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Kurukshetra News: फर्जी दस्तावेज पर प्लॉट बेचकर 20 लाख की धोखाधड़ी
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कुरुक्षेत्र। फर्जी दस्तावेज पर प्लॉट की खरीद-फरोख्त कर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने दो लोगों नामजद किया है। थाना शहर थानेसर में दर्ज शिकायत में महिंद्रो देवी निवासी रतगल ने बताया कि उसके परिवार ने अपनी कृषि योग्य भूमि बिकने के बाद शहरी जायदाद में निवेश करने की योजना बनाई। सेक्टर-तीन निवासी आलोक गुप्ता ने उनका विनोद कुमार के साथ घर संपर्क कराया। उसने बताया कि उसके पास काफी प्लाॅट हैं।
आरोपियों ने गांव रतगल के रकबे में दो प्लाट नंबर 59 व 60 दिखाए। 17 अक्तूबर 2014 को शिकायतकर्ता के नाम उन प्लाटों की विक्रय पत्र द्वारा रजिस्टर्ड करवा दिया। रजिस्ट्री कराने के बाद आलोक गुप्ता बार-बार उसके पति बिशन लाल के पास आने जाने लगा। उसने बताया कि उसके साथ एक प्लाॅट नंबर 63 शेष बचा हुआ है, जिसका आरोपी ने उसके पति को एक नक्शा दिखाया इस प्लाॅट 63, प्लाट 59 व 60 के साथ दो प्लॉट छोड़कर था। आरोपियों सोची समझी साजिश के तहत भूमि की मलकियत के संबंध में जमाबंदी वर्ष 2012-13 व विक्रय पत्र तथा इंतकाल नंबर दिखाया। उसे बताया गया कि इंतकाल की रूह से करीब 55 मरले का मालिक था तथा सारी भूमि के प्लॉट बिकने के बाद शेष एक प्लाॅट ही बचा है। आरोपियों ने प्लॉट 63, जिसमें मकान बना हुआ दिखाकर उसके नाम रजिस्ट्री करवा दी, जबकि मौके पर जमीन खाली पड़ी रही।
कोविड महामारी के कारण भूमि की खरीद-फरोख्त का कारोबार ठंडा पड़ गया। बाद में उनको पता चला कि आलोक गुप्ता का प्लाॅट 63 उपलब्ध ही नहीं था। दिखाए हुए प्लाट की जगह एक बनती हुई बिल्डिंग नजर आई। इस बारे में आरोपी से संपर्क किया तो उसने बेचे गए प्लाॅट की बजाए दूसरी जगह प्लॉट उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया, मगर आरोपी ने उसे प्लॉट उपलब्ध नहीं करवाया और प्लॉट के नाम पर 20 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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आरोपियों ने गांव रतगल के रकबे में दो प्लाट नंबर 59 व 60 दिखाए। 17 अक्तूबर 2014 को शिकायतकर्ता के नाम उन प्लाटों की विक्रय पत्र द्वारा रजिस्टर्ड करवा दिया। रजिस्ट्री कराने के बाद आलोक गुप्ता बार-बार उसके पति बिशन लाल के पास आने जाने लगा। उसने बताया कि उसके साथ एक प्लाॅट नंबर 63 शेष बचा हुआ है, जिसका आरोपी ने उसके पति को एक नक्शा दिखाया इस प्लाॅट 63, प्लाट 59 व 60 के साथ दो प्लॉट छोड़कर था। आरोपियों सोची समझी साजिश के तहत भूमि की मलकियत के संबंध में जमाबंदी वर्ष 2012-13 व विक्रय पत्र तथा इंतकाल नंबर दिखाया। उसे बताया गया कि इंतकाल की रूह से करीब 55 मरले का मालिक था तथा सारी भूमि के प्लॉट बिकने के बाद शेष एक प्लाॅट ही बचा है। आरोपियों ने प्लॉट 63, जिसमें मकान बना हुआ दिखाकर उसके नाम रजिस्ट्री करवा दी, जबकि मौके पर जमीन खाली पड़ी रही।
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कोविड महामारी के कारण भूमि की खरीद-फरोख्त का कारोबार ठंडा पड़ गया। बाद में उनको पता चला कि आलोक गुप्ता का प्लाॅट 63 उपलब्ध ही नहीं था। दिखाए हुए प्लाट की जगह एक बनती हुई बिल्डिंग नजर आई। इस बारे में आरोपी से संपर्क किया तो उसने बेचे गए प्लाॅट की बजाए दूसरी जगह प्लॉट उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया, मगर आरोपी ने उसे प्लॉट उपलब्ध नहीं करवाया और प्लॉट के नाम पर 20 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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