की मदद से हड्डियों का घनत्व जांचा जाएगा। जिससे हड्डियों में मौजूद कैल्शियम व अन्य मिनरल्स की जानकारी मिलती है।
उन्होंने बताया कि पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, कम आयु में गर्भाशय निकलवा चुकी महिलाओं, अक्सर शरीर की हड्डियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, पीठ में दर्द और जल्द ही थकान होने लगती है। ऐसे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही वे मरीज जो लंबे वक्त से स्टेरॉयड ले रहे हैं, मेटाबॉलिक बोन डिजीज के रोगी या अचानक डाइट कम होने पर भी इस प्रकार की जांच कराई जा सकती है।
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चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट (बीएनडी) अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस जैसे हड्डी संबंधी रोग का पता लगाने के लिए किया जाता है। जो सुरक्षित, दर्द रहित और जल्दी होने वाला टेस्ट है जिसके माध्यम से हड्डियों की मजबूती को मापा जाता है ऐसे मरीज जो पीठ में दर्द या फिर कमर के निचले भाग में लंबे समय से दर्द से परेशान हैं उनके लिए यह शिविर लगाया जा रहा है। शिविर में डेक्सा मशीन की मदद से हड्डियों का घनत्व जांचा जाएगा। जिससे हड्डियों में मौजूद कैल्शियम व अन्य मिनरल्स की जानकारी मिलती है।
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उन्होंने बताया कि पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, कम आयु में गर्भाशय निकलवा चुकी महिलाओं, अक्सर शरीर की हड्डियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, पीठ में दर्द और जल्द ही थकान होने लगती है। ऐसे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही वे मरीज जो लंबे वक्त से स्टेरॉयड ले रहे हैं, मेटाबॉलिक बोन डिजीज के रोगी या अचानक डाइट कम होने पर भी इस प्रकार की जांच कराई जा सकती है।
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